देहरादून / नैनीताल। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की नई दिल्ली स्थित प्रधान पीठ ने स्कूलों, अस्पतालों और आवासीय क्षेत्रों के आसपास पेट्रोल पंप स्थापित करने के मामलों में पर्यावरणीय और सुरक्षा मानकों के सख्त अनुपालन को अनिवार्य बताते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की गाइडलाइंस केवल औपचारिक निर्देश नहीं हैं, बल्कि उनका पालन करना सभी संबंधित संस्थाओं के लिए बाध्यकारी होगा।

एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने मंगलवार को यह आदेश पारित किया। आदेश की प्रति बुधवार को प्राप्त हुई। यह फैसला “रोशन जोशी बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य” मामले में सुनाया गया, जिसमें देहरादून के रायपुर क्षेत्र में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) द्वारा प्रस्तावित पेट्रोल पंप की वैधता को चुनौती दी गई थी।

स्कूल और पेट्रोल पंप के बीच दूरी पर उठा विवाद

याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप एक स्कूल, पशु चिकित्सालय और नहर के अत्यधिक निकट स्थापित किया जा रहा है, जिससे सीपीसीबी के निर्धारित दूरी संबंधी मानकों का उल्लंघन हो रहा है। सुनवाई के दौरान अधिकरण के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि प्रस्तावित पेट्रोल पंप की वितरण इकाई और स्थानीय स्कूल के बीच दूरी लगभग 36 से 40 मीटर के बीच है।

सीपीसीबी की गाइडलाइंस के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में पेट्रोल पंप और स्कूल जैसे संवेदनशील संस्थानों के बीच न्यूनतम 50 मीटर की दूरी आवश्यक मानी जाती है। ऐसे में इस मामले ने सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

30 से 50 मीटर के बीच विशेष सुरक्षा उपाय अनिवार्य

एनजीटी ने अपने आदेश में कहा कि यदि किसी कारणवश 50 मीटर की दूरी उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो 30 से 50 मीटर के बीच पेट्रोल पंप केवल उन्हीं परिस्थितियों में स्थापित किया जा सकता है जब पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा निर्धारित अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का पूरी तरह पालन किया जाए।

इन सुरक्षा उपायों में दो मीटर ऊंची आरसीसी सुरक्षा दीवार, भूमिगत टैंकों के लिए मजबूत कंक्रीट पिट, अग्नि सुरक्षा उपकरण और अन्य तकनीकी सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं। अधिकरण ने स्पष्ट किया कि इन मानकों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

30 मीटर से कम दूरी किसी भी हाल में स्वीकार नहीं

पीठ ने अपने फैसले में साफ कहा कि किसी भी स्थिति में पेट्रोल पंप और स्कूल अथवा अन्य संवेदनशील संस्थानों के बीच दूरी 30 मीटर से कम नहीं हो सकती। न्यायाधिकरण ने इसे सार्वजनिक सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन के लिए आवश्यक बताया।

फैसले में सीपीसीबी गाइडलाइंस की व्याख्या करते हुए अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि “10 बिस्तरों एवं उससे अधिक वाले अस्पताल” का अर्थ मानव अस्पताल से है, न कि पशु चिकित्सालय से। इसी आधार पर पशु चिकित्सालय को लेकर उठाई गई आपत्ति को खारिज कर दिया गया।

पीईएसओ को स्वतंत्र सत्यापन के निर्देश

सुनवाई के दौरान पीईएसओ ने अधिकरण को बताया कि प्रस्तावित स्थल को अभी अंतिम स्वीकृति नहीं दी गई है। संस्था ने दस्तावेजों में कई कमियां और साइट प्लान में विसंगतियों की ओर भी न्यायाधिकरण का ध्यान आकर्षित किया।

इसके बाद एनजीटी ने पीईएसओ को निर्देश दिए कि वह स्कूल और नहर से संबंधित दूरी मानकों का स्वतंत्र सत्यापन करे तथा सीपीसीबी गाइडलाइंस और पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के पूर्ण अनुपालन के बाद ही अंतिम मंजूरी प्रदान करे।

पर्यावरणीय सुरक्षा की दिशा में अहम फैसला

विशेषज्ञों के अनुसार एनजीटी का यह फैसला भविष्य में स्कूलों, अस्पतालों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास पेट्रोल पंप स्थापित करने के मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित होगा। यह आदेश स्पष्ट संदेश देता है कि सार्वजनिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

यह निर्णय राज्य सरकारों, तेल कंपनियों और संबंधित एजेंसियों के लिए भी चेतावनी माना जा रहा है कि बिना सुरक्षा और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन के किसी भी परियोजना को मंजूरी नहीं दी जाएगी।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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