-कौशल अरोड़ा (जयपुर)

सावरकर हिंदू जैसे व्यापक शब्द का प्रयोग भारत भूमि को अपनी पितृ भूमि एवं पुण्य भूमि के रूप में स्वीकारते थे । उन्हें युग मनीषी कहा जाये । यही चेतना समाज में उनके जीवन के धयेय के रूप में प्रसारित होनी चाहिये।

ऐसे युग मनीषी को भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान से विभूषित करना भारत का उनके प्रति अपने कई जन्मों के ऋण से मुक्ति का सकारात्मक प्रयास होगा। 28 मई 2020 को सावरकर की 137 वीं जयंती वर्तमान प्रासंगिकता को समझने के लिये आवश्यकता है।

वीर सावरकर की वर्तमान समाज में दोनों तरह ही छवि निर्मित है। ऐतिहासिक, सामाजिक, ब्रिटिश शासन के लिये चुनोती वाले दस्तावेज जब तक समाज मे उनकी प्रमाणिकता के पक्ष में नहीं आएंगे तब तक उनके प्रति आदर भाव ऐसा रहेगा। उनका सद-साहित्य मराठी भाषा में होने के कारण हम सभी उससे वंचित रहे हैं। कुछ मराठी लेखक अब इन चिन्ताओ के साथ अंग्रेजी में लिखने को आगे आये है। उनकी सकारात्मक छवि उजागर हो पा रही है। शीघ्र ही उनके अध्ययन व लेखन की प्रमाणिक रचनायें समाज को प्राप्त होंगी। उनके जीवन के वत्तान्त को मराठी लेखक श्री घनजंय कीर ने पुस्तकबढ किया जो हम सभी को पढ़नी चाहिये। जबकि सावरकर ऐसे महापुरुष व्यक्तित्व का परिचय है जो भारतीय समाज में हिंदू राष्ट्रीयता को एक व्यापक परिभाषा के रूप में अभिव्यक्त करते हैं। सावरकर ने ही प्रथम बार हिंदू शब्द को हिन्दु महासभा में 1938 में परिभाषित किया था।

आसिंधु सिंधु पर्यंता यस्य भारत भूमिका।
पितृभूरू पुण्य भूश्चैव स वै हिंदूरीति स्मृतरू।।

स्पष्ट है की महामृत्युंजय पुरुष वीर सावरकर हिंदू जैसे व्यापक शब्द का प्रयोग भारत भूमि को अपनी पितृ भूमि एवं पुण्य भूमि मानकर करते थे । वीर सावरकर महात्मा गाँधी जैसे समाज सुधारक नहीं अपितु वह तो डॉ0 भीमराव अंबेडकर की तरह सामाजिक क्रांतिकारी थे । उन्होंने सामाजिक समरसता के मूल आठ सिद्धान्तों की रचना की, जिसमें गणेशोत्सव, सह भोज, पतित पावन मन्दिर निर्माण, अस्पर्शयता निवारण, रोटी बेटी सम्बब्ध आदि मुख्य थे । समाज के पिछड़े ओर दलित कहे जाने वाले वर्ग को वेद पाठी व जनेऊ धारण रत्नागिरी जिले के मन्दिर से प्रारम्भ करवाया । वह सामाज में इस तरह के क्रांतिकारी कदमों के लिये जाने जाते हैं।

By उत्तराखंड संवाद भारती

उत्तराखंड संवाद भारती उत्तराखंड सहित देश-दुनिया की ताज़ा, निष्पक्ष और जनहित से जुड़ी खबरों को पाठकों तक पहुंचाने के लिए समर्पित है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *