देहरादून में पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों से संवाद, रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को दिखाई हरी झंडी

देहरादून। पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को निरंजनपुर, देहरादून में आयोजित विशेष कार्यक्रम में राज्यभर से आए पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों एवं मत्स्य पालकों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने आधुनिक मत्स्य परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को फ्लैग ऑफ कर रवाना किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन उत्तराखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने वाले प्रमुख क्षेत्र हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इन क्षेत्रों को रोजगार, स्वरोजगार और आर्थिक समृद्धि के बड़े माध्यम के रूप में विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार किसानों और पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना”, “राष्ट्रीय गोकुल मिशन”, “राष्ट्रीय पशुधन मिशन” और “पशुपालन अवसंरचना विकास कोष” जैसी योजनाओं का लाभ उत्तराखण्ड के हजारों परिवारों तक पहुंच रहा है।

उन्होंने बताया कि “मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन” के तहत पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा गोट वैली और पोल्ट्री वैली योजनाओं के माध्यम से युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है। पिछले चार वर्षों में गौ पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के क्षेत्र में साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स संचालित की जा रही हैं। प्रत्येक जिले में आधुनिक मॉडल पशु चिकित्सालय विकसित किए जा रहे हैं ताकि पशुपालकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें।

उन्होंने कहा कि वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत क्षेत्रों के पशुपालकों को भारत-तिब्बत सीमा पुलिस के माध्यम से सीधा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे स्थानीय उत्पादों को बेहतर कीमत मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में राज्य के दुग्ध उत्पादन में प्रतिवर्ष लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं पिछले वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को करीब 380 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की पारंपरिक “बद्री गाय” के “बद्री घी” को देश का पहला जीआई टैग प्राप्त होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। इससे स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

मत्स्य पालन के क्षेत्र में राज्य सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए 170 करोड़ रुपये की विशेष योजना शुरू की गई है। उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में ट्राउट हैचरियों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार उत्तराखण्ड को हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है।

कार्यक्रम के दौरान कई लाभार्थियों ने अपनी सफलता की कहानियां भी साझा कीं। हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा ने बताया कि सरकारी योजना के सहयोग से उन्होंने 50 साहिवाल गायों के साथ डेयरी यूनिट स्थापित की, जिससे प्रतिदिन 300 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और आठ लोगों को रोजगार मिला है। उन्होंने बताया कि उनकी मासिक शुद्ध आय लगभग 1.15 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने बताया कि उन्होंने पशुओं के चारे के लिए एफपीओ की स्थापना की, जिसमें 386 लोग जुड़े हैं। पिछले तीन वर्षों में उनका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक का हो चुका है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं और इन क्षेत्रों में नए अवसर तेजी से विकसित हो रहे हैं।

कार्यक्रम में गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अंथवाल, उत्तराखण्ड पशु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोघा, उत्तराखण्ड मत्स्य पालक विकास अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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