देहरादून। उत्तराखंड सरकार राज्य में सुगंधित फसलों और एरोमा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए बड़ा कदम उठा रही है। चम्पावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ‘सिनेमन वैली’ (Cinnamon Valley) विकसित की जाएगी। इस पहल से दालचीनी की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों, उद्यमियों तथा उद्योगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह जानकारी कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान दी। उन्होंने बताया कि सेलाकुई स्थित सगंध पौधा केंद्र का नाम बदलकर परफ्यूमरी एवं सगंध अनुसंधान एवं विकास संस्थान कर दिया गया है। 29 हजार किसान कर रहे हैं सगंध खेती मंत्री ने बताया कि पिछले दो दशकों में संस्थान के शोध एवं तकनीकी सहयोग से राज्य में लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर सगंध खेती का विस्तार हुआ है। वर्तमान में 109 एरोमा क्लस्टरों में करीब 29 हजार किसान सगंध फसलों की खेती कर रहे हैं तथा 200 से अधिक फील्ड डिस्टिलेशन यूनिट स्थापित की जा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में एरोमैटिक सेक्टर का कारोबार जहां मात्र 2 करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। महक क्रांति नीति 2026 से मिलेगा नया विस्तार गणेश जोशी ने कहा कि राज्य में सगंध खेती की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए सरकार ने महक क्रांति नीति 2026-36 लागू की है। इस नीति के तहत 23 हजार हेक्टेयर भूमि को सगंध खेती से आच्छादित करने और लगभग 91 हजार किसानों को लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। नीति के अंतर्गत राज्य में सात एरोमा वैलियां विकसित की जाएंगी, जिनमें चम्पावत और नैनीताल में बनने वाली सिनेमन वैली विशेष महत्व रखती है। दालचीनी पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन संस्थान द्वारा 11 और 12 जून 2026 को “दालचीनी: प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी एवं कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दालचीनी की व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देना, किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैश्विक अनुभवों से जोड़ना, अनुसंधान एवं उद्योग के बीच समन्वय स्थापित करना तथा गुणवत्ता आधारित उत्पादन और मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहित करना है। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा, गुणवत्ता मानकों, निर्यात आवश्यकताओं, दालचीनी आधारित उद्यमिता और निवेश को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश के प्रमुख दालचीनी उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करना है। प्रेसवार्ता में सगंध पौधा केंद्र (कैप) सेलाकुई के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान भी उपस्थित रहे। Post navigation उत्तराखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति-2026 जारी, AI, ड्रोन और स्टार्टअप्स को मिलेगा बढ़ावा देहरादून में डेयरी संचालकों का फूटा गुस्सा, समस्याओं के समाधान की मांग