सीएम धामी के निर्देश पर पौड़ी में राज्य स्तरीय आपदा मॉक ड्रिल, 2500 लोगों की निकासी का किया गया अभ्यास पौड़ी। मानसून के दौरान संभावित प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए पौड़ी जनपद में गुरुवार को राज्य स्तरीय आपदा मॉक ड्रिल का व्यापक आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर आयोजित इस अभ्यास में जिले के सात संवेदनशील स्थानों पर भूस्खलन, बादल फटना, नदियों के जलस्तर में अचानक वृद्धि तथा राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित होने जैसी परिस्थितियों का सजीव प्रदर्शन किया गया। इस दौरान प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित एजेंसियों की त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता और विभागीय समन्वय की गहन समीक्षा की गई। जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने कलेक्ट्रेट स्थित एकीकृत आपदा कंट्रोल रूम से पूरे अभियान की पल-पल निगरानी करते हुए सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वास्तविक आपदा की स्थिति में समय पर सूचना, त्वरित कार्रवाई और बेहतर समन्वय ही जनहानि को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। मॉक ड्रिल की शुरुआत सुबह 9:15 बजे सतपुली-गुमखाल मार्ग पर भूस्खलन के परिदृश्य से हुई, जहां सड़क बंद होने और 20 से 30 लोगों के फंसे होने की सूचना पर राहत दल ने तत्काल पहुंचकर रेस्क्यू अभियान चलाया तथा घायल को अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद थलीसैंण में बादल फटने की काल्पनिक घटना में 25 लोगों के प्रभावित होने, दो लोगों की मृत्यु और तीन गंभीर घायलों को अस्पताल रेफर करने का अभ्यास किया गया। कोटद्वार के सिम्बलचौड़ क्षेत्र में सुखरौ नदी का जलस्तर बढ़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और घायलों को उपचार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया गया। श्रीनगर के फरासू क्षेत्र में भूस्खलन से राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने और 80 से 100 लोगों के फंसने की स्थिति में राहत सामग्री भेजने, यातायात डायवर्ट करने तथा जेसीबी मशीनों से मार्ग खोलने का अभ्यास किया गया। धारी देवी के समीप गोवा बीच क्षेत्र तथा अल्केश्वर घाट में अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में रेस्क्यू और मेडिकल सहायता की तैयारियों को परखा गया। मॉक ड्रिल का सबसे बड़ा अभ्यास लक्ष्मणझूला क्षेत्र में हुआ, जहां गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन की संयुक्त टीम ने विभिन्न घाटों से लगभग 2500 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का सफल अभ्यास किया। इस दौरान भीड़ प्रबंधन, यातायात नियंत्रण और राहत शिविर संचालन की व्यवस्थाओं का भी परीक्षण किया गया। समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा के समय किसी भी स्तर पर संचार व्यवस्था प्रभावित नहीं होनी चाहिए। बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक सुविधाओं की शीघ्र बहाली सुनिश्चित करना सभी विभागों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी। उन्होंने ग्राम प्रधानों, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत प्रतिनिधियों को भी आपदा प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने के निर्देश दिए ताकि स्थानीय स्तर पर प्रारंभिक सूचना और राहत कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा सके। राज्य स्तरीय इस मॉक ड्रिल ने स्पष्ट किया कि मानसून सीजन से पहले पौड़ी जनपद का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड में है और किसी भी संभावित आपदा से निपटने के लिए प्रशासन ने अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। Post navigation दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद गड्ढों का दावा, वायरल वीडियो में युवाओं ने वाहनों को किया सतर्क; वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कानून के राज और शिक्षा सुधार पर भाजपा का जोर, कांग्रेस पर साधा निशाना