देहरादून। राजधानी देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में डेयरी व्यवसाय से जुड़े पशुपालकों ने बढ़ती समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। महंगाई, पुलिस उत्पीड़न, अवैध वसूली और पशु परिवहन में आ रही बाधाओं से परेशान डेयरी संचालक एवं पशुपालक संघ ने अपनी समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो दूध आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। संघ की बैठक अध्यक्ष डी.एस. यादव की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसमें पशुपालकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं को उठाया और सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की। चारे और भूसे की बढ़ती कीमतों से बढ़ी परेशानी पशुपालकों का कहना है कि पशुओं के चारे, भूसे और दाने की कीमतों में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे डेयरी व्यवसाय की लागत काफी बढ़ गई है और छोटे पशुपालकों के लिए व्यवसाय चलाना कठिन होता जा रहा है। संघ ने सरकार से चारे की कीमतों को नियंत्रित करने और राहत देने की मांग की है। मृत पशुओं के उठान में अवैध वसूली का आरोप संघ ने आरोप लगाया कि पशुओं की मृत्यु के बाद उनके उठान की प्रक्रिया में कई स्थानों पर मनमाने तरीके से धन वसूला जाता है। पशुपालकों का कहना है कि इस समस्या के समाधान के लिए पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। पुलिस उत्पीड़न और चालानों पर जताई नाराजगी डेयरी संचालकों ने कहा कि पशु चारा, भूसा और दाना ले जाने वाले वाहनों को परिवहन के दौरान बार-बार रोका जाता है और चालान किए जाते हैं। संघ ने मांग की कि ऐसे वाहनों को विशेष छूट दी जाए तथा पुलिस द्वारा किए जाने वाले अनावश्यक उत्पीड़न पर रोक लगाई जाए। शहरी क्षेत्रों में पशु एम्बुलेंस सेवा की मांग पशुपालकों ने देहरादून सहित शहरी क्षेत्रों में भी पशु एम्बुलेंस सेवा शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि पशुओं के इलाज के लिए दवाइयां और टीके सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराए जाने चाहिए, जिससे पशुपालकों को राहत मिल सके। वैध पशु परिवहन को मिले सुरक्षा संघ ने आरोप लगाया कि वैध दस्तावेजों के साथ पशुओं का परिवहन करने वाले लोगों को भी कुछ अराजक तत्वों द्वारा परेशान किया जाता है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे मामलों में हस्तक्षेप कर वैध पशु परिवहन को सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। दूध आपूर्ति प्रभावित होने की चेतावनी संघ अध्यक्ष डी.एस. यादव ने कहा कि लगातार बढ़ती लागत और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण डेयरी व्यवसाय संकट में है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो पशुपालक डेयरी संचालन बंद करने को मजबूर होंगे, जिससे आम जनता तक दूध की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि पशुपालकों की मांगें पूरी तरह व्यावहारिक और जनहित से जुड़ी हैं। सरकार को इस दिशा में शीघ्र कदम उठाने चाहिए। Post navigation उत्तराखंड में 5200 हेक्टेयर में विकसित होगी ‘सिनेमन वैली’, दालचीनी खेती को मिलेगा बढ़ावा जिला सहकारी भेषज संघ देहरादून पर फिर कांग्रेस का कब्जा, मंजू शर्मा बनीं अध्यक्ष