ग्रामीण पर्यटन और स्वरोजगार  को नई मजबूती देने की तैयारी

उत्तराखंड सरकार ने होम स्टे योजना को अधिक प्रभावी और ग्रामीण हितैषी बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। योजना का उद्देश्य गांवों में रोजगार बढ़ाना, पर्यटन को बढ़ावा देना और पलायन रोकना है। नए सुधारों के तहत अब पंजीकरण, गुणवत्ता और संचालन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

देहरादून: उत्तराखंड में ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने वाली होम स्टे योजना अब नए स्वरूप में नजर आएगी। राज्य सरकार ने योजना को उसके मूल उद्देश्य से भटकता देख इसमें कई महत्वपूर्ण बदलाव और सुधार किए हैं। सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से होम स्टे योजना अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और ग्रामीणों के लिए लाभकारी बन सकेगी।

पलायन रोकने की सोच से शुरू हुई थी योजना

उत्तराखंड में पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन को रोकने और गांवों में ही रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में होम स्टे योजना शुरू की गई थी। इस योजना के जरिए ग्रामीण परिवारों को अपने घरों को पर्यटकों के लिए तैयार कर आय अर्जित करने का अवसर मिला। इससे न केवल स्थानीय लोगों को रोजगार मिला, बल्कि उत्तराखंड की संस्कृति, खानपान और पारंपरिक जीवनशैली को भी नई पहचान मिली।

सरकारों ने लगातार जारी रखा मॉडल

होम स्टे योजना की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत  के कार्यकाल में हुई, लेकिन बाद में त्रिवेन्द्र सिंह सिंह   सरकार और फिर पुष्कर सिंह धामी सरकार ने भी इसे प्राथमिकता दी। लगातार सुधारों और प्रोत्साहन के कारण उत्तराखंड देश में होम स्टे मॉडल के सफल राज्यों में शामिल हुआ।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला सहारा

इस योजना ने गांवों में पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया। होम स्टे के माध्यम से स्थानीय लोगों को सीधे आय का स्रोत मिला, वहीं स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, पारंपरिक भोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बाजार उपलब्ध हुआ। इससे महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हुए।

समय-समय पर हुए कई बदलाव

सरकार ने जरूरत के अनुसार योजना में लगातार संशोधन किए। वर्ष 2018 में पहले से संचालित ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना’ को ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय गृह आवास (होम स्टे) विकास योजना’ से जोड़ा गया। इसके जरिए होम स्टे संचालकों को सब्सिडी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई।

बिजली-पानी दरों में भी दी गई राहत

ग्रामीण क्षेत्रों में होम स्टे संचालित करने वालों को राहत देने के लिए सरकार ने बिजली और पानी के व्यावसायिक दरों में छूट जैसी सुविधाएं भी दीं। इसके अलावा पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाने के लिए कई अन्य कदम उठाए गए।

नए नियमों से योजना को मिलेगा नया स्वरूप

सरकार का उद्देश्य अब यह सुनिश्चित करना है कि होम स्टे योजना वास्तव में ग्रामीण परिवारों और स्थानीय निवासियों तक पहुंचे। नए नियमों के तहत गुणवत्ता, पंजीकरण, संचालन और सुविधाओं को लेकर सख्ती बढ़ाई जा सकती है। साथ ही फर्जी या व्यावसायिक दुरुपयोग पर भी निगरानी रखी जाएगी।

पर्यटन के साथ संस्कृति संरक्षण पर भी जोर

सरकार की कोशिश है कि होम स्टे केवल व्यवसाय तक सीमित न रहे, बल्कि यह उत्तराखंड की लोक संस्कृति, पारंपरिक वास्तुकला और स्थानीय जीवनशैली को भी संरक्षित करने का माध्यम बने। इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों को वास्तविक पहाड़ी जीवन का अनुभव मिल सकेगा।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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