पिथौरागढ़। उत्तराखंड कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनावों से पहले एक बड़ी असहज स्थिति सामने आई है। पिथौरागढ़ में आयोजित कांग्रेस के ‘परिवर्तन संकल्प सम्मेलन’ के दौरान पार्टी के भीतर की गुटबाजी खुलकर मंच पर दिखाई दी। कार्यक्रम में उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया जब कांग्रेस नेता दीपक लूंठी ने विधायक मयूख महर के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते कार्यक्रम में हंगामे की स्थिति बन गई और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी। घटना उस समय हुई जब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं की बैठक चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ कार्यकर्ताओं ने विधायक मयूख महर के खिलाफ नाराजगी जताते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस नेता दीपक लूंठी द्वारा लगाए गए मुर्दाबाद के नारों से कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल गया और सम्मेलन में मौजूद नेताओं को स्थिति संभालने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। बताया जा रहा है कि अपने खिलाफ हुई नारेबाजी से नाराज विधायक मयूख महर ने कार्यक्रम का विरोध जताया और अपने समर्थक कार्यकर्ताओं के साथ सम्मेलन स्थल छोड़ दिया। उनके कार्यक्रम से बाहर जाने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान इस घटना के बाद सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम में हुई अनुशासनहीनता को कांग्रेस संगठन ने गंभीरता से लिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) ने मामले की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद तीन कांग्रेस नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में संबंधित नेताओं से तीन दिन के भीतर अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने को कहा गया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि संगठनात्मक अनुशासन से समझौता नहीं किया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस का यह आंतरिक विवाद पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकता है। परिवर्तन संकल्प सम्मेलन का उद्देश्य जहां संगठन को मजबूत करना और चुनावी रणनीति को धार देना था, वहीं कार्यक्रम में हुई नारेबाजी और नेताओं के बीच टकराव ने पार्टी की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अब इस पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। माना जा रहा है कि स्पष्टीकरण प्राप्त होने के बाद पार्टी अनुशासन समिति मामले में आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। फिलहाल पिथौरागढ़ का यह घटनाक्रम प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है और विपक्षी दल भी इसे कांग्रेस की अंदरूनी कलह से जोड़कर देख रहे हैं। Post navigation हरेला’ पर सजेगा धरा का श्रृंगार, देहरादून में लगेंगे 15.50 लाख पौधे! उत्तराखंड की सड़कों को मिलेगा नया जीवन: केंद्र से 7 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मिली सहमति