कोटद्वार के काशीरामपुर तल्ला के हजारों लोग वर्षों से रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास की मांग कर रहे हैं। रेलवे ट्रैक के कारण लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जबकि पैदल ट्रैक पार करना जोखिम भरा है। क्षेत्रवासियों ने सांसद अनिल बलूनी से समाधान की मांग की है।

बड़ी आबादी वाले काशीरामपुर तल्ला में दशकों से रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास की मांग, सुरक्षित आवागमन के अभाव में रोज झेलनी पड़ रही परेशानी

कोटद्वार। विकास के दावों और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के बीच कोटद्वार का काशीरामपुर तल्ला क्षेत्र आज भी एक ऐसी मूलभूत समस्या से जूझ रहा है, जिसका समाधान वर्षों बाद भी नहीं हो पाया है। नगर निगम कोटद्वार के अंतर्गत आने वाले इस घनी आबादी वाले क्षेत्र के हजारों निवासी रेलवे ट्रैक के कारण रोजाना परेशानियों का सामना कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों की लंबे समय से मांग है कि यहां रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) अथवा अंडरपास का निर्माण कराया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सके।

काशीरामपुर तल्ला भौगोलिक दृष्टि से एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसके पूर्व में खोह नदी पार सनेह क्षेत्र स्थित है, जबकि पश्चिमी दिशा में कौड़िया, काशीरामपुर मल्ला और गोविंदनगर जैसे आवासीय इलाके हैं। इन क्षेत्रों के बीच से गुजरने वाली रेलवे लाइन स्थानीय लोगों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है। रेलवे ट्रैक के कारण क्षेत्र दो हिस्सों में बंटा हुआ प्रतीत होता है और लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए अनावश्यक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बाजार में खरीदारी, बैंकिंग कार्य, अस्पताल, सरकारी कार्यालयों तथा अन्य आवश्यक कामों के लिए उन्हें लंबा चक्कर लगाकर लकड़ी पड़ाव-मालगोदाम रोड से होकर गुजरना पड़ता है। यह मार्ग पहले से ही अत्यधिक व्यस्त रहता है, जहां दिनभर वाहनों की भारी आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में लोगों का समय और ईंधन दोनों बर्बाद होते हैं, वहीं ट्रैफिक जाम की समस्या अलग से झेलनी पड़ती है।

सबसे गंभीर चिंता का विषय यह है कि रेलवे ट्रैक पार करने के लिए आज तक कोई अधिकृत और सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई है। न तो यहां रेलवे ओवरब्रिज बनाया गया और न ही अंडरपास की सुविधा विकसित की गई। परिणामस्वरूप अनेक लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर रेलवे ट्रैक पार करने को मजबूर हैं। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है।

क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक बताते हैं कि यह मांग नई नहीं है। वर्षों पहले तत्कालीन केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री एवं गढ़वाल सांसद रहे जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के प्रयासों से यहां रेलवे ओवरब्रिज निर्माण का प्रस्ताव केंद्र स्तर पर स्वीकृत कराया गया था। हालांकि, उस समय परियोजना के लिए राज्य सरकार की ओर से आवश्यक वित्तीय अंशदान की स्वीकृति नहीं मिल सकी, जिसके कारण यह महत्वपूर्ण योजना फाइलों में ही सिमटकर रह गई। यदि उस समय यह परियोजना पूरी हो जाती तो आज क्षेत्रवासियों को इस समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।

हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय बाद भी इस दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई नहीं देती। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि चुनावों के दौरान विकास और जनसुविधाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन काशीरामपुर तल्ला की इस मूलभूत समस्या के समाधान के लिए गंभीर पहल नहीं हो सकी। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विभिन्न जनप्रतिनिधियों के समक्ष कई बार यह मुद्दा उठाया गया, लेकिन आश्वासनों से आगे बात नहीं बढ़ पाई।

यह स्थिति तब और अधिक चर्चा का विषय बन जाती है, जब यह क्षेत्र कोटद्वार विधानसभा के अंतर्गत आता है और यहां की विधायक उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष रितु खंडूरी भूषण हैं। प्रदेश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्थाओं में से एक विधानसभा की अध्यक्ष होने के बावजूद क्षेत्रवासियों की यह वर्षों पुरानी मांग आज भी अधूरी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व स्वयं विधानसभा अध्यक्ष कर रही हों, वहां आधारभूत सुविधाओं से जुड़ी ऐसी महत्वपूर्ण समस्या का वर्षों तक लंबित रहना कई सवाल खड़े करता है।

क्षेत्रवासियों का मानना है कि रितु खंडूरी को इस मामले को प्राथमिकता के आधार पर राज्य और केंद्र स्तर पर उठाना चाहिए था। उनका कहना है कि यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक समन्वय के साथ प्रयास किए जाएं तो रेलवे ओवरब्रिज अथवा अंडरपास जैसी परियोजना को साकार करना मुश्किल नहीं है। लेकिन अब तक ऐसा कोई प्रभावी प्रयास धरातल पर दिखाई नहीं दिया है, जिससे लोगों में निराशा बढ़ रही है।

स्थानीय नागरिक यह भी उदाहरण देते हैं कि कोटद्वार-नजीबाबाद रेलखंड के निकट उत्तर प्रदेश सीमा में रेलवे प्रशासन द्वारा कई स्थानों पर अंडरपास का निर्माण कराया गया है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्या काफी हद तक दूर हुई है। ऐसे में काशीरामपुर तल्ला जैसे घनी आबादी वाले क्षेत्र को इस सुविधा से वंचित रखना समझ से परे है।

अब क्षेत्रवासियों की निगाहें गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी पर भी टिकी हैं। लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार और रेलवे मंत्रालय में प्रभावी समन्वय स्थापित कर इस लंबे समय से लंबित परियोजना को आगे बढ़ाया जा सकता है। क्षेत्र के लोगों ने सांसद से मांग की है कि वे इस समस्या का संज्ञान लेकर रेलवे ओवरब्रिज या अंडरपास निर्माण के लिए ठोस पहल करें।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह केवल आवागमन की सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि सुरक्षा, समय की बचत, आर्थिक लाभ और क्षेत्र के समग्र विकास से जुड़ा विषय है। जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक काशीरामपुर तल्ला के हजारों लोगों को रोजाना परेशानी और जोखिम का सामना करना पड़ता रहेगा। ऐसे में अब क्षेत्रवासी उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी दशकों पुरानी मांग को गंभीरता से लिया जाएगा और काशीरामपुर को सुरक्षित एवं सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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