कोलकाता । पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के तारातल्ला इलाके में बुधवार दोपहर एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। यहां एक निर्माणाधीन गोदाम (वेयरहाउस) का विशाल शेड अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे मौके पर काम कर रहे दर्जनों मजदूर मलबे के नीचे दब गए। हादसे के समय निर्माण स्थल पर करीब 50 से 60 मजदूर मौजूद थे। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और राहत-बचाव कार्य के लिए पुलिस, दमकल विभाग, आपदा प्रबंधन टीमों के साथ सेना को भी बुलाना पड़ा।

पलक झपकते ही ढहा निर्माणाधीन ढांचा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोदाम में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा था। दोपहर के समय मजदूर अपने-अपने कार्यों में व्यस्त थे, तभी अचानक तेज आवाज के साथ पूरा शेड और उसका ढांचा धराशायी हो गया। कुछ ही सेकेंड में लोहे के भारी बीम, छत और निर्माण सामग्री का विशाल ढेर मजदूरों पर आ गिरा।

हादसे के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने चीख-पुकार सुनकर राहत कार्य शुरू किया और मलबे में दबे मजदूरों को निकालने का प्रयास किया। स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

6 से 7 मजदूरों को निकाला गया, कई की हालत गंभीर

राहत एवं बचाव दलों ने अब तक मलबे से 6 से 7 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है। अधिकारियों के अनुसार, घायलों में कुछ मजदूरों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज जारी है।

मलबे के नीचे अभी भी कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। बचावकर्मी लगातार जीवन रक्षक उपकरणों और विशेष तकनीकों की मदद से फंसे हुए लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं।

सेना, दमकल और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर तैनात

हादसे की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया है। दमकल विभाग की कई गाड़ियां, आपदा प्रबंधन बल और पुलिस की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं। इसके अलावा सेना को भी राहत कार्य में शामिल किया गया है ताकि मलबे के नीचे फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित निकाला जा सके।

लोहे के भारी-भरकम बीमों को काटने के लिए गैस कटर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि बड़े मलबे को हटाने के लिए क्रेन और अन्य भारी मशीनों की मदद ली जा रही है।

मलबे के नीचे से सुनाई दे रही हैं मजदूरों की आवाजें

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान मलबे के नीचे दबे मजदूरों की आवाजें और मदद की पुकार सुनाई देने की खबरों ने माहौल को और अधिक भावुक बना दिया है। घटनास्थल पर अपने परिजनों की तलाश में पहुंचे परिवारों की चिंता बढ़ती जा रही है।

प्रशासन का कहना है कि जब तक सभी मजदूरों का पता नहीं चल जाता, तब तक राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहेगा।

नवान्न में कंट्रोल रूम स्थापित

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य सचिवालय नवान्न में विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया है। वरिष्ठ अधिकारी लगातार राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और घटनास्थल से पल-पल की जानकारी ली जा रही है।

हादसे की वजह पर उठे सवाल

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कोलकाता और आसपास के इलाकों में हुई भारी बारिश के कारण निर्माणाधीन ढांचे की मजबूती प्रभावित हुई हो सकती है। हालांकि, सुरक्षा मानकों और निर्माण गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया हो, तो यह दुर्घटना लापरवाही का परिणाम भी हो सकती है। प्रशासन ने हादसे के कारणों की जांच के आदेश दे दिए हैं।

मंत्री और राजनीतिक नेताओं ने लिया जायजा

घटनास्थल पर पहुंचे राज्य के मंत्री इंद्रनील खान और भाजपा नेता राकेश सिंह ने राहत कार्यों का जायजा लिया। दोनों नेताओं ने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।

उन्होंने आश्वासन दिया कि हादसे के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद सामने आएगी वास्तविक वजह

फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान बचाव अभियान पर केंद्रित है। रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद तकनीकी विशेषज्ञों और इंजीनियरों की टीम निर्माणाधीन गोदाम के ढहने के कारणों की विस्तृत जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

कोलकाता के तारातल्ला में हुआ यह हादसा एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों के पालन और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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