उत्तराखंड

उत्तराखण्ड में मानव-वन्य जीव संघर्ष चिन्ता का सबब

देहरादून। उत्तराखण्ड में मानव-वन्य जीव संघर्ष लम्बे समय से चला आ रहा है, किन्तु विगत वर्षों में यह संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है। वन विभाग के आंकड़ों को दिखाते हैं कि यह संघर्ष मानव जीवन के लिए खतरनाक होता जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में वन्य जीवों के हमले में कई लोगों की मौत हो गयी है। यह आंकड़ा सचमुच चौकानें वाला है। वर्ष 2000 से अभी तक मानव-वन्यजीवों के संघर्ष में लगभग 1264 व्यक्तियों की मौत हो चुकी है, वहीं 6519 लोग घायल हुए हैं। वन विभाग के ये आंकड़ें डराने वाले हैं।

पर्वतीय क्षेत्रों में गुलदार, भालू एवं सूअर के हमलों के कारण होने वाली मौतें सरकार के लिए भी चिन्ता का विषय है। वहीं बन्दरों एवं लंगूरों के कारण फसलें खराब हो रही है। भले ही वन विभाग इस पर लगातार नजर रख रहा हो, परन्तु ये घटनायें कम होने का नाम नहीं ले रही है। सरकार के पास इससे निपटने के लिए कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है। इसके साथ ही वन्यजीवों से होने वाली क्षति के मामलों में मुआवजा राशि में बढ़ोतरी पर जोर दिया जा रहा था। टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन फार सीटीआर की गवर्निंग बाडी की बैठक में वन्यजीवों के हमले में मृत्यु पर स्वजन को दी जाने वाली अनुग्रह राशि बढ़ाने की सिफारिश की गई थी। भले ही सरकार ने भी मुआवजा राशि बढ़ाकर 10 लाख करने और घायलों के उपचार का पूरा खर्च सरकार द्वारा उठाने का निर्णय लिया है।
विगत वर्षों हुए वन्यजीवों के हमले के आंकड़ेः-

वन्यजीव                          मृतक             घायल
गुलदार                              546             2126
हाथी                                  230             234
बाघ                                   106              134
भालू                                    71                2012
सांप                                    260             1056
जंगली सूअर                        30                663
मगरमच्छ                             09                44
ततैया                                    10               14
बंदर-लंगूर                            00               211
अन्य                                     02                23

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