देहरादून/नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में दावा किया जा रहा है कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद कई स्थानों पर गहरे गड्ढे बन गए हैं। वीडियो में कुछ स्थानीय युवा एक्सप्रेसवे पर खड़े होकर आने वाले वाहनों को सावधानीपूर्वक दूसरी ओर से निकलने का संकेत देते दिखाई दे रहे हैं। दावा है कि उनकी सतर्कता के कारण संभावित सड़क दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिली। हालांकि, इस वायरल वीडियो और उसमें किए गए दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित सरकारी एजेंसियों या परियोजना से जुड़े अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इसलिए इस वीडियो को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा। यदि वीडियो में दिखाए गए दावे सही हैं, तो यह सड़क सुरक्षा और रखरखाव से जुड़ा गंभीर विषय हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे जैसी उच्च गति वाली सड़कों पर छोटे गड्ढे भी बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। ऐसे में समय पर निरीक्षण, मरम्मत और चेतावनी संकेतों की व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश की महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है। लगभग 210 किलोमीटर लंबा यह एक्सप्रेसवे दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड को जोड़ता है। परियोजना का उद्देश्य दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा समय को लगभग 6–6.5 घंटे से घटाकर करीब 2.5 घंटे करना है। यह मार्ग बेहतर कनेक्टिविटी, तेज यातायात और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा है। वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सड़क सुरक्षा से जुड़े जानकारों का कहना है कि किसी भी वायरल वीडियो के आधार पर निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित एजेंसियों की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए। यदि वास्तव में सड़क पर गड्ढे बने हैं, तो संबंधित एजेंसियों को शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत कार्य कराना चाहिए ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। वहीं वाहन चालकों से भी अपील है कि बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे पर निर्धारित गति सीमा का पालन करें, सुरक्षित दूरी बनाए रखें और किसी भी असामान्य स्थिति में सावधानी बरतें। Post navigation मानसून की दस्तक के साथ गौचर-पनाई में गूंजा धान रोपाई का उल्लास मानसून से पहले पौड़ी में आपदा से जंग की रिहर्सल, सात संवेदनशील स्थानों पर परखी गई तैयारियां