ICU में AC ब्लास्ट से मची अफरा-तफरी, महिला मरीज की मौत; पुलिसकर्मियों समेत 10 लोग घायल फायर ब्रिगेड ने समय रहते बचाई कई जिंदगियां, अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल Dehradun स्थित Panacea Hospital के ICU में बुधवार सुबह AC में ब्लास्ट होने से भीषण आग लग गई। घटना के समय ICU में 6 मरीज भर्ती थे। आग लगते ही अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई और मरीजों को तत्काल बाहर निकालकर दूसरे अस्पतालों में शिफ्ट किया गया। हादसे में 60 वर्षीय महिला मरीज वीरवती की मौत हो गई, जबकि 10 लोग घायल हुए हैं। घायलों में राहत कार्य में जुटे 3 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। मरीजों को Kailash Hospital, Coronation Hospital और Doon Hospital में भर्ती कराया गया है। गढ़वाल कमिश्नर Vinay Shankar Pandey ने बताया कि प्रथम दृष्टया आग AC में तकनीकी खराबी के कारण लगी प्रतीत हो रही है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है। देहरादून। देहरादून की शांत सुबह बुधवार को अचानक चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गई, जब शहर के प्रमुख निजी अस्पतालों में शामिल Panacea Hospital के ICU में अचानक भीषण आग लग गई। देखते ही देखते धुएं का गुबार पूरे अस्पताल में फैल गया और वहां भर्ती मरीजों, उनके परिजनों तथा अस्पताल स्टाफ में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह हादसा सुबह करीब 9:20 से 9:30 बजे के बीच ICU की फॉल सीलिंग में लगे एयर कंडीशनर (AC) में ब्लास्ट होने से हुआ। ब्लास्ट के तुरंत बाद आग ने ICU को अपनी चपेट में ले लिया। उस समय ICU में छह गंभीर मरीज भर्ती थे, जबकि पूरे अस्पताल में लगभग 13 से 14 लोग मौजूद थे। धुएं से घिरा ICU, मरीजों को बचाने के लिए मची दौड़ घटना के बाद अस्पताल में कुछ मिनटों तक हालात बेहद भयावह बने रहे। ICU से उठते घने धुएं के कारण सांस लेना मुश्किल हो गया था। अस्पताल स्टाफ ने तुरंत मरीजों को बाहर निकालना शुरू किया। कई मरीजों को ऑक्सीजन सपोर्ट के साथ स्ट्रेचर पर शिफ्ट किया गया, जबकि कुछ को परिजन और पुलिसकर्मी गोद में उठाकर बाहर लाए। स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में मदद की। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार आग के बाद अस्पताल परिसर में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी। कई लोग रोते-बिलखते अपने परिजनों की जानकारी लेने अस्पताल के बाहर जमा हो गए। महिला मरीज की दर्दनाक मौत इस हादसे में 60 वर्षीय महिला मरीज वीरवती, निवासी कांवली-बल्लीवाला, की मौत हो गई। उन्हें गंभीर हालत में Kailash Hospital ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कैलाश अस्पताल के निदेशक डॉ. पवन शर्मा के अनुसार महिला को अस्पताल लाए जाने तक उसकी मौत हो चुकी थी। प्रथम दृष्टया मौत का कारण धुएं में दम घुटना और शरीर का झुलसना माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। 10 लोग घायल, 3 पुलिसकर्मी भी झुलसे घटना में कुल 10 लोग घायल हुए हैं। इनमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटे तीन पुलिसकर्मी भी शामिल हैं, जो मरीजों को ICU से बाहर निकालते समय धुएं और गर्मी की चपेट में आ गए। घायलों को Coronation Hospital, Doon Hospital और कैलाश अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। छह मिनट में पहुंची फायर ब्रिगेड आग लगने की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। अधिकारियों के अनुसार फायर ब्रिगेड की टीम महज छह मिनट के भीतर अस्पताल पहुंच गई थी। दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग को ICU तक सीमित रखा और उसे अन्य वार्डों में फैलने से रोक दिया। फायर टीम और पुलिस ने मिलकर अस्पताल को खाली कराया। समय रहते राहत कार्य शुरू होने के कारण बड़ा हादसा टल गया, अन्यथा स्थिति और भयावह हो सकती थी। मौके पर पहुंचे गढ़वाल कमिश्नर और IG घटना की सूचना मिलते ही गढ़वाल कमिश्नर Vinay Shankar Pandey और IG गढ़वाल मौके पर पहुंचे। उन्होंने राहत एवं बचाव कार्य का निरीक्षण किया और अस्पताल प्रशासन से घटना की जानकारी ली। गढ़वाल कमिश्नर ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह हादसा ICU में लगे AC में तकनीकी खराबी या ब्लास्ट के कारण हुआ प्रतीत हो रहा है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों की पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पताल में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस घटना के बाद निजी अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ICU जैसे संवेदनशील वार्डों में अत्याधुनिक फायर सेफ्टी सिस्टम, धुआं नियंत्रण व्यवस्था और नियमित तकनीकी निरीक्षण बेहद जरूरी होते हैं। स्थानीय लोगों ने भी प्रशासन से शहर के सभी निजी अस्पतालों की फायर सेफ्टी ऑडिट कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। जांच शुरू, प्रशासन सतर्क फिलहाल पुलिस और फायर विभाग की टीम घटनास्थल से साक्ष्य जुटा रही है। अस्पताल परिसर को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया है और तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की वास्तविक वजह सामने आएगी। Post navigation मसूरी विधानसभा बनी भाजपा की सबसे चर्चित ‘हॉट सीट’, रविंद्र जुगराण की दावेदारी से सियासी हलचल तेज उत्तराखंड में बदलेगी होम स्टे योजना की तस्वीर, सरकार ने किए बड़े सुधार