-ऋषिकुमारों ने वेद मंत्र और पुष्प वर्षा कर राज्यपाल कोश्यारी का स्वागत किया ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज और महाराष्ट्र के राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी की भेंटवार्ता हुई। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने वेद मंत्र और पुष्प वर्षा कर राज्यपाल कोश्यारी का स्वागत किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि कोश्यारी सरलता, सजगता और सात्विकता की त्रिवेणी है। सहजता, संयम और स्नेह उनमें अपार भरा है। सब को जोड़ने और सभी से जुड़ने की कला अद्भुत है, ऐसे व्यक्तित्व राजनीति के लिये नहीं बल्कि राष्ट्रनीति के लिये बने है, उनका जीवन अपने आप में एक संदेश है। जो भी उनके सम्पर्क में आता है उन्हे समाज, राष्ट्र और संस्कृति के साथ जोड़ना उनकी विशेषता रही है। परमार्थ निकेतन से उनका सम्बंध सदैव श्रद्धा, आस्था और प्रेम का रहा है वे आने वाली पीढ़ियों के लिये एक आदर्श है। कोश्यारी ने कहा कि परमार्थ निकेतन की गंगा आरती एक नयी ऊर्जा देती है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने महामहिम कोश्यारी से पी लो पानी स्वच्छ जल की मशीन, विकेन्द्रीयकृत सीवर ट्रीटमेंट प्लांट, नदियों की स्वच्छता, एकल उपयोग प्लास्टिक का उपयोग न करने, समुद्र को स्वच्छ रखने, तटों की स्वच्छता, पर्यावरण, प्रदूषण नियंत्रण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता जागरूकता, शौचालय, जल संरक्षण जैसे अनेक विषयों पर विस्तृत चर्चा की। स्वामी जी ने महामहिम से कहा कि आप शिवाजी की जन्मभूमि महाराष्ट्र के महामहिम राज्यपाल पद की गौरवमयी जिम्मेदारी को निभा रहे है। वास्तव में यह अद्भुत और गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री के रूप में आपने उत्तराखण्ड का कुशलता से नेतृत्व किया। आपने अपनी दृष्टि, दिशा और प्रतिबद्धता से उत्तराखण्ड राज्य को समृद्धि और स्थिरता के शिखर तक पहुंचाया और एक दिव्य राज्य के रूप में स्थापित करने का अद्भुत कार्य किया। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में महाराष्ट्र राज्य अनेक सकारात्मक और महान बदलावों को अनुभव करेगा। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने मुम्बई में वृक्षारोपण करने पर जोर देते हुये कहा कि खाली पड़ी भूमि में छायादार, जड़दार, जलदार और मिट्टी को पकड़ कर रखने वाले पौधे लगाये जायें जिससे जल का संचयन और संरक्षण होगा। स्वामी जी ने महामहिम को अन्तर्राष्ट्रीय योग महोत्सव में सहभाग करने हेतु आमंत्रित किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि उत्तराखण्ड में योग पर्यटन को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि देश विदेश से लोग यहां पर आयें और पहाड़ोें पर विराजमान तीर्थ स्थलों का भ्रमण करे, यहां के प्राकृतिक सौन्द्रर्य का आनन्द ले इससे पहाड़ी संस्कृति, संस्कारों के साथ स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिलेगा तथा बाहर से आने वाले लोगों के दिलों में उत्तराखण्ड की संस्कृति के प्रति प्यार बढ़ेगा रोजगार बढ़ेगा और व्यापार बढ़ेगा। कोश्यारी को स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने साध्वी भगवती सरस्वती द्वारा दिये गये उद्बोधनों को संकलित कर प्रतिष्ठित प्रकाशक पेंग्विन प्रकाशन ने ‘कम होम टू योर सेल्फ’ जिसमें जीवन की समस्याओं का सहज समाधान सुझाया है, यह पुस्तक प्रकाशित की है। इस पुस्तक की प्रति भेंट की। साथ ही देश के हरित विकास के लिये मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया। कोश्यारी ने परमार्थ गंगा तट पर होने वाली दिव्य आरती में सहभाग किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भगत सिंह कोश्यारी का अभिनन्दन करते हुये पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौघा भेंट किया। विश्व स्तर पर जल की आपूर्ति हेतु विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया। Post navigation कठपुतली शो ने किया गांधी के जादू को जीवंत नवरात्र साधना साधक के मानसिक स्तर को सुधारने में सहायकः डॉ. पण्ड्या