थराली/चमोली। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। चमोली जनपद के थराली क्षेत्र की 35 वर्षीय सरिता देवी की कथित तौर पर इलाज में देरी और विशेषज्ञ चिकित्सक की अनुपलब्धता के कारण मौत हो गई। इस घटना ने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सरिता देवी को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) थराली लाया गया था। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ (गायनेकोलॉजिस्ट) उपलब्ध नहीं था, जिसके चलते उन्हें करीब पांच घंटे तक अस्पताल में ही रखा गया। इस दौरान उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती रही।

परिजनों के अनुसार, जब महिला की हालत अधिक गंभीर हो गई तब उसे उच्च चिकित्सा केंद्र के लिए रेफर किया गया। हालांकि, पर्वतीय क्षेत्र की लंबी दूरी और समय पर उपचार न मिलने के कारण कर्णप्रयाग पहुंचने से पहले ही सरिता देवी ने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में शोक की लहर है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी बड़ी चुनौती

उत्तराखंड के दूरस्थ और पर्वतीय इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति लंबे समय से चिंता का विषय रही है। राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर विशेषज्ञ चिकित्सकों, आधुनिक उपकरणों और पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ की कमी लगातार सामने आती रही है।

विशेष रूप से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्थिति कई क्षेत्रों में चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों के बिना संचालित हो रहे हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को जिला या बेस अस्पतालों के भरोसे रहना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने की जवाबदेही तय करने की मांग

घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध होते या समय पर रेफर किया जाता, तो महिला की जान बचाई जा सकती थी।

स्थानीय नागरिकों ने पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में रिक्त पदों को तत्काल भरने, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को मजबूत करने तथा गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष स्वास्थ्य प्रबंधन व्यवस्था लागू करने की मांग की है।

सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

यह घटना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है, बल्कि दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना भी उतना ही आवश्यक है।

यदि पर्वतीय क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी, रेफरल प्रणाली की खामियां और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाओं की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में भी ऐसी दुखद घटनाएं सामने आती रह सकती हैं।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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