श्रद्धालुओं की सुरक्षा और पशु कल्याण को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने जारी किए सख्त दिशा-निर्देश

उत्तराखंड सरकार ने चारधाम और आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर घोड़ा-खच्चरों के संचालन के लिए नई एसओपी लागू की है। केदारनाथ, यमुनोत्री और हेमकुंट साहिब यात्रा मार्गों पर पंजीकरण, स्वास्थ्य जांच, माइक्रोचिपिंग और पशु कल्याण संबंधी सख्त नियम लागू होंगे।

देहरादून। राज्य सरकार ने चारधाम एवं आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षित, सुगम और व्यवस्थित यात्रा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अश्ववंशीय पशुओं (घोड़ा-खच्चर आदि) के संरक्षण और कल्याण के उद्देश्य से नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू कर दी है। यह नई व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और इसका पालन सभी संबंधित विभागों, पशु स्वामियों तथा संचालकों के लिए अनिवार्य होगा।

अपर सचिव श्री संतोष बडोनी द्वारा निदेशक पशुपालन को जारी शासनादेश में कहा गया है कि यह एसओपी माननीय उच्च न्यायालय नैनीताल तथा राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुरूप तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य यात्रा मार्गों पर पशुओं के उपयोग को नियंत्रित, मानवीय और सुरक्षित बनाना है ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके और पशुओं के साथ किसी प्रकार की क्रूरता न हो।


यात्रा मार्गों की वहन क्षमता तय

नई एसओपी के तहत विभिन्न यात्रा मार्गों पर संचालित किए जाने वाले अश्ववंशीय पशुओं की अधिकतम संख्या निर्धारित कर दी गई है।

  • श्री केदारनाथ यात्रा मार्ग पर अधिकतम 5000 पशुओं के संचालन की अनुमति होगी।
  • श्री हेमकुंट साहिब यात्रा मार्ग पर लगभग 1050 पशु संचालित किए जा सकेंगे।
  • श्री यमुनोत्री यात्रा मार्ग पर लगभग 595 पशुओं के संचालन की सीमा तय की गई है।

सरकार का मानना है कि इससे यात्रा मार्गों पर अत्यधिक दबाव कम होगा और दुर्घटनाओं की संभावना भी घटेगी।


पंजीकरण, स्वास्थ्य परीक्षण और माइक्रोचिपिंग अनिवार्य

एसओपी के अनुसार यात्रा मार्गों पर संचालित होने वाले सभी घोड़ा-खच्चरों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

पंजीकरण से पूर्व निम्न प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी—

  • स्वास्थ्य परीक्षण
  • ग्लैंडर्स रोग की जांच
  • ईयर टैगिंग
  • माइक्रोचिपिंग

स्वास्थ्य प्रमाणपत्र की वैधता 45 दिन तक रहेगी, जिसके बाद पशुओं का पुनः स्वास्थ्य परीक्षण कराना अनिवार्य होगा। बिना पंजीकरण वाले पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

वार्षिक पंजीकरण की जिम्मेदारी जिला पंचायत और जिला प्रशासन को सौंपी गई है।


पशु कल्याण के लिए विशेष प्रावधान

राज्य सरकार ने नई एसओपी में पशुओं के स्वास्थ्य और आराम को प्राथमिकता दी है। इसके तहत—

  • प्रत्येक एक किलोमीटर पर स्वच्छ और गुनगुने पेयजल की व्यवस्था की जाएगी।
  • पशुओं के लिए चारा और इलेक्ट्रोलाइट उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
  • हल्की और वाटरप्रूफ काठियों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा ताकि पशुओं को घाव या शारीरिक क्षति न पहुंचे।

इसके अलावा यात्रा मार्गों पर पानी के ट्रफ और संवेदनशील स्थलों के आसपास सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। निगरानी व्यवस्था के लिए प्रत्येक जिले में अधिकारियों और पशु चिकित्सकों की नियुक्ति भी की जाएगी।


पशु क्रूरता पर सख्त कार्रवाई

नई एसओपी में पशुओं के साथ क्रूरता करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।

निम्न गतिविधियों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है—

  • पशुओं पर अधिक भार लादना
  • घायल या बीमार पशुओं से कार्य लेना
  • बिना टोकन पशुओं का संचालन
  • पशुओं को पीटना या तेज गति से दौड़ाना
  • ईयर टैग अथवा माइक्रोचिप से छेड़छाड़

दोषी पाए जाने पर संबंधित पशु स्वामी का लाइसेंस निरस्त किया जाएगा, उसे ब्लैकलिस्ट किया जाएगा तथा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 और भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।


संचालकों के लिए भी नए नियम

एसओपी के तहत प्रत्येक पशु के साथ संचालक (हॉकर) की उपस्थिति अनिवार्य होगी। बिना संचालक अथवा लावारिस पाए जाने वाले पशुओं को तत्काल कब्जे में लेकर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही—

  • प्रत्येक पशु स्वामी अधिकतम दो पशुओं का ही संचालन कर सकेगा।
  • प्रतिदिन केवल एक टोकन जारी किया जाएगा।
  • टोकन वितरण सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक ही होगा।

रात में संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध

सरकार ने सुरक्षा की दृष्टि से सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले अश्ववंशीय पशुओं के संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।

खराब मौसम, भारी वर्षा, ओलावृष्टि अथवा बर्फबारी की स्थिति में भी पशुओं का संचालन तत्काल रोक दिया जाएगा।


यात्रा मार्गों पर पशु चिकित्सालय और 24×7 इन्फर्मरी

यात्रा मार्गों पर स्थायी एवं अस्थायी पशु चिकित्सालय स्थापित किए जाएंगे, जहां पशु चिकित्सकों और पैरावेट कर्मियों की तैनाती रहेगी।

बीमार, घायल अथवा परित्यक्त पशुओं के उपचार और संरक्षण के लिए 24 घंटे इन्फर्मरी सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

इसके अतिरिक्त यात्रा मार्गों पर मृत पाए जाने वाले पशुओं के शवों का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा तथा पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी भी अनिवार्य होगी।


म्यूल टास्क फोर्स और डिजिटल निगरानी व्यवस्था

नई व्यवस्था के अंतर्गत यात्रा मार्गों पर म्यूल टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। साथ ही—

  • अतिरिक्त चेक पोस्ट स्थापित किए जाएंगे
  • रात्रि गश्त बढ़ाई जाएगी
  • डिजिटल रिकॉर्डिंग प्रणाली लागू होगी
  • नियमित निगरानी तंत्र सक्रिय रहेगा

पशु क्रूरता से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए 24×7 हेल्पलाइन स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

जिला पशु क्रूरता निवारण समितियों की नियमित बैठकें आयोजित कर पशुओं के उपयोग और व्यवस्था की निगरानी की जाएगी।


संतुलित और मानवीय यात्रा व्यवस्था पर जोर

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि चारधाम एवं आदि कैलाश यात्रा मार्गों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा, यात्रा व्यवस्था और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से यह नई एसओपी लागू की गई है।

सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि यात्रा मार्गों पर सुरक्षित, व्यवस्थित और मानवीय व्यवस्था कायम रह सके।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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