रामनगर। रामनगर के जंगल में उड़ने वाली गलहरी दिखी। यह गिलहरी घने जंगलों एक ऐसी जीव प्रजाति जोे अधिकांश की खामोशी में रहता है। प्राप्त समाचार के अनुसार शुक्रवार को रामनगर वन प्रभाग की कोसी रेंज के टेड़ा गांव में एक बड़े आकार की गिलहरी अचानक एक ग्रामीण के घर में घुस गई। इसका आकार और रूप सामान्य गिलहरी से बिल्कुल अलग था, इसलिए लोगों ने पहले इसे किसी अनजान जीव के रूप में देखा। इस रहस्यमयी गिलहरी के मिलने की सूचना पर कोसी रेंज के रेस्क्यू एक्सपर्ट आशीष कश्यप और राजेश कश्यप मौके पर पहुंचे। उन्होंने गिलहरी को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, रामनगर क्षेत्र में इस प्रजाति की गिलहरी इससे पहले वर्ष 2014 में ढिकुली-गिरिजा क्षेत्र के वन में देखी गई थी। लगभग 12 वर्षों बाद दोबारा इसका दिखाई देना वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी दुर्लभ प्रजातियों का दोबारा दिखाई देना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र के जंगल अभी भी उनके रहने योग्य सुरक्षित आवास उपलब्ध करा रहे हैं। उड़ने वाली गिलहरी नाम सुनकर अक्सर लोग इसे पक्षियों की तरह उड़ने वाला जीव समझ लेते हैं, लेकिन वास्तविकता अलग है। यह गिलहरी अपने आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद पेटागियम नामक त्वचा की झिल्ली की सहायता से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक हवा में ग्लाइड करती है। यह एक बार में लगभग 60 मीटर तक बिना जमीन पर उतरे फिसल सकती है। यही अनोखी क्षमता इसे अन्य गिलहरियों से अलग बनाती है। इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल मुख्य रूप से रात्रिचर जीव है। दिन के समय यह पेड़ों के खोखलों या घने पत्तों के बीच आराम करती है और रात होने पर भोजन की तलाश में निकलती है। इसका भोजन फल, बीज, पत्तियां, फूल और पेड़ों की कोमल छाल होती है। दिन में इसका दिखाई देना सामान्य नहीं माना जाता। विशेषज्ञों के अनुसार, कभी-कभी आवास में व्यवधान, भोजन की तलाश या रास्ता भटकने के कारण यह मानव बस्तियों तक पहुंच जाती है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रजाति की मौजूदगी किसी भी जंगल के स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है। यह जीव घने और पुराने जंगलों पर निर्भर रहता है। ऐसे में रामनगर के जंगलों में इसका दोबारा मिलना वन संरक्षण के प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। हालांकि यह प्रजाति दुर्लभ है, लेकिन इसके सामने कई चुनौतियां हैं। जंगलों का सिकुड़ता दायरा, पेड़ों की कटाई, मानव हस्तक्षेप और आवास का विखंडन इसके अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्राकृतिक आवास सुरक्षित रखे जाएं और लोगों में वन्यजीवों के प्रति जागरूकता बढ़ाई जाए, तो ऐसी दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण संभव है। रामनगर में इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल का दोबारा दिखाई देना केवल एक वन्यजीव के मिलने की खबर नहीं, बल्कि यह प्रकृति का एक सकारात्मक संदेश है। यह याद दिलाता है कि यदि जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो उनकी अनमोल जैव विविधता भी सुरक्षित रहेगी। इस रहस्यमयी रात्रिचर जीव की वापसी भविष्य के लिए उम्मीद की नई उड़ान लेकर आई है। Post navigation उत्तराखंड को वैश्विक पर्यटन हब बनाने की पहल, 15-16 जुलाई को देहरादून में होगी पर्यटन चिंतन गोष्ठी नई खेल नीति में स्पेशल कैटेगरी के खिलाड़ियों के लिए होंगे विशेष प्रावधान : रेखा आर्या