अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण ने अब नया मोड़ ले लिया है। अयोध्या के पूर्व भाजपा सांसद और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल विनय कटियार ने मामले को लेकर कई महत्वपूर्ण दावे किए हैं। उनके बयान के बाद इस प्रकरण को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा और तेज हो गई है। विनय कटियार ने कहा कि यदि जांच में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे घटनाक्रम पर उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत हुई है। कटियार के अनुसार, प्रधानमंत्री ने उनसे मामले की स्थिति और आगे की संभावित कार्रवाई को लेकर जानकारी ली थी। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कटियार ने कहा कि राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और दशकों लंबे संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हजारों रामभक्तों और कारसेवकों के त्याग और बलिदान के बाद मंदिर का निर्माण संभव हुआ। ऐसे में यदि चढ़ावे के धन के उपयोग में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना आवश्यक है। उन्होंने ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जांच एजेंसियां बिना किसी दबाव के अपना कार्य करें और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। एसआईटी की जांच लगातार आगे बढ़ रही दूसरी ओर, मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जांच एजेंसियां ट्रस्ट से जुड़े पदाधिकारियों से पूछताछ करने के साथ-साथ चढ़ावे से संबंधित वित्तीय अभिलेख, ऑडिट रिकॉर्ड और बैंक लेन-देन की भी विस्तार से जांच कर रही हैं। बैंक अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से भी पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, अब तक जुटाए गए दस्तावेजों और बयानों का मिलान किया जा रहा है। यदि जांच के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है। पहले भी उठ चुके हैं सवाल इस प्रकरण के सामने आने के बाद राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। उन्होंने संकेत दिया था कि यदि श्रद्धालुओं के चढ़ावे में अनियमितता हुई है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए। जांच के निष्कर्ष पर टिकी निगाहें फिलहाल पूरे मामले पर सभी की निगाहें जांच एजेंसियों की रिपोर्ट पर टिकी हैं। जांच पूरी होने और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोप कितने सही हैं और आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तब तक इस प्रकरण से जुड़े सभी दावे जांच के अधीन हैं और उन्हें अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। Post navigation कोलकाता में बड़ा हादसा: तारातल्ला में निर्माणाधीन गोदाम का शेड ढहा, 50 से अधिक मजदूर मलबे में फंसे, सेना भी रेस्क्यू में जुटी बेलगाम में 10 से 12 जुलाई तक होगी संघ के प्रांत प्रचारकों की अंतिम बैठक, नई संगठनात्मक संरचना पर रहेगा फोकस