चमोली के एरेठा गांव में सड़क न होने की कीमत आज भी जान जोखिम में डालकर चुका रहे ग्रामीण, विकास के दावों पर उठे सवाल

देवाल (चमोली)। उत्तराखंड के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में सड़क जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव आज भी ग्रामीणों की जिंदगी को कठिन बना रहा है। चमोली जिले के देवाल विकासखंड स्थित एरेठा गांव में रविवार को एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा होने पर ग्रामीणों को उसे डंडी-कंडी के सहारे कई किलोमीटर पैदल रास्ता तय कर अस्पताल पहुंचाना पड़ा। महिला ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल में एक स्वस्थ नवजात को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने पहाड़ों में विकास और बुनियादी सुविधाओं की वास्तविक स्थिति को फिर उजागर कर दिया है।

प्रसव पीड़ा शुरू होते ही जुटे ग्रामीण, कंधों पर उठाकर पहुंचाया सड़क तक

एरेठा गांव निवासी 34 वर्षीय गम्मोती देवी, पत्नी प्रकाश राम को रविवार सुबह अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। गांव तक सड़क सुविधा न होने के कारण परिजन और ग्रामीण तत्काल डंडी-कंडी लेकर पहुंचे। कठिन पहाड़ी रास्तों और खड़ी चढ़ाई-उतराई के बीच महिला को कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया। वहां से वाहन की व्यवस्था कर उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उन्होंने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

250 लोगों की आबादी आज भी सड़क का इंतजार कर रही

ग्राम प्रधान राजेंद्र कुमार टम्टा के अनुसार एरेठा गांव, ग्राम सभा औडर का अनुसूचित जाति बाहुल्य तोक है। यहां 60 से अधिक परिवारों की लगभग 250 आबादी निवास करती है। ग्रामीण वर्षों से सड़क सुविधा की मांग कर रहे हैं, लेकिन आज तक उनकी यह मांग पूरी नहीं हो सकी है।

उन्होंने बताया कि देवाल-पदमला-कंजेरू-एरेठा-औडर मोटर मार्ग के 8 किलोमीटर हिस्से को 15 दिसंबर 2021 को स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन चार साल बीतने के बाद भी निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है।

भूमि विवाद और आपत्तियों में फंसा सड़क निर्माण

ग्रामीणों के मुताबिक प्रस्तावित सड़क का निर्माण पदमला क्षेत्र में भूमि विवाद और कुछ खेतों से सड़क गुजरने को लेकर दर्ज आपत्तियों के कारण अटका हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) द्वारा करीब एक वर्ष पहले पुनः सर्वेक्षण भी कराया गया था, लेकिन इसके बाद भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी।

ग्रामीणों का कहना है कि हर बार सर्वे और कागजी प्रक्रिया की बातें होती हैं, लेकिन जमीन पर निर्माण कार्य शुरू नहीं होता। नतीजा यह है कि क्षेत्र के लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

पीडब्ल्यूडी और पीएमजीएसवाई के बीच उलझा मामला

सड़क निर्माण को लेकर जिम्मेदार विभागों की स्थिति भी स्पष्ट नहीं दिखाई दे रही है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का कहना है कि सड़क निर्माण अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से किया जाना है। वहीं पीएमजीएसवाई का कहना है कि वन भूमि संबंधी स्वीकृतियां और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही सड़क कटिंग का कार्य शुरू किया जा सकेगा।

इस प्रशासनिक उलझन का खामियाजा सीधे ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान

स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क नहीं होने के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में हालात बेहद गंभीर हो जाते हैं। बीमार व्यक्तियों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाने के लिए आज भी डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है। बरसात और बर्फबारी के दौरान स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि सड़क निर्माण में आ रही सभी बाधाओं को दूर कर जल्द से जल्द कार्य शुरू कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी ग्रामीण को ऐसी कठिन परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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