✍️ सुभाष चंद्र जोशी


 उत्तराखंड राजनीति के लिए जुलाई का महीना कई मायने में खास है। क्योंकि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे अधिक समय तक मुख्यमंत्री का कार्यकाल का नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री के रूप में 1,832 दिन पूरे कर राज्य के सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने का नया रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कराया है। इससे पहले यह उपलब्धि पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के नाम थी, जिन्होंने 1,831 दिनों तक मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। महज एक दिन का यह अंतर भले ही सांकेतिक लगे, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह उत्तराखंड के नेतृत्व के इतिहास में एक नए अध्याय का प्रतीक है।
हालाँकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी सरकार का मूल्यांकन केवल कार्यकाल की अवधि या रिकॉर्ड से नहीं होता। किसी भी नेतृत्व की वास्तविक पहचान उसके निर्णयों, प्रशासनिक दक्षता, जनविश्वास और आम नागरिक के जीवन में आए बदलाव से तय होती है। इसलिए धामी सरकार के पाँच वर्षों का संतुलित और वस्तुनिष्ठ आकलन आवश्यक है।
जब पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली, तब उत्तराखंड कोविड-19 महामारी के प्रभाव से उबरने की प्रक्रिया में था। पर्यटन उद्योग प्रभावित था, व्यापारिक गतिविधियाँ धीमी थीं, रोजगार के अवसर सीमित हो गए थे और राज्य के सामने आर्थिक पुनरुद्धार की चुनौती थी। चारधाम यात्रा को व्यवस्थित करना, निवेश आकर्षित करना, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना तथा राजनीतिक स्थिरता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल था।
पाँच वर्षों के दौरान धामी सरकार ने कई ऐसे निर्णय लिए, जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा हुई। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया। निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से बड़े निवेश प्रस्तावों को आकर्षित करने का प्रयास किया गया।
सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल सेवाओं और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में अनेक परियोजनाएँ आगे बढ़ीं। चारधाम यात्रा प्रबंधन में पंजीकरण व्यवस्था, निगरानी प्रणाली और प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने के प्रयास किए गए। साथ ही होमस्टे नीति, पर्यटन विस्तार, खेल नीति, महिलाओं के सशक्तिकरण, सीमांत क्षेत्रों के विकास तथा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में भी कई पहलें की गईं।
भूमि संरक्षण के उद्देश्य से सख्त भू-कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून में संशोधन तथा भ्रष्टाचार और भूमि संबंधी अनियमितताओं पर कार्रवाई जैसे कदम सरकार की प्रमुख उपलब्धियों के रूप में सामने आए। इन निर्णयों के माध्यम से प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश देने का प्रयास किया गया।
राजनीतिक दृष्टि से भी यह कार्यकाल कई मायनों में महत्वपूर्ण रहा। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में अपनी सीट हारने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने पुष्कर सिंह धामी पर भरोसा कायम रखा और उन्हें पुनः मुख्यमंत्री बनाया। बाद में उपचुनाव में उनकी जीत ने उनके नेतृत्व को और मजबूत आधार दिया।
पिछले पाँच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सहित भाजपा के शीर्ष नेतृत्व का विश्वास लगातार उनके साथ दिखाई दिया। केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय का प्रभाव सड़क, रेल, रोपवे, पर्यटन और आधारभूत ढाँचे से जुड़ी कई परियोजनाओं में भी देखने को मिला। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि धामी आज उत्तराखंड भाजपा के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल हैं और वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के प्रमुख चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं।
हालाँकि उपलब्धियों के साथ कई गंभीर चुनौतियाँ आज भी बरकरार हैं। पलायन उत्तराखंड की सबसे बड़ी सामाजिक और आर्थिक समस्या बना हुआ है। पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के पर्याप्त अवसर अभी भी विकसित नहीं हो पाए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के प्रयासों के बावजूद दूरस्थ इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता, उच्च शिक्षा तक समान पहुँच और तकनीकी शिक्षा का विस्तार अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुँच सका है।
पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क संपर्क बनाए रखना आज भी सरकार के सामने सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है। मानसून के दौरान भूस्खलन, सड़कें बंद होना, पुलों का क्षतिग्रस्त होना तथा कई गाँवों का मुख्य मार्गों से कट जाना हर वर्ष जनजीवन को प्रभावित करता है। प्राकृतिक आपदाएँ उत्तराखंड की स्थायी चुनौती हैं और बदलती जलवायु परिस्थितियों ने इन जोखिमों को और बढ़ा दिया है।
यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो धामी सरकार ने कई नीतिगत और प्रशासनिक निर्णयों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाने का प्रयास किया है। वहीं रोजगार, पलायन, कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्वतीय क्षेत्रों के संतुलित विकास जैसे विषय ऐसे हैं, जहाँ जनता की अपेक्षाएँ अभी पूरी तरह पूरी नहीं हो सकी हैं।
अब जबकि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी राज्य के सबसे लंबे कार्यकाल वाले मुख्यमंत्री बन चुके हैं, उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती इस राजनीतिक स्थिरता को जनकल्याण के ठोस परिणामों में बदलने की है। आने वाले वर्षों में रोजगार सृजन, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना, आपदा प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सेवाओं का विस्तार और पर्वतीय क्षेत्रों में टिकाऊ विकास सुनिश्चित करना उनके नेतृत्व की वास्तविक कसौटी होगी।
राजनीतिक इतिहास में रिकॉर्ड दर्ज हो जाते हैं, लेकिन किसी भी मुख्यमंत्री की वास्तविक पहचान जनता के जीवन में आए सकारात्मक बदलावों से तय होती है। पुष्कर सिंह धामी ने 1,832 दिनों का सबसे लंबा मुख्यमंत्री कार्यकाल पूरा कर एक नया राजनीतिक कीर्तिमान स्थापित किया है। अब उनकी अगली चुनौती इस उपलब्धि को सुशासन, समावेशी विकास और जनविश्वास के स्थायी उदाहरण में बदलने की है। यदि सरकार आने वाले समय में रोजगार, पलायन, आपदा प्रबंधन, कृषि, पर्वतीय विकास और सामाजिक संतुलन जैसे मुद्दों पर ठोस परिणाम देने में सफल होती है, तो यह कार्यकाल केवल सबसे लंबे कार्यकाल के रूप में नहीं, बल्कि उत्तराखंड के विकास के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में भी याद किया जाएगा।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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