आड़ू के सेवन से दूर होती है कब्जियत और अपच की समस्या
‘आड़ू’ या peach का botanical name -‘Prunus persica ‘ है। ऐसा माना जाता है कि लगभग 6000 वर्ष पूर्व दक्षिणी-पश्चिमी चीन में Tarim basin और kunlun पर्वत के बीच की घाटी में आड़ू के पौधों को जंगल से लाकर घरों में…
अनार फल में छेदक कीट और रोकथाम के उपाय
-डा० राजेंद्र कुकसाल (मोबाइल नंबर-9456590999) अनार फल छेदक कीट अनार की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। फल छेदक कीट के कारण अनार फसल में 50% से अधिक हानि होती है। इस कीट के प्रकोप से फलों में छेद…
फल मक्खी कीट के प्रकोप से अमरूद फसल का बचाव
डा० राजेंद्र कुकसाल मोबाइल नंबर-9456590999 वर्षा काल में अमरूद के अधिकतर पके फलों में कीड़े दिखाई देते हैं साथ ही पेड़ से पके फल स्वत: गिरने लगते हैं। यह सब फलों पर फल मक्खी कीट के आक्रमण के कारण होता…
बाल झड़ रहे हैं तो उपयोग करें वनौषधि कूठ
कोरोना महामारी के घनघोर अंधकार से घिरा पूर विश्व आज देवभूमि की दिव्य संजीवनी वनौषधियों की टिमटिमाहट को आशा एवं विश्वास भरी नजरों से निहार रहा है। ऐसी हजारों बहुमूल्य जड़ी बूटियोंं में से एक” कूठ ” अल्पाइन हिमालय में…
बैगन तना और फल छेदक कीट
डा० राजेंद्र कुकसाल (मो.नं-9456590999) बैंगन तना और फल छेदक कीट बैगन की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाने वाला कीट है। कीट के आक्रमण से तने / शाखाओं के अग्र भाग मुरझा कर लटक जाते है , फलों पर छेद…
मिर्च शिमला और मिर्च का चुरड़ा- मुरड़ा रोग
-डा० राजेंद्र कुकसाल (मो.नं.-9456590999) पत्ता मोड़क या चुरड़ा-मुरड़ा, मिर्च और शिमला मिर्च फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाने वाली बीमारी है । वास्तव में यह रोग नहीं है बल्कि यह थ्रिप्स व माइट कीट के प्रकोप के कारण होता है।…
कद्दूवर्गीय फसलों में 3जी कटिंग से मिलेगी अधिक उपज
-डा० राजेंद्र कुकसाल rpkuksal.dr@gmail.com 9456590999 गर्मी व बरसात के मौसम में हर घर के पास लौकी, तोरई, चचिंडा, ककड़ी, करेला ,कद्दू आदि सब्जियों की बेलें देखने को मिलती हैं। कई कृषक इन फसलों की व्यवसायिक खेती भी कर रहे हैं। अनुकूल…
ऐसे मनाये घर पर विश्व योग दिवस, क्या करें जनिये…
देहरादून। विश्वभर में कोरोना संकट के बीच इस वर्ष छठवें विश्व योग दिवस को सार्वजनिक रूप से मनाए जाने की संभावना ना के बराबर है। ऐसे में हम और आप कैसे योग दिवस को अपने घर पर ही मनाएं। हम…
शिमला मिर्च की उपज बढ़ाने को शुरू के तीन फूल कली अवस्था में ही हटायें
–डा० राजेंद्र कुकसाल (मो.नं. 9456590999) अनुकूल जलवायु, भूमि एवं उन्नतिशील किस्म का चुनाव, उचित समय पर बीज की बुआई तथा पौध रोपण, सही मात्रा में उर्वरकों एवं पोषण तत्त्वों का प्रयोग, खरपतवार नियंत्रण, आवश्यकतानुसार निराई गुड़ाई, सिंचाई तथा फसल की…
वनौषधि पुत्रजीवकः प्रजनन क्षमता बढ़ाने एवं गर्भधारण की बाधा को दूर करने में कारगर
-डॉ. आदित्य कुमार (पूर्व उपाध्यक्ष, राज्य औषधीय पादप बोर्ड, उत्तराखंड) ईश्वर ने देवभूमि को, मानव की शिशु अवस्था से लेकर वृद्धावस्था तक ही नहीं अपितु गर्भ में पल रहे जीवन के नव-अंकुर के स्वस्थ रहने की भी चिन्ता करते हुए…
उत्तराखण्ड के क्रूर राजा सामूशाह के अंत की रोचक गाथा
-भारत चौहान उत्तराखण्ड के देहरादून जनपद के जौनसार बावर क्षेत्र में अतीत काल में सामूशाह राजा के आंतक की अनेक कहानियां एवं लोकगीतों में उल्लेख मिलता है। एक जनश्रुति के अनुसार सामूशाह ने जौनसार बावर के आस-पास के गावों से…
कोरोना काल में चर्चा में आयी मनरेगा योजना
-डा० राजेंद्र कुकसाल (मोबाइल नंबर 9456590999) आजकल सोशल मीडिया पर मनरेगा चर्चाओं में हैं, हाशिये पर चल रही यह योजना अचानक सुर्खियों में आ गयी, क्योंकि हुक्मरानों को इस योजना के माध्यम से प्रवासियों के लिए रोजगार की संभावनाएं दिखाई…
अमेरिकन केसर के छलावे में न आये काश्तकार
डा० राजेन्द्र कुकसाल मोबाइल नंबर-9456590999 केसर की खेती अमूमन कश्मीर की ठंडी वादियों में होती है, लेकिन अब दावा किया जा रहा है कि केसर की खेती से उत्तराखण्ड में कई किसानों ने लाखों की कमाई की है। ‘‘जौनसार के…
ड्रोसोफिला कीट के प्रकोप से कद्दूवर्गीय फसलों को कैसे बचायें
⇒ डा० राजेंद्र कुकसाल। मोबाइल नंबर-9456590999 कद्दू वर्गीय सब्जी (लौकी , कद्दू, खीरा, तोरी,चचिन्डा,मैरो, करैला आदि) की फसलों को फल मक्खी (ड्रोसोफिला कीट) काफी नुकसान पहुंचाती है। इस कीट के प्रकोप से इन सब्जियों के फलों पर धब्बे दिखाई देते…
विश्व पर्यावरण दिवसः जरुरी है पर्यावरण से समन्वय बिठाना
-चद्रंशेखर तिवारी प्रकृति में विद्यमान प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग मानव अपने हितों के लिये आदिकाल से करता आया है। युग-युगों से वह अनाज पैदा करने से लेकर वन व खनिजों का दोहन करते आ रहा है। पर्यावरण और उसके तमाम…
जानिये कैसे करे बरसात में फल पौधों का रोपण
⇒ डा० राजेंद्र कुकसाल मोबाइल नंबर-9456590999 बरसात के मौसम में मुख्यत: आम, अमरूद, अनार, आंवला, लीची, कटहल,अंगूर तथा नीम्बू वर्गीय फल पौधों का रोपण किया जाता है। उद्यान लगाने से पहले कुछ बातों को ध्यान में रखा जाना आवश्यक हैं।…
अदरक बीज का उत्पादन स्वयं कर किसान पा सकते लाभकारी उपज
-डा० राजेंद्र कुकसाल (मोबाइल नंबर-7055505029) समय पर प्रमाणित/ट्रुथफुल बीज न मिल पाने के कारण कृषक अदरक की अधिक लाभकारी खेती नहीं कर पा रहे हैं। उद्यान विभाग से प्राप्त अदरक बीज समय पर नहीं मिल पाता, बीज से…
हिमालयी वनौषधि हिंसालू/ हिंसर
डॉ. आदित्य कुमार Rubus ellipticus वनौषधि, जिसे उत्तराखंड में “हिंसालू” या “हिंसर”आदि नामों से तथा हिमाचल में “अच्छू” या “अन्छू” नाम से जाना जाता है। मई-जून में सफेद रंग के फूल आते हैं जो जून से अगस्त तक स्वादिष्ट पीले…
पहाड़ी असिंचित खेती के लिए फायदेमंद अदरक की खेती
डा० राजेंद्र कुकसाल पहाड़ों में किसानों के लिए नकदी तथा व्यवसायिक खेती फायदेमंद साबित हो रही है। प्रदेश में किसान पारंपरिक खेती छोड़कर व्यवसायिक उत्पादन पर जोर दे रहे हैं। पहाड़ों में जंगली जानवरों का आतंक है। पहाड़ों में धान,…
सेब की जड़ों को अपनी ‘जड़ों’ से जोड़ता बागवान
-योगेश भट्ट, वरिष्ठ पत्रकार यह एक प्रेरक कहानी है। ऐसे बागवान की कहानी, जो इन दिनों सेब की जड़ों को अपनी जड़ों से जोड़ने की कोशिश में है। यह कहानी पहाड़ के बंजर खेतों का ‘हल’ है तो उजड़ते गांवों…




















