12 दिनों तक चला गहन उपचार, चिकित्सकों की टीम ने बचाई मासूम की जान 40 एंटी स्नेक वेनम, 17 एफएफपी और 4 क्रायोप्रेसिपिटेट यूनिट चढ़ाकर किया सफल इलाज रुद्रप्रयाग की बालिका को गंभीर सर्पदंश और डीआईसी जैसी जानलेवा स्थिति से उबारा श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय, श्रीनगर ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं का परिचय देते हुए सर्पदंश से गंभीर रूप से पीड़ित 12 वर्षीय बालिका की जान बचाने में सफलता हासिल की है। चिकित्सकों की सतर्कता, विशेषज्ञ उपचार और 12 दिनों तक चली निरंतर निगरानी के बाद बालिका अब पूरी तरह स्वस्थ होकर खतरे से बाहर है। जानकारी के अनुसार रुद्रप्रयाग जनपद के भराणसैंण गांव निवासी 12 वर्षीय प्रतिज्ञा को 17 जून को घर के निकट घास काटते समय जहरीले सांप ने डंस लिया था। परिजन तत्काल उसे गंभीर अवस्था में हेमवती नंदन बहुगुणा बेस चिकित्सालय, श्रीनगर लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के दौरान पता चला कि सर्प का विष शरीर में तेजी से फैल चुका है और बच्ची डिसेमिनेटेड इंट्रावस्कुलर कोएग्यूलेशन (डीआईसी) जैसी अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति से जूझ रही है। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सीएम शर्मा के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। उपचार के दौरान बच्ची को 40 एंटी स्नेक वेनम (एएसवी), 17 यूनिट फ्रेश फ्रोजन प्लाज्मा (एफएफपी) तथा 4 यूनिट क्रायोप्रेसिपिटेट दिए गए। विष के प्रभाव से प्रभावित हाथ में बढ़ती सूजन और जटिलताओं को नियंत्रित करने के लिए सर्जरी विभाग के डॉ. लक्ष्मण यादव द्वारा आवश्यक शल्य प्रक्रिया भी की गई। लगातार 12 दिनों तक गहन चिकित्सा, विशेषज्ञ निगरानी और बहु-विषयक चिकित्सा टीम के समन्वित प्रयासों से प्रतिज्ञा की स्थिति में लगातार सुधार हुआ और अंततः उसे पूर्णतः स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस सफल उपचार में वरिष्ठ रेजिडेंट डॉ. अजय गोस्वामी, जूनियर रेजिडेंट डॉ. ज्योति, डॉ. दीपांशु, डॉ. आकाश, डॉ. रोहित, डॉ. अभिलाषा, नर्सिंग स्टाफ तथा ब्लड सेंटर की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों के समर्पण एवं पेशेवर दक्षता ने एक परिवार की उम्मीदों को टूटने से बचा लिया। बेटी के स्वस्थ होने पर पिता विक्रम सिंह और माता सरिता देवी ने भावुक होकर चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ, ब्लड सेंटर तथा उत्तराखंड सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अस्पताल की टीम ने उनकी बेटी को नया जीवन दिया है और परिवार की खुशियां वापस लौटा दी हैं। Post navigation महिला और बाल सुरक्षा को नई मजबूती: टिहरी पुलिस की ‘टीम गौरा’ करेगी जागरूकता और सुरक्षा अभियान का नेतृत्व मानसून की दस्तक के साथ गौचर-पनाई में गूंजा धान रोपाई का उल्लास