Category: लेख

नई शिक्षा नीति से हमें औपनिवेशिक गुलाम मानसिकता से मुक्ति मिलेगी

नई शिक्षा नीति ब्रिटिश शासन की औपनिवेशिक गुलाम मानसिकता से मुक्त कर भारत के वास्तविक ज्ञान से जोड़ने का एक ऐतिहासिक कदम है। नई शिक्षा नीति को लेकर चल रहा…

पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन और चिंतन की जरूरत

प्रकृति के घटक होने के नाते पर्यावरण वंदन के माध्यम से हमने अपनी संस्कृति, परंपराओं के महत्व को समझा है, प्रत्येक व्यक्ति प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण, संवर्धन, चिंतन और…

पलायन थामने में योगदान देंगे केंद्रीय विद्यालय !

गांवों की बदहाली के बीच डाॅ.निशंक की घोषणा से बंधी उम्मीद देहरादून। उत्तराखंड में पलायन मुख्य समस्या है। अभी इसका कोई ठोस समाधान नजर नहीं आ रहा है। गांवों की…

विश्व बाजार में भारतीय खिलौना उद्योग को बेहतर करना होगा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम से स्पष्ट हुआ है कि अगर विश्व बाजार में चीन को पछाड़ना है, तो भारतीय खिलौना उद्योग और मोबाइल गेम्स के…

प्रकृति मानव जीवन के अस्तित्व का है आधार

प्रकृति मानव जीवन का प्रमुख हिस्सा है। प्रकृति और मानव एक दूसरे के पूरक हैं।इस सृष्टि में प्रकृति के बिना मानव की परिकल्पना असम्भव है।प्रकृति दो शब्दों से मिलकर बनी…

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020ः भारत में अतिथि की तरह रहेंगे विदेश के विद्यार्थी

शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण की आवश्यकता थी देहरादून। सूचना और प्रौद्योगिकी के इस युग में पूरी दुनिया इन्सान की एक मुट्ठी में समा गई है। विश्व फलक पर देखें तो देश…

भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में नई शिक्षा नीति सक्षम

कमल किशोर डुकलान, रुड़की (हरिद्वार) नई शिक्षा नीति भारत को पुनःविश्वगुरु बनाने तथा भारतीय समाज में सकारात्मक परिवर्तन का नया सवेरा लाने एवं बच्चों के सर्वागीण विकास और भारतीय संस्कृति…

भारतीय भाषाएं भावनात्मक, बौद्धिक और व्यापारिक जरूरतों की पूर्ति में सहायक

कमल किशोर डुकलान, रुड़की हरिद्वार नई शिक्षा नीति की सबसे विशिष्ट बात भारतीय भाषाओं में भाषा को कल्पवृक्ष के रुप में महत्व देने की है। अच्छा है कि इसे अनिवार्य…

नई शिक्षा नीतिः ‘प्री’ पास, ‘मेन्स’ अभी बाकी…..

-योगेश भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार …नयी शिक्षा नीति को निर्विवाद रूप से सरकार की मंजूरी दिलाने का श्रेय मानव संसाधन विकास मंत्री (नई नीति के मुताबिक केंद्रीय शिक्षा मंत्री) रमेश पोखरियाल…

कौशल ज्ञान के बूते मिले देशज नवाचारों को पर्याप्त प्रोत्साहन

कमल किशोर डुकलान एक बहुत पुरानी कहावत है कि आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है। लेकिन नूतन आविष्कार वही लोग कर पाते हैं, जो कल्पनाशील होते हैं। ऐसे लोग अपने…

आधुनिक भारत की नई तस्वीर गढ़ेंगे देश के गांव

आधुनिक भारत के निर्माण में डिजिटल व्यवस्था को विकसित करने से न केवल गांव के लोगों को फायदा होगा बल्कि देश तरक्की की राह पर तेजी से आगे भी बढ़ेगा।…

नई शिक्षा नीतिः भारत ज्ञान आधारित विकास की ओर…..!!

कमल किशोर डुकलान, स्वतंत्र लेखक भारत की नई शिक्षा नीति से यह सिद्ध होता है कि यहां आने वाले समय में किसी भी व्यक्ति का सिर्फ एक योग्यता से काम…

नया उपभोक्ता संरक्षण कानून: व्यापक और समावेशी

डॉ. अजय खेमरिया 20 जुलाई से लागू हो चुके नए उपभोक्ता संरक्षण कानून के साथ ही भारत में दावा किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं के साथ ठगी और धोखाधड़ी…

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब नॉन क्लीनिकल पीजी की पढ़ाई एक लाख रुपये में होगी

देहरादून। प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में अब नॉन क्लीनिकल पीजी की पढ़ाई एक लाख रुपये में होगी। सात साल के बाद नॉन क्लीनिकल पीजी पाठ्यक्रम की फीस को सालाना…

बेजुबान विनायकी पर समाज चुप क्यों?

-कौशल अरोड़ा (जयपुर) देश मे घटित होने वाली घटनाओं की छाप जन मानस के साथ उन बच्चों पर भी पढ़ती है जिन्हें शिक्षा के साथ ज्ञान की गंगा में स्नान…

9 जून पावन स्मरण: बिरसा मुंडा

⇒ कौशल अरोड़ा, जयपुर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतभूमि पर ऐसे कई नायक पैदा हुए जिन्होंने इतिहास में अपना नाम स्वर्णाक्षरों से लिखवाया. एक छोटी सी आवाज को नारा बनने…

कोरोना से बचायेगा हल्दी वाला दूध या पानी

कोरोना जैसी महामारी से बचने के लिए आए दिन वैज्ञानिक कुछ न कुछ नई खोज कर रहे हैं। ऐसे में लोग अपने आप को कोरोना से बचाने के लिए कई…

अभी भी वक्त है …

⇒ डा0 रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ विश्व केे विभिन्न क्षेत्रों में विकास की विसंगतियां हमारे सामान्य वैश्विक पर्यावरण के लिये कई गंभीर समस्या बन गयी हैं।परिणामस्वरूप हम पर्यावरण के जटिल मुद्दे…

आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि, दार्शनिक दृष्टिक्षेप, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा सांगठनिक स्नेहिलता से युक्त श्री गुरुजी का चिन्तन

”माधवराव गोलवलकर को श्री गुरुजी के नाम से भी जाना जाना जाता है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक (सुप्रीम लीडर) थे। आध्यात्मिक अन्तर्दृष्टि, दार्शनिक दृष्टिक्षेप, वैज्ञानिक विश्लेषण तथा सांगठनिक…

तिलाड़ी कांडः उत्तराखण्ड के इतिहास का काला दिवस

– डा. राजेश्वर उनियाल 30 मई 1930 भारत के इतिहास में काला दिवस के रूप में अंकित किया जाता है। इस दिन उत्तराखंड के जनरल डायर, दीवान चक्रधर जुयाल ने…