दो सूत्रीय मांगों को कैबिनेट में रखने और रोजगार के अवसर बढ़ाने के आश्वासन के बाद एकता विहार से धरना समाप्त देहरादून। पिछले 111 दिनों से देहरादून के एकता विहार स्थित धरना स्थल पर अपनी दो सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलनरत प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) जवानों ने सोमवार को अपना धरना स्थगित करने का निर्णय लिया। 18 मार्च 2026 से जारी इस आंदोलन को समाप्त करने का फैसला विभागीय मंत्री श्रीमती रेखा आर्य द्वारा मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई के आश्वासन और विभागीय अधिकारियों के माध्यम से दिए गए भरोसे के बाद लिया गया। सोमवार को प्रांतीय रक्षक दल हित संगठन, उत्तराखंड का एक प्रतिनिधिमंडल प्रदेश अध्यक्ष किशन सिंह रावत के नेतृत्व में विभागीय मंत्री रेखा आर्य से उनके आवास पर मिला। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक मालचंद, प्रदेश महासचिव वीर सिंह रावत, जिला अध्यक्ष नवीन सिंह बिष्ट, प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर तोमर, प्रदेश मीडिया प्रभारी विनोद तोमर सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने पीआरडी जवानों की वर्षों से लंबित दो प्रमुख मांगों को मंत्री के समक्ष रखा। मंत्री रेखा आर्य ने आश्वासन दिया कि दोनों मांगों को शीघ्र ही राज्य मंत्रिमंडल (कैबिनेट) की बैठक में प्रस्तुत करने का पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय को गंभीरता और संवेदनशीलता से देख रही है तथा सकारात्मक समाधान की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, वार्ता के दौरान होमगार्ड की तर्ज पर पीआरडी जवानों को अधिक कार्यदिवस (मैनडे) उपलब्ध कराने तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए विभाग का बजट बढ़ाने पर भी सकारात्मक सहमति बनी। मंत्री के निर्देश पर युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल के संयुक्त निदेशक अजय कुमार अग्रवाल तथा अन्य अधिकारियों ने एकता विहार स्थित धरना स्थल पहुंचकर आंदोलनरत जवानों से संवाद किया। अधिकारियों ने मंत्री का संदेश देते हुए भरोसा दिलाया कि सरकार उनकी मांगों के समाधान के लिए गंभीर है और आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र शुरू की जाएगी। इसके बाद संगठन ने मंत्री के आश्वासन के आधार पर फिलहाल धरना स्थगित करने की घोषणा की। संगठन ने 111 दिनों तक अनुशासित एवं शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन में शामिल रहे सभी पीआरडी जवानों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें सरकार से सकारात्मक निर्णय की उम्मीद है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार निर्धारित समय में मांगों पर ठोस निर्णय लेती है तो यह पीआरडी जवानों के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष का महत्वपूर्ण परिणाम होगा। Post navigation महाबहस: 2026 या 2027? श्री नंदा देवी राजजात यात्रा को लेकर गहराया संशय, दो धड़ों के अलग-अलग दावे