उत्तराखंड

ऐलोपैथिक अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा

विकासनगर। राजकीय ऐलोपैथिक चिकित्सालय सेलाकुई में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद अस्पताल में सुविधायें न होने से मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता है। जिसके लिए लोगों को देहरादून के बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। कई लोगों की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण बिना उपचार के दूसरे अस्पताल जाना पड़ता है।
गढ़वाल सभा और पूर्व सैनिक संगठन ने कहा कि अस्पताल की स्थिति दस दिन के भीतर नहीं सुधरती तो जनसहयोग से आंदोलन चलाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र सेलाकुई में स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्र में करीब साढ़े तीन सौ से अधिक कंपनियां कार्यरत हैं। जिनमें बीस हजार से अधिक श्रमिक और कर्मचारी काम करते हैं। इसके अलावा चालीस हजार से अधिक की सेलाकुई और आसपास के क्षेत्र की आबादी हो चुकी है। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर एकमात्र ऐलोपैथिक अस्पताल है। जिसमें मरीजों के लिए मरहम पट्टी तक की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में एक फार्मासिस्ट और एक संविदा चिकित्सक तो है। लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण वे मरीज को उपचार नहीं दे पाते हैं। अस्पताल में ब्लड टेस्ट, पैथोलॉजी आदि की कोई सुविधा नहीं है। अस्पताल में कोई इमरजेंसी सेवा तक नहीं है। अस्पताल में उपचार के लिए आयी आशादेवी, केहर सिंह, अश्विन, अविनाश, राहुल, हेमराज, इंदु पटवाल आदि का कहना है कि अस्पताल नाम मात्र का है जिसमें प्राथमिक उपचार तक की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में गंदगी के जगह जगह ढेर लगे हैं। अस्पताल की प्रभारी डॉ. उमा का कहना है कि अस्पताल में व्यवस्थायें और सुविधायें न होने के कारण गंभीर प्रवृति के मरीज नहीं आते। यदि आते भी हैं तो उन्हे हायर सेंटर रेफर किया जाता है। उधर गढवाल सभा व पूर्व सैनिक संगठन के हरीश, राजेंद्र बलूनी, वीरसिंह रावत, प्रशांत, निवेदिता सकलानी, सुभाष कुमार, चमन, मोनिका आदि का कहना है कि यदि अस्पताल में दस दिन के भीतर सुविधायें उपलब्ध नहीं होती तो क्षेत्र के लोगों के साथ मिलकर आंदोलन किया जायेगा।

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