देहरादून। भारतीय निशानेबाजी के स्वर्णिम सितारे, पद्मश्री सम्मानित एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त निशानेबाज जसपाल राणा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। शुक्रवार देर शाम उनका पार्थिव शरीर देहरादून के पोंधा क्षेत्र स्थित मझोन गांव में उनके आवास पहुंचा, जहां अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा।

जैसे ही एंबुलेंस उनके आवास पहुंची, पूरा माहौल गमगीन हो गया। गांव में हर ओर सिसकियां और रुदन सुनाई देने लगा। परिवारजन, रिश्तेदार, मित्र और क्षेत्रवासी अपने प्रिय खिलाड़ी को अंतिम विदाई देते हुए भावुक नजर आए। जसपाल राणा के पिता नारायण सिंह राणा बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर खुद को संभाल नहीं पाए और उनकी आंखों से आंसुओं की धारा बह निकली।

जिस गांव ने अपने बेटे को विश्व मंच पर भारत का गौरव बनते देखा था, आज वही गांव उसे नम आंखों से अंतिम विदाई देने के लिए एकत्रित हुआ।

मुख्यमंत्री धामी ने दी श्रद्धांजलि

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी दिवंगत निशानेबाज को श्रद्धांजलि देने उनके आवास पहुंचे। मुख्यमंत्री ने जसपाल राणा के पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके निधन को खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जसपाल राणा ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और उपलब्धियों से उत्तराखंड और देश का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। उन्होंने न केवल एक खिलाड़ी के रूप में देश को गौरवान्वित किया बल्कि एक कोच और मार्गदर्शक के रूप में भी नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मुख्यमंत्री ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस कठिन समय में धैर्य और संबल प्रदान करने की कामना की। उन्होंने परिवारजनों से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की।

गुरु को अंतिम बार देखकर रो पड़ीं मनु भाकर

ओलंपिक पदक विजेता और जसपाल राणा की शिष्या मनु भाकर भी अपने गुरु के अंतिम दर्शन के लिए मझोन गांव पहुंचीं। पार्थिव शरीर के सामने पहुंचते ही वह भावुक हो गईं और अपने आंसू नहीं रोक सकीं।

भावुक मनु ने कहा, “मेरा पिता समान गुरु चला गया। मैं जो कुछ भी हूं, उसमें जसपाल सर का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने मुझे अनुशासन, समर्पण और जुनून के साथ आगे बढ़ना सिखाया।”

उनकी आंखों से लगातार आंसू बहते रहे और उन्होंने मीडिया से ज्यादा बातचीत करने की स्थिति में खुद को नहीं पाया।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़ीं बड़ी हस्तियां

जसपाल राणा के अंतिम दर्शन के लिए खेल और राजनीतिक जगत की कई प्रमुख हस्तियां उनके आवास पहुंचीं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, विभिन्न जनप्रतिनिधियों, खेल अधिकारियों तथा देश के नामी निशानेबाजों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

पेरिस ओलंपिक 2024 के कांस्य पदक विजेता स्वप्निल कुसाले भी अपने गुरु और प्रेरणास्रोत को अंतिम श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

भारतीय निशानेबाजी का चमकता सितारा

जसपाल राणा भारतीय निशानेबाजी के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाते थे। उन्होंने एशियाई खेलों, कॉमनवेल्थ गेम्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अनेक पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। खिलाड़ी के साथ-साथ कोच के रूप में भी उन्होंने भारतीय निशानेबाजी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का मार्ग दिखाया।

वाराणसी में होगा अंतिम संस्कार

परिवार के अनुसार जसपाल राणा की अंतिम इच्छा के अनुरूप शनिवार को उनके पार्थिव शरीर को वाराणसी ले जाया जाएगा। वहां मणिकर्णिका घाट पर पूरे राजकीय और धार्मिक सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

जसपाल राणा का निधन केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। देश ने एक महान खिलाड़ी, प्रेरणादायी कोच और असंख्य खिलाड़ियों के मार्गदर्शक को खो दिया है।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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