ऊखीमठ, 21 मई। पंचकेदारों में द्वितीय केदार के रूप में विख्यात मध्यमहेश्वर धाम के कपाट गुरुवार पूर्वाह्न 11:30 बजे वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। कपाट खुलने के शुभ अवसर पर धाम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा। श्रद्धालुओं के जयकारों, महिलाओं के मंगल गीतों तथा पारंपरिक लोकवाद्यों की मधुर धुनों के बीच भगवान मध्यमहेश्वर की चल विग्रह उत्सव डोली धाम पहुंची।

बुधवार को भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली रात्रि प्रवास के लिए अंतिम पड़ाव गौंडार गांव पहुंची थी, जहां स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने भव्य स्वागत किया। गुरुवार सुबह डोली गौंडार से प्रस्थान कर बनातोली, खटारा, नानौ, मैखम्भा और कूनचट्टी होते हुए मध्यमहेश्वर धाम पहुंची। निर्धारित शुभ लग्न में पूजा-अर्चना के पश्चात मंदिर के कपाट खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही मध्यमहेश्वर घाटी में यात्रा सीजन की रौनक लौटने लगी है। यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों और स्थानीय बाजारों में श्रद्धालुओं की बढ़ती आवाजाही से उत्साह का माहौल देखा जा रहा है।

बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मीडिया प्रभारी डॉ. हरीश गौड़ ने बताया कि भगवान मध्यमहेश्वर की चल विग्रह डोली 19 मई को श्री ओंकारेश्वर मंदिर से प्रथम पड़ाव श्री राकेश्वरी मंदिर के लिए रवाना हुई थी। 20 मई को डोली हक-हकूकधारियों के गांव गौंडार पहुंची और 21 मई की सुबह वहां से प्रस्थान कर मध्यमहेश्वर धाम पहुंची। उन्होंने बताया कि निर्धारित तिथि और शुभ मुहूर्त के अनुसार गुरुवार पूर्वाह्न 11:30 बजे भगवान मध्यमहेश्वर जी के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत खोल दिए गए।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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