देहरादून। उत्तराखंड में बीते कुछ दिनों से गर्मी और उमस से परेशान लोगों के लिए राहत भरी खबर है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य में मानसून फिर से पूरी तरह सक्रिय हो गया है और 1 जुलाई से प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में व्यापक वर्षा का दौर शुरू होने की संभावना है। इसके प्रभाव से तापमान में उल्लेखनीय गिरावट आएगी तथा मौसम सुहावना हो जाएगा। राजधानी देहरादून सहित आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का असर साफ दिखाई देगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार देहरादून का अधिकतम तापमान घटकर लगभग 26 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। तापमान में यह गिरावट लोगों को उमस और गर्मी से राहत दिलाएगी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से मिल रही पर्याप्त नमी के कारण उत्तराखंड में मानसूनी गतिविधियां तेज हो रही हैं। इसके चलते पर्वतीय और मैदानी दोनों क्षेत्रों में बारिश की तीव्रता बढ़ सकती है। कई स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज वर्षा और आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका है। इन जिलों में विशेष सतर्कता की जरूरत मौसम विभाग ने राज्य के नौ जिलों के लिए विशेष सतर्कता बरतने की सलाह जारी की है। इनमें: बागेश्वर पिथौरागढ़ नैनीताल अल्मोड़ा ऊधमसिंह नगर चंपावत चमोली रुद्रप्रयाग पौड़ी गढ़वाल शामिल हैं। इन जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा हो सकती है। 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक चल सकती हैं तेज हवाएं बारिश के साथ 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झक्कड़ या तेज आंधी चलने की संभावना भी जताई गई है। तेज हवाओं के कारण पेड़ गिरने, बिजली लाइनों को नुकसान पहुंचने और यातायात प्रभावित होने का खतरा बना रह सकता है। पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ा भूस्खलन का खतरा लगातार बारिश के कारण पर्वतीय जिलों में भूस्खलन, पत्थर गिरने और सड़कें बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। चारधाम यात्रा मार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही सफर करने की सलाह दी गई है। जनता के लिए महत्वपूर्ण सलाह प्रशासन और मौसम विभाग ने लोगों से निम्न सावधानियां बरतने का आग्रह किया है: खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें। नदी, नालों और गदेरों के आसपास जाने से परहेज करें। तेज आंधी और बिजली चमकने के दौरान खुले मैदानों में न रहें। पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा के दौरान भूस्खलन संभावित स्थलों पर विशेष सावधानी बरतें। मौसम संबंधी चेतावनियों और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करें। वाहन चलाते समय गति नियंत्रित रखें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें। राहत के साथ चुनौती भी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बारिश जहां एक ओर किसानों के लिए लाभकारी साबित होगी और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करेगी, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा संबंधी जोखिम भी बढ़ा सकती है। ऐसे में नागरिकों, यात्रियों और स्थानीय प्रशासन को पूरी सतर्कता के साथ मौसम की स्थिति पर नजर बनाए रखने की आवश्यकता है। Post navigation राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और ईआरपी प्रणाली से शिक्षा में आएगा गुणात्मक सुधार: विशेषज्ञ उत्तराखंड फिल्म नीति-2024 का असर दिखना शुरू, तीन युवाओं को मिली छात्रवृत्ति; फिल्मी करियर के सपनों को मिली नई उड़ान