कोविड-19 संक्रमितों के लिए पर्याप्त मात्रा में आवश्यक उपकरणों के साथ ही प्रर्याप्त बैड की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएः डीएम 
देहरादून। राज्य में कोविड-19  संक्रमण के बढते प्रभाव एवं बड़ी संख्या में संक्रमित व्यक्ति चिन्हित होने के फलस्वरूप, जनपद में कोविड-19 संक्रमण की रोकथाम के दृष्टिगत जिलाधिकारी डाॅ आशीष कुमार श्रीवास्तव ने जिलाधिकारी कैम्प कार्यालय से वीडियों कान्फे्रसिंग के माध्यम से मुख्य चिकित्साधिकारी देहरादून एवं जनपद अवस्थित प्रमुख चिकित्सालयों एम्स ऋषिकेश, दून मेडिकल कालेज एवं महन्त इन्दिरेश चिकित्सालय के चिकित्सा अधिकारियों के साथ ही सम्बन्धित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने सम्बन्धित चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया कि चिकित्सालयों में कोविड-19 संक्रमितों हेतु पर्याप्त मात्रा में आवश्यक उपकरणों के साथ ही प्रर्याप्त बैड की उपलब्धता सुनिश्चित कर लिए जाय।
जिलाधिकारी ने उक्त चिकित्सालयों को कोविड-19 संक्रमण के प्रसार को नियंत्रित करने हेतु तैनात मेडिकल टीम के सदस्यों की सुरक्षा हेतु समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिये जिससे संक्रमितों के उपचार के दौरान स्वास्थ्य कर्मियों का संक्रमण से बचाव हो सके। उन्होंने चिकित्सालयों में तैनात चिकित्सा कर्मियों के साथ ही उनके प्रतिस्थानि टीम को भी प्रर्याप्त प्रशिक्षण एवं उपकरण के उपयोग हेतु प्रशिक्षित करने के निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने उक्त चिकित्सालयों में  कोविड-19 केयर सेन्टर स्थापित करने तथा कोविड-19 संक्रमण उपचार हेतु भर्ती व्यक्ति के साथ ही उसके  परिजनों की कांउसिलंग करने के भी निर्देश दिये। जिलाधिकारी ने भारत सरकार एवं उत्तराखण्ड शासन से प्राप्त दिशा-निर्देश के कल से प्रारम्भ की जा रही वायु सेवा के दृष्टिगत जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट पर कोविड-19 संक्रमण से बचाव हेतु आवश्यक प्रबन्धन हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को बैठक कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये। हवाई यात्रा के माध्यम से उत्तराखण्ड आने वाले व्यक्तियों को जनपद अवस्थित अधिग्रहित किये गये होटल्स में फैसिलिटी क्वोंरटाइन किया जायेगा, जिसका व्यय सम्बन्धित यात्री द्वारा वहन किया जायेगा। उन्होंने मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि जौलीग्रान्ट एयरपोर्ट पर स्वास्थ्य परीक्षण हेतु स्वास्थ्य जांच टीम की तैनाती ससमय सुनिश्चित कर ली जाय।
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183 लोगों को दून से 7 बसों से विभिन्न जनपदों को भेजा गया 
देहरादून। जनपद देहरादून स्थित महाराणा प्रताप स्पोर्टस कालेज रायपुर से विभिन्न जनपदों के 183 व्यक्तियों को 7 बसों के माध्यम से सम्बन्धित जनपदों में भेजा गया, जिसमें नैनीताल के 3, पिथौरागढ के 23, अल्मोड़ा के 11, बागेश्वर के 7, चम्पावत के 13, उधमसिंह नगर के 8, हरिद्वार के 7, टिहरी के 100, पौड़ी के 8, उत्तरकाशी के 3 व्यक्तियों को स्वास्थ्य परीक्षण एवं थर्मल स्क्रीनिंग के उपरान्त सम्बन्धित जनपदों हेतु भेजा गया। जनपद देहरादून से मुज्फ्फरनगर उत्तप्रदेश के 269 व्यक्तियों को स्वास्थ्य जांच एवं थर्मल स्क्रीनिंग के उपरान्त 10 बसों के माध्यम से तथा  हिमाचल प्रदेश के 2 व्यक्तियों को टैक्सी के माध्यम से उनके गृह जनपद भेजा गया।
जनपद के विभिन्न चयनित स्थानों पर प्रशासन द्वारा अधिकृत 11 मोबाईल वैन के माध्यम से सस्ते दरों पर 78.06 क्विंटल फल-सब्जियों का विक्रय किया गया। जिला प्रशासन की टीम द्वारा जनपद के ऋषिकेश नगर निगम क्षेत्र में अवस्थित आशुतोष नगरध्बैराज रोड ऋषिकेश में खाद्य एवं दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री उपलब्ध करवाई गयी। जिलापूर्ति विभाग कन्टेंनमेंट आशुतोष नगरध्बैराज रोड ऋषिकेश में 3 गैस सिलेण्डर वितरित किये गये। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अन्तर्गत आशुतोष नगर, बैराज रोड में 481 उपभोक्ताओं को खाद्यान उपलब्ध कराया गया। दुग्ध विकास विभाग द्वारा गुरू रोड पटेलनगर में 15,  आशुतोष नगर में ऋषिकेश में 35 ली0, बैरा कालोनी में 30 कुल 80 ली0 दूध विक्रय किया गया। जिला प्रशासन की टीम द्वारा स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से जनपद अन्तर्गत विकासखण्ड चकराता, विकासनगर, सहसपुर, रायपुर व डोईवाला एवं तहसील सदर में कुल 827 निराश्रित पशुओं जिसमें 473 श्वान, 312 गौवंश एवं 42 अन्य पशुओं को चारा व पशु आहार उपलब्ध कराया गया। जिला प्रशासन द्वारा आज थाना कैन्ट में 40 अन्नपूर्णा किट किट वितरित की गयी। कोविड-19 के संक्रमण के  दृष्टिगत जिला आपदा परिचालन केन्द्र देहरादून में जन सहायता हेतु स्थापित कन्ट्रोलरूम में कुल 34काॅल प्राप्त हुई हैं, जिनमें 33 पास एंव 1 राशन सम्बन्धी काल प्राप्त हुई।

खौफः कोरोना संक्रमित महिला के अंतिम संस्कार को नहीं मिली माचिस, कमरे में कैद हुए पंडित

देहरादून। लोगों के दिलों में कोरोना का खौफ इस कदर छाया है कि जब एम्स ऋषिकेश में भर्ती कैंसर से ग्रसित कोरोना संक्रमित महिला का अंतिम संस्कार करने पहुंचे तो वहां मुखाग्नि देने के लिए माचिस तक का इंतजाम नहीं था। इतना ही नहीं, श्मशान घाट समिति के लोग और पंडित कमरे में कैद हो गए। कोई भी बाहर नहीं आया। तब पुलिस ने अंतिम संस्कार करवाया।
एम्स ऋषिकेश में संक्रमित महिला की मौत के बाद शनिवार शाम चंद्रेश्वरनगर स्थित मुक्तिधाम घाट पर पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में अंतिम संस्कार कर दिया गया। महिला के शव को उनके पति ने मुखाग्नि दी। लेकिन घाट पर पूर्व सूचना के बावजूद अव्यवस्थाएं हावी रहीं। अंतिम क्रिया में अग्नि देने के लिए माचिस तक का इंतजाम नहीं था। क्रियाकर्म के पूरे सामान का इंतजाम पुलिस ने कराया। महिला का शव पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में परिजनों को सौंप दिया था। इसके बाद एंबुलेंस से शव को मुक्तिधाम लाया गया। जहां पहले से मौजूद नगर निगम की सैनिटाइजेशन टीम ने एंबुलेंस और पूरे मुक्तिधाम परिसर को सैनिटाइज किया। इस दौरान घाट पर संवेदनशील मामला होने के बावजूद अव्यवस्थाएं रहीं। इस पर कोतवाल रितेश शाह ने नाराजगी भी जताई। उन्होंने बताया कि मुक्तिधाम सेवा समिति के जो लोग अंतिम क्रिया को पूरा कराते हैं, उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। ऐसे में वहां मौजूद पुलिस और प्रशासन के सभी लोग जोकि पीपीई कीट पहने हुए थे, क्रियाकर्म का सामान ढंढ़ते रहे, लेकिन मुक्तिधाम सेवा समिति के लोगों ने माचिस तक उपलब्ध नहीं कराई। पुलिस ने किसी तरह व्यवस्थाएं जुटाई और अंतिम क्रिया को पूरा कराया। इस दौरान उप जिलाधिकारी प्रेमलाल, तहसीलदार रेखा आर्य, कोतवाल रितेश शाह, पटवारी सतीश जोशी एवं उत्तम रमोला, नगर निगम ऋषिकेश की सफाई निरीक्षक धीरेंद्र सेमवाल, अभिषेक मल्होत्रा, प्रशांत कुकरेती एवं सफाई  नायक नरेश, महेंद्र,राजेंद्र आदि मौजूद रहे।
मृतक गर्भवती महिला की रिपोर्ट आई कोरोना पॉजिटिव, पति और भाई भी अस्पताल में भर्ती
देहरादून। राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में शनिवार को हुई कोरोना संदिग्ध गर्भवती महिला की कोरोना रिपोर्ट रविवार को पॉजिटिव आई है। दून मेडिकल अस्पताल के डिप्टी एमएस और कोरोना के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. एनएस खत्री ने इसकी पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि महिला की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अब महिला के पति और भाई को भी अस्पताल में भर्ती किया गया है। दोनों के सैंपल भी कोरोना की जांच के लिए भेज दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस को भी इसकी सूचना दे दी गई है। महिला का अंतिम संस्कार किस तरह से किया जाएगा, यह अब जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा तय किया जाएगा। वहीं, बताया जा रहा है कि दून की मंडी में मिले कोरोना संक्रमित सब्जी विक्रेता के पिता की रिपोर्ट भी कोरोना पॉजिटिव आई है। डॉ. एनएस खत्री ने बताया कि यूपी के शामली के अरशद चैक निवासी 38 वर्षीय महिला को गत 20 मई को पटेलनगर स्थित एक अस्पताल से रेफर कर दून अस्पताल भर्ती किया गया था। वह सात माह की गर्भवती थी। उसको दस दिन से खांसी की भी दिक्कत थी और लगातार दौरे पड़ रहे थे। आईसीयू में उपचार के दौरान शनिवार शाम को उसकी मौत हो गई थी। महिला का कोरोना जांच के लिए सैंपल पहले ही भिजवा दिया गया था। जिसकी रिपोर्ट आज पॉजिटिव आई है। महिला का शव को मोर्चरी में रखवा दिया है।
कोरोना संक्रमण से बचने के लिए पुलिस के पास नही पर्याप्त संसाधन
देहरादून। उत्तराखंड के बॉर्डर पर राज्य में आ रहे प्रवासियों की पुलिस स्क्रीनिंग करने के बाद ही प्रवेश की अनुमति दे रही है। ऐसे में पुलिसकर्मी सीधे तौर पर प्रवासियों के संपर्क में आ रहे हैं। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों के पास पीपीई किट नहीं है। पुलिसकर्मी सिर्फ मास्क, फेसगार्ड और दस्घ्ताने पहनकर ही आने वाली गाड़ियों के साथ प्रवासियों की लाइन लगवा कर चेकिंग कर रहे हैं। ऐसे में पुलिकर्मियों के संक्रमण होने का ज्यादा खतरा हो सकता है।
उत्तराखंड में लगभग 2 लाख 45 हजार प्रवासियों ने राज्य में आने के लिए पंजीकरण करवाया है। इनमें से करीब एक से डेढ़ लाख प्रवासी राज्य में आ चुके हैं। साथ ही इनमें से ही सबसे ज्यादा कोरोना पॉजिटिव के मरीज सामने आये हैं। प्रदेश में लगातार प्रवासी आ रहे हैं और राज्य के बॉर्डर  चेक पोस्ट पर पुलिसकर्मी ही चेकिंग भी कर रहे हैं। पुलिसकर्मी जो सबसे नजदीक से इन प्रवासियों से संपर्क कर रहे हैं, उनके पास पीपीई किट नहीं हैं. हालांकि, बॉर्डर पर मेडिकल स्टाफ और कुछ पुलिसकर्मियों के पास पीपीई किट जरूर है पर ज्यादातर पुलिसकर्मियों के पास जो बॉर्डर पर चेकिंग कर रहे हैं उनके पास किट नहीं है। ऐसे में इनके संक्रमण होने का ज्यादा खतरा है।
डीजी (लॉ एंड ऑर्डर) अशोक कुमार के मुताबिक, जो सीधे तौर पर पुलिसकर्मी मौजूद हैं उनको पीपीई किट दिया जा रहा है। इसके साथ ही बाकी पुलिसकर्मियों को मास्क, सेनिटाइजर, फेसगार्ड  और हैण्ड गलब्स दिए गए हैं। साथ ही पूरी सावधानी बरती जा रही है। वहीं, बॉर्डर पर मौजूद पुलिसकर्मी का कहना है कि पूरे दिन में तीन बार शिफ्ट चेंज होती है और ऐसे में 36 पीपीई किट की आवश्यकता पड़ती है।
ऑटो-रिक्शा चालकों ने की आर्थिक सहायता की मांग
देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में ऑटो-रिक्शा चालकों को भीषण वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं लेकिन अभी भी लोग घरों में रहना पसंद कर रहे हैं। रविवार को ऑटो-रिक्शा चालकों ने कहा कि, ‘लोग घर के अंदर रहना जारी रख रहे हैं। हम अपनी आर्थिक समस्या को दूर करने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।
 राज्य सरकार हमें 5000 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान करे। लॉकडाउन-1 से लॉकडाउन-3 तक यातायात के सभी साधन बंद थे। लॉकडाउन-4 में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को शर्तों के साथ यातायात के साधनों को खोलने के मामले में निर्णय करने की छूट दे दी। इसके बाद कई राज्य सरकारों ने रेड जोन को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में यातायात के लिए ऑटो रिक्शा चलाने की अनुमति दे दी। इसके बाद भी लोग कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए अभी भी घरों में रहना पसंद कर रहे हैं, इसके कारण ऑटो चालकों की आय जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं हो पा रही है, इसलिए आटो चालकों ने परिवार का खर्च चलाने के लिए सरकार से आर्थिक मदद की मांग की है। गौरतलब है कि दिल्ली सरकार ने ऑटो-टैक्सी, आरटीवी और ई-रिक्शा चलाने वालों को जल्द ही 5-5 हजार रुपये देने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना था कि उनके पास लगातार ऑटो-टैक्सी और ई-रिक्शा वालों के फोन आ रहे हैं। कोरोना और लॉकडाउन के चलते वे भुखमरी के कगार पर थे। उनके घरों में राशन नहीं हैं, लेकिन हमारी मजबूरी यह है कि उनके बैंक खातों की जानकारी हमारे पास नहीं है। फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं, हमें कुछ वक्त चाहिए। आप लोग थोड़ा सब्र रखें।

यूपी-उत्तराखंड के खानपुर बॉर्डर से डॉक्टर नदारद, कैसे होगी प्रवासियों का जांच

लक्सर। कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के चलते प्रदेश के सभी बॉर्डरों पर डॉक्टर्स की टीम तैनात की गई है। जिससे अन्य प्रदेशों से उत्तराखंड में आने वाले प्रवासियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा सके। लेकिन, यूपी-उत्तराखंड के खानपुर बॉर्डर पर डॉक्टर की टीम नदारद है। ऐसे में प्रदेश में कोराना महामारी को दावत दी जा रही है। वहीं राज्य में लगातार कोरोना मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है. बावजूद प्रशासन लापरवाह बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश से लगातार पास धारकों का उत्तराखंड में आना जारी है. लेकिन, यूपी-उत्तराखंड के खानपुर बॉर्डर पर किसी व्यक्ति का कोई स्वास्थ्य परीक्षण नहीं किया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन के द्वारा एक मेडिकल कैंप जरूर लगाया है, जो कि तस्वीरों में साफ-साफ देखा जा सकता है। वहां पर टेंट तो लगा हुआ है, कुर्सी और मेज भी मौजूद हैं. लेकिन, डॉक्टर और कंपाउंडर मौजूद नहीं है। इससे प्रशासन की घोर लापरवाही देखने को मिल रही है। वहीं उत्तराखंड प्रदेश में प्रवासियों का भी लगातार आना जारी है. बाहरी लोगों से ही राज्य में कोरोना पॉजिटिव का ग्राफ बढ़ा है। लेकिन, खानपुर बॉर्डर पर किसी डॉक्टर की मौजूदगी ना होना प्रशासन की एक बहुत बड़ी लापरवाही दर्शा रहा है। इस बाबत लक्सर उपजिलाधिकारी ने बताया कि मामले का संज्ञान लिया जा रहा है। इस तरह की लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी

कांग्रेस ने किए क्वारंटाइन व्यवस्था पर सवाल खडे़

देहरादून। कोरोना की रोकथाम और बचाव के लिए लागू किए लॉकडाउन को दो महीने से ज्यादा का वक्त हो चुका है। इस लॉकडाउन में सबसे ज्यादा मुसीबतों का पहाड़ प्रवासी मजदूरों पर पड़ा था, जिनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। इन हालात में प्रवासियों ने अपने पैतृव गांव उत्तराखंड का रुख किया था। उत्तराखंड में बड़ी संख्या में प्रवासी आ रहे है। लेकिन इनके रखने-खाने की व्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए है। कांग्रेस का आरोप है कि क्वारंटाइन सेंटर में प्रवासियों के खाने-पीने की उचित व्यवस्था नहीं है।
उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर निशान साधते हुए कहा कि सरकार प्रवासियों को थर्मल स्क्रीनिंग कराकर सीधे उन्हें गांव भेज दे रही है। जिससे प्रदेश में कोरोना के मामले बढ़े रहे है। प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने सरकार के सुझाव दिया कि उत्तराखंड आने वाले प्रवासियों को पहले बेस कैंप में क्वारंटाइन करना चाहिए, उसके बाद जिला, तहसील और फिर ब्लॉक स्तर पर क्वारंटाइन करवाना चाहिए। लेकिन सरकार ने उनकी थर्मल स्क्रीनिंग करवाकर उन्हें सीधा गांवों की ओर भेज दिया है। साथ ही सरकार ने अन्य राज्य से लौटे लोगों को गांवों में भेजने के बाद उनकी क्वारंटाइन की व्यवस्था ग्राम प्रधानों के कंधों पर डाल दी। प्रीतम सिंह ने कहा कि मुख्य सचिव से ग्राम प्रधानों को दी जाने वाली धनराशि के संबंध में पूछा गया तो पता चला कि ग्राम प्रधानों को क्वारंटाइन की व्यवस्था बनाने के लिए कोई धनराशि नहीं दी गई है। प्रीतम सिंह का कहना है कि उन्होंने खुद फील्ड में जाकर ग्राम प्रधानों से वार्ता की है। जिससे पता चला कि उनके पास लोगों को क्वारंटाइन कराने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े होने लाजमी है।
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प्रवासियों को मिलेगी मुफ्त राशन
पौड़ी। देश के विभिन्न शहरों से लौटे प्रवासियों के लिए राहत की खबर है। जिन प्रवासियों के पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें प्रशासन की ओर से मुफ्त राशन दी जाएगी। इस संबंध में डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने पूर्ति विभाग को आदेश जारी किए हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लौटे प्रवासियों को खाद्य सामग्री के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। जिले में अब तक करीब 30 हजार से अधिक प्रवासी लौटे हैं। जबकि लगातार अभी प्रवासी लौट रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी केएस कोहली ने बताया कि प्रवासियों के लौटने की अनुमानित संख्या करीब 58 हजार होगी। कोहली ने बताया कि जिन प्रवासियों के पास राशन कार्ड नहीं है उन्हें शासन के निर्देश पर राशन मुफ्त दी जाएगी। जिसके तहत पांच किलो चावल, एक किलो चना दाल प्रति व्यक्ति दो माह (मई व जून) में दिया जाएगा। बताया कि इसके लिए प्रत्येक प्रवासी को शासन की ओर से निर्धारित विवरण देना होगा। यह विवरण प्रवासियों को तीस मई तक देना होगा। 1 जून से यह राशन प्रवासियों को मिलनी शुरू हो जाएगी।
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पंतनगर एयरपोर्ट से उड़ान भरने लगे छोटे एयरक्राफ्ट
रूद्रपुर। पंतनगर एयरपोर्ट से फ्लाइंग क्लब के ट्रेनी पायलटों को उड़ान भरने की परमिशन मिल गई है। जिसके बाद एयरपोर्ट से सिंगल और डबल इंजन के छोटे एयरक्राफ्ट उड़ान भरने लगे। इस दौरान कोविड-19 की रोकथाम और बचाव के नियमों का पालन सख्ती से किया जा रहा है। गौर हो कि कोरोना संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने बीती 25 मार्च से सभी तरह की उड़ान सेवाओं पर रोक लगा दी थी। लेकिन अब पायलट को एक समय में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ उड़ान भरने और अन्य कार्यों की परमिशन दी गई है। फिलहाल रनवे से सिंगल इंजन और डबल इंजन के एयरक्राफ्ट ही उड़ान भर रहे हैं। एयरपोर्ट से 56 ट्रेनी पायलटों में सिर्फ 10 ट्रेनी पायलटों को एक समय में सोशल डिस्टेंसिंग के साथ उड़ान भरने और अन्य कार्यों की परमिशन दी गई है। पंतनगर एयरपोर्ट डायरेक्टर एसके सिंह ने बताया कि 20 मई से फ्लाइंग क्लब को उड़ान भरने की परमिशन मिल चुकी है। इस दौरान वह सभी नियम-कानून ट्रेनी पायलटों पर लागू हैं। ऐसे में एक समय में सिर्फ 10 ट्रेनी पायलटों को परमिशन दी गई है।
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वतन वापसी नहीं होने पर 65 नेपाली मजदूर लौटे कर्मभूमि की ओर
उत्तरकाशी। लॉकडाउन के चलते सैकड़ों नेपाली मजदूर इस आस के साथ गए थे कि वह अपने घर वापस जा सकें, लेकिन अपने देश की सरकार की बेरुखी के चलते इन्हें वापस लौटना पड़ रहा है। तीन दिन पहले 100 से अधिक नेपाल मूल के मजदूर लॉकडाउन के चलते इस आस के साथ उत्तरकाशी से चले थे कि उनकी वापसी हो जाएगी।
भारत-नेपाल बॉर्डर पर तीन दिन तक सभी नेपाली मजदूर इंतजार करते रहे कि बॉर्डर खुलेगा, तो वह अपने देश जा सकेंगे, लेकिन बनबसा में नेपाल सरकार की और से बॉर्डर न खोलने पर 65 मजदूरों को मजबूर होकर निराश उत्तरकाशी वापस लौटना पड़ा। मातृभूमि की बेरुखी देख नेपाली मजदूरों को अब कर्मभूमि की और ही रुख करना पड़ा। उत्तरकाशी लौटने पर सभी नेपाली मजदूरों को राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में क्वारंटाइन किया जा रहा है। एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र सिंह नेगी ने बताया कि  65 नेपाली मूल के मजदूर बनबसा से वापस उत्तरकाशी लौटे हैं। नेपाल सरकार के बॉर्डर न खोलने पर यह वापस लौटे हैं। यहां पर उनका मेडिकल चेकअप कर राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में क्वारंटाइन किया गया है। साथ ही प्रशासन की ओर से उनके लिए सभी प्रकार की व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
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खटीमा पुलिस ने दुकान और वाहनों का किया चालान
खटीमा। पूरे देश में लॉकडाउन का चैथा चरण चल रहा है। ऐसे में पुलिस द्वारा लगातार सख्ती से धारा 144 का पालन कराया जा रहा है। जिसके चलते पुलिस द्वारा खटीमा और सितारगंज के क्षेत्रों में शाम 4 बजे के बाद दुकान खोले जाने और वाहनों पर चालानी कार्रवाई की जा रही है।
जनपद के खटीमा और सितारगंज थाना क्षेत्रों में पुलिस द्वारा लॉकडाउन का चैथा चरण का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। इस दौरान प्रशासन ने सुबह 7 से शाम 4 बजे तक बाजार खोले जाने का आदेश जारी किया है। ऐसे में शाम 4 बजे से सुबह 7 बजे तक क्षेत्र में धारा 144 भी लागू है। वहीं पुलिस शाम 4 बजे के बाद खुली दुकानों के खिलाफ चालानी कार्रवाई कर रही है। वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर लॉकडाउन में धारा 144 का सख्ती से पालन कराने के निर्देश है। जिसके तहत पुलिस द्वारा जो भी व्यक्ति धारा 144 का उल्लंघन कर रहा है. उसके खिलाफ चालान की कार्रवाई की जा रही है।
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कोरोना योद्धा सीओ सिटी अभय सिंह देवदूत हुए साबित 
हरिद्वार। कोरोना संक्रमण वैश्वविक महामारी के कारण लगे लॉक डाउन में फसे लोगो के लिए सी ओ सिटी अभय प्रताप सिंह देवदूत बन कर सेवा में उतर पड़े है। यह उनकी तारीफ में कोई कसीदे नहीं पढ़े जा रहे है। यह तो वो लोग कह रहे है। जिनको अभय प्रताप सिंह ने  उनके गंतव्य तक पहुंचाने में तन मन धन से जुटे हुए है।
उन्होंने लॉक डाउन में फंसे लोगो को राहत शिविर  से लेे कर उनके  घर तक पहुंचाने  में जो मदद अभय प्रताप सिंह ने की यदि उन्हें कोरोंना योद्धा के साथ साथ देवदूत कहा जाए तो अतिश्योक्ति न होगी।पिछले सात दिनों से भल्ला स्टेडियम पर खुले आसमान के नीचे दिन रात धूप और  भीषण गर्मी झेल रहे पश्चिम बंगाल के लोगों को बस  से रवाना किया। वहीं एक व्यक्ति जुबेर खान जो कोलकात्ता का रहने वाला है उसे निःशुल्क बंगाल  की बस  में भेज कर मानवता का धर्म निभाया ।  बतौर जुबेर खान की जुबानी सी ओ साहब तो मेरे लिए देवदूत बन कर आए है। बंगाल के मजदूरों ने जाने से पूर्व हरिद्वार प्रशासन के साथ साथ उन संस्थाओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उन्हें सुबह शाम  नाश्ता और खाने की व्यवस्था की। अभी दो दिन पूर्व भी यू पी में कानपुर की एक गर्भवती महिला और उसके पति को उनके घर जाने की व्यवस्था की। उनकी इस कार्यशैली के सभी कायल है कि पुलिस में रह कर उत्तराखंड पुलिस के स्लोगन मित्र पुलिस व  मित्रता सेवा और सुरक्षा का मूल मंत्र को चरितार्थ कर रहे है।

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साठ दिन से सेवा में जुटे युवा भगीरथों व समाजसेवी को जिलाधिकारी ने किया सम्मानित
-शहरी विकास मंत्री ने भी की बीइंग भगीरथ जनता रसोई व श्रीराम नाम विश्व बैंक समिति के कार्यों की सराहना
हरिद्वार। लाॅकडाउन में सेवा कार्यो में अहम भूमिका निभाने वाली बीइंग भगीरथ फाउण्डेशन के स्वयंसेवियों को जिलाधिकारी ने सम्मानित किया। दो महीने लगातार सेवा कार्य चलाने पर संस्था की ओर अभियान को अल्प विराम दिया गया है। लाॅकडाउन की मुश्किल घड़ी में पिछले साठ दिनों से कोरोना वारियर के रूप में संयोजक शिखर पालीवाल व उनकी विभिन्न क्षेत्रों में लगायी टीमें जरूरतमंदों को खाद्य सामग्री के साथ भोजन की व्यवस्था को भी निरंतर अंजाम दे रही थी। जिलाधिकारी सी.रविशंकर ने बीइंग भगीरथ के संयोजक शिखर पालीवाल व उनकी टीम की सराहना करते हुए कहा कि लाॅकडाउन में बीइंग भगीरथ युवा टीम की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतना कम है।
इनके द्वारा जरूरतमंदों को निस्वार्थ सेवाभाव से भोजन व खाद्य सामग्री वितरित किया जाना अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना। जिसमें सामाजिक व धार्मिक क्षेत्र में अग्रणी संस्था श्रीराम नाम विश्व बैंक समिति को उनके विगत 56 दिनों के जनसेवा कार्यों को देखते हुए जिलाधिकारी हरिद्वार व रामकृष्ण मिशन के स्वामी दयाधिपानन्द द्वारा संस्था के महासचिव पं0 सुमित तिवारी को प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। के लिए चिंता का विषय  है। और बाहर से आने वाले प्रवासियों और स्थानीय स्तर पर लोगों की जरूरतें पूरी कर पाना प्रशासन के लिए भी सम्भव नही है। इस कार्य मे जनसेवा करने वाली वो तमाम संस्थाएँ बधाई की पात्र है जो जरूरत मंदो की सेवा में निरंतर ततपर है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय मे परिस्थिति और भीषण होने वाली है। इसलिए सभी को मिलजुल कर व सावधान रहकर कार्य करने की आवश्यकता है।
संयोजक शिखर पालीवाल ने कहा कि कोरोना वायरस के रूप में जो संकट देश व समाज के सामने आया उसे देखते हुए हरिद्वार को अलग अलग क्षेत्र में विभाजित कर बीइंग भगीरथ की टीमें तैनात की गयी। सभी टीम के सदस्यों ने जिम्मेदारी से अपनी भूमिका निभाते हुए प्रत्येक गरीब व असहाय तक भोजन व राशन के रूप में मदद पहुंचायी।  जिसमें सार्थक पाठशाला, जमालपुर खुर्द समिति, श्यामपुर कांगड़ी यूथ क्लब, अजय बिष्ट, मनोज निषाद, विशाल खैरवाल, आशीष जैन, शुभानु भारद्वाज, राजन राणा, रोहित चैहान, संगीत मदान आदि ने बीइंग भगीरथ द्वारा तैयार किए गए भोजन को विभिन्न क्षेत्रों में जरूरतमंदों तक पहुंचाने में निस्वार्थ रूप से सहयोग किया। जिसके लिए उन्हें जिला अधिकारी द्वारा सम्मानित किया गया। साथ ही बीइंग भगीरथ के साठ दिन तक चले अभियान में करीब दो लाख लोगों तक भोजन व राशन पहुंचाने में लगे स्वयंसेवियों मोहित विश्नोई, हितेश चैहान, अंकित शर्मा, मोहित शर्मा, विपिन सैनी, ब्रजेश चैहान, शिवम् चैहान, आशु चैहान, कुणाल धवन, शुभम विश्नोई, संदीप खन्ना, वेणु त्यागी, संतोष साहू, ओमशरण गुप्ता, मधु भाटिया, नीरज शर्मा, रूचिता उपाध्याय, जनक सहगल,भूपेश पांडेय, विपुल गोयल, विनोद कुमार, विनीत चैहान, राहुल गुप्ता, अनिकेत, तन्मय, सुशांत समेत सभी सदस्यों को जिला अधिकारी, अपर मेला अधिकारी, गंगा सभा अध्यक्ष प्रदीप झा, मुख्य उद्यान अधिकारी नरेंद्र यादव व आरएसएस सेवा प्रमुख वीर प्रताप चैहान द्वारा सम्मानित किया गया।
लॉकडाउन में व्यवस्थाएं और व्यपारियो की दिक्कतों को लेकर कैबिनेट मंत्री को सौंपा ज्ञापन
हरिद्वार। प्रदेश व्यापार मण्डल के एक प्रतिनिधिमण्डल ने जिलाध्यक शिवकुमार कश्यप के नेतृत्व मे व्यापारी की माँगो को लेकर कैबिनेट मंत्री मदन कोशिक ने मुलाकात की। जिलाध्यक्ष ने कहा की दुकाने खोलने का टाईम बदलकर सुबह 9 से शाम 7 बजे का होना चाहिए,बिजली पानी का 3 महीने का बिल माफ होना चाहिए और व्यापारी की आर्थिक सहायता की जानी चाहिए जिससे सड़क पर आ गय व्यापारीयो को थोड़ी राहत मिल सके ।
जिला महामंत्री डाव विशाल गर्ग ने कहा की स्कूलो की 3 महीने की फीस माफ की जानी चाहिए,सी सी लिमिट मे 3 महीने का ब्याज माफ किया जाना चाहिए,बैंक लोन की 3 महीने की किस्त माफ की जानी चाहिए। उन्होंने कहा की व्यापारीयो ने हमेशा सरकार का साथ दिया है व होटल कारोबारियों के भी एक साल का कर माफ किया जाना चाहिए और उनकी आर्थिक सहायता की जानी चाहिए। अब सरकार को व्यापारियों का साथ देना चाहिए।
व्यापारी नेता राम अरोरा व मनोज सिंघल ने कहा की व्यवसायिक गाड़ियों के 2 साल के कर माफ किए जाने चाहिए,गाड़ियों के इंश्योरेंस को एक साल के लिए बढ़ाया जाना चाहिए,बैंक लोन के एक साल की किस्त का ब्याज माफ किया जाना चाहिए व गाड़ी मालिको,ड्राइवरो व कंडेक्टर की आर्थिक सहायता की जानी चाहिए कैबिनेट मंत्री मदन कोशिक ने आश्वासन दिया की सरकार पुरी तरह व्यापारियों के साथ है और सभी माँगो पर सरकार जल्दी निर्णय लेगी जो की व्यापारी हितो में होगाज्ञापन देने वालों मे संरक्षक मुकेश भार्गव,जिला उपाध्यक्ष मास्टर सतीश शर्मा ,युवा शहर अध्यक गौरव मेहता व विक्रम सिंह शामिल रहे।
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डा. त्रिलोक कोरोना वारियर्स बनकर कर रहे हैं लोगों को जागरूक
देहरादून। कोरोना वैश्विक महामारी के कारण जहां शहरी क्षेत्र प्रभावित हैं वही गांव भी सुरक्षित नही रह गए हैं ऐसे में जन जन को कोविन 19 महामारी से बचाओ के लिए जागरुक होनो की आवश्यकता है। राजकीय इण्टर कॉलेज मरोड़ा (सकलाना) में कार्यरत एनएसएस प्रभारी पर्यावरणविद् वृक्षमित्र डॉ. त्रिलोक चंद्र सोनी ने मरोड़ा, हटवालगांव, लामकाण्डे व क्षेत्र पंचायत हटवालगांव के जनप्रतिनिधियों को कोरोना महामारी से बचाओ के लिए जागरूक किया ताकि इस कोरोना महामारी से गांव का आम जनमानस सुरक्षित रह सके।
         पर्यावरणविद् वृक्षमित्र डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी ने कहाकि गांव के लोगो की सुरक्षा में प्रधानों व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की अहम भूमिका है और उनके द्वारा सराहनीय कार्य भी किया जा रहा हैं। कहा वर्तमान समय में इस कोरोना महामारी से बचाव के लिए हमें जागरुक होने की जरूरत है जागरुकता व सावधानी ही इस बीमारी की बचाव की दवाई है जिसके लिए 2 गज की सामाजिक दूरी बनाए रखने, समय-समय पर हाथ धोने, किसी भी कार्य पर निकलने पर मुंह में मास्क लगाने, एक दूसरे से हाथ न मिलाने तथा किसी भीड़ भाड़ वाले जगह पर नहीं जाने कोविन 19 का बचाव है इसके लिए आम जनमानस को जागरुक होने की जरुरत है ताकि यह महामारी ग्रामीण क्षेत्रों में ना पहुचे और गांव के लोग सुरक्षित रह सके। क्षेत्र पंचायत सदस्य हटवालगांव सरिता रावत ने कहा गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी हर व्यक्ति की हैं हमारी प्राथमिकता गांव की सुरक्षा के साथ गांव के लोगो को स्वास्थ्य भी रखना है जिसके लिए हम तत्परता के सेवा में लगे हैं। इस जन जागरूकता कार्यक्रम में प्रधान हटवाल गांव सुनीता हटवाल गांव, प्रधान मरोड़ा नीलम देवी, प्रधान लामकण्डे भूपेंद्र सिंह मनवाल, सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद सिंह रावत, नवीन भारती (अध्यापक), मनोज सकलानी, राजेश, पंचम हटवाल आदि उपस्थित रहे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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