जीएसटी कटौती और नियमितीकरण मामले में सरकार को हाईकोर्ट की फटकार नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में वर्षों से कार्यरत उपनल संविदा कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा है कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान दिया जाए। यह निर्देश उन कर्मचारियों द्वारा दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिनका आरोप है कि कोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद सरकार ने अब तक उनका नियमितीकरण नहीं किया और न ही चयनित वेतनमान लागू किया। शुक्रवार को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि उपनल कर्मचारियों की जगह की जाने वाली नई नियुक्तियों का निर्णय फिलहाल वापस ले लिया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि वह कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने के लिए तैयार है, लेकिन इसके साथ यह शर्त रखी गई है कि कर्मचारी भविष्य में अन्य मांगें नहीं करेंगे। वहीं उपनल संविदा कर्मचारी संघ की ओर से कोर्ट में पक्ष रखते हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2013 की नियमावली के तहत स्कंद पुष्प केंद्र में कार्यरत उपनल कर्मचारियों को नियमित किया गया था, इसलिए समान आधार पर अन्य कर्मचारियों को भी नियमित किया जाना चाहिए। संघ की ओर से यह भी कहा गया कि मामले को बार-बार कैबिनेट में ले जाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा दिए गए आदेशों का पालन किया जाना चाहिए। संघ के अधिवक्ताओं ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट आदेश दिए थे, लेकिन राज्य सरकार ने अब तक उस पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से उस आदेश को न्यायालय के रिकॉर्ड में भी प्रस्तुत नहीं किया गया। मामले में पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा भी “उत्तराखंड उपनल कर्मचारी संघ बनाम आनंद बर्धन, मुख्य सचिव उत्तराखंड” प्रकरण में प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की मांग की गई थी। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें दिए जाने वाले वेतन से जीएसटी की कटौती की जा रही है, जो नियमों के विपरीत है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि कर्मचारियों को पहले न्यूनतम वेतनमान उपलब्ध कराया जाए। मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 जून की तिथि निर्धारित की गई है। प्रदेशभर के हजारों उपनल संविदा कर्मचारियों की निगाहें अब इस मामले पर टिकी हुई हैं, क्योंकि आने वाला फैसला उनके भविष्य और नियमितीकरण की दिशा तय कर सकता है। Post navigation केदारनाथ में वीआईपी दर्शन व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब 1100 रुपये में बनेगी विशेष दर्शन पर्ची पत्रकारिता दिवस पर वरिष्ठ पत्रकारों और समाजसेवियों का हुआ सम्मान, डिजिटल युग की चुनौतियों पर मंथन