जनसेवा, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के योगदान को मिला देश का बड़ा सम्मान

पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया। जनसेवा, शिक्षा, राजनीति और सामाजिक कार्यों में उनके लंबे योगदान को देखते हुए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया। उत्तराखण्ड में ‘भगत दा’ के नाम से प्रसिद्ध कोश्यारी का जीवन संघर्ष, सादगी और राष्ट्र सेवा का प्रतीक माना जाता है।

नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित भव्य नागरिक अलंकरण समारोह में भारत की राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री और महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल Bhagat Singh Koshyari को लोक कार्य के क्षेत्र में देश के प्रतिष्ठित “पद्म भूषण” सम्मान से अलंकृत किया।

राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित इस समारोह में देश की कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति C. P. Radhakrishnan, प्रधानमंत्री Narendra Modi, केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah सहित केंद्र सरकार के कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


पहले चरण में 66 पद्म पुरस्कार प्रदान

राष्ट्रपति द्वारा आयोजित पहले नागरिक अलंकरण समारोह में कुल 66 पद्म पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 2 पद्म विभूषण, 6 पद्म भूषण और 58 पद्म श्री पुरस्कार शामिल रहे।

वर्ष 2026 के लिए केंद्र सरकार ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंजूरी दी है, जिनमें 5 पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री पुरस्कार शामिल हैं। बाकी पुरस्कार विजेताओं को आगामी दूसरे चरण के समारोह में सम्मानित किया जाएगा।


उत्तराखण्ड के ‘भगत दा’ को मिला राष्ट्रीय सम्मान

उत्तराखण्ड की राजनीति और सामाजिक जीवन में विशेष पहचान रखने वाले भगत सिंह कोश्यारी को लोग स्नेहपूर्वक ‘भगत दा’ के नाम से जानते हैं। वे लंबे समय से सामाजिक सेवा, शिक्षा और राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं।

उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एक समर्पित स्वयंसेवक के रूप में भी उनकी पहचान रही है। उनकी सादगी, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण उन्हें आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है।


पहाड़ के गांव से राष्ट्रीय राजनीति तक का सफर

17 जून 1942 को उत्तराखण्ड के बागेश्वर जिले के दूरस्थ गांव पलानधुरा में जन्मे भगत सिंह कोश्यारी ने कठिन परिस्थितियों में शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से संबद्ध अल्मोड़ा कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की।

अपने करियर की शुरुआत उन्होंने उत्तर प्रदेश के एटा जिले के राजा का रामपुर में व्याख्याता के रूप में की। बाद में उन्होंने शिक्षा और समाज सेवा को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया और राष्ट्र निर्माण के उद्देश्य से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई।


उत्तराखण्ड आंदोलन और राजनीति में अहम भूमिका

वर्ष 1997 में उन्हें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के लिए नामित किया गया। उत्तराखण्ड राज्य गठन के बाद वे राज्य की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद उन्होंने उत्तरांचल (अब उत्तराखण्ड) के मुख्यमंत्री के रूप में भी कार्यभार संभाला।

वे उत्तराखण्ड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे। वर्ष 2008 में राज्यसभा सदस्य बने और 2014 में नैनीताल-ऊधम सिंह नगर लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए।


महाराष्ट्र और गोवा के राज्यपाल के रूप में निभाई जिम्मेदारी

5 सितंबर 2019 को भगत सिंह कोश्यारी को महाराष्ट्र का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई प्रशासनिक और सामाजिक पहलों में सक्रिय भूमिका निभाई।

इसके अतिरिक्त अगस्त 2020 में उन्हें गोवा के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था।


लेखक के रूप में भी बनाई पहचान

राजनीति और समाज सेवा के साथ-साथ भगत सिंह कोश्यारी साहित्य और लेखन से भी जुड़े रहे हैं। उन्होंने “उत्तरांचल प्रदेश क्यों” तथा “उत्तरांचल प्रदेश : संघर्ष एवं समाधान” जैसी पुस्तकों की रचना की, जिनमें उत्तराखण्ड राज्य के विकास और भविष्य को लेकर उनकी स्पष्ट सोच दिखाई देती है।


प्रेरणादायी व्यक्तित्व

पद्म भूषण से सम्मानित होना न केवल भगत सिंह कोश्यारी के सार्वजनिक जीवन की उपलब्धि है, बल्कि यह उत्तराखण्ड के लिए भी गौरव का क्षण माना जा रहा है। उनका जीवन संघर्ष, सादगी, जनसेवा और राष्ट्र के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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