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पिथौरागढ़। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय साहित्य परिषद, लक्ष्मण सिंह महर पीजी कालेज पिथौरागढ़ और उत्तराखंड ज्ञानोत्सर्ष अकादमी भारत के संयुक्त तत्वाधान में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने समकालीन महिला लेखन पर विस्तार से चर्चा की। संगोष्ठी का शुभारंभ डॉ.निमिता कन्याल ने सरस्वती वंदना के साथ किया।
इस अवसर पर कार्यक्रम की संयोजक डॉ.वसुंधरा उपाध्याय ने कहा कि यदि हमारे भीतर किसी कार्य को करने की क्षमता है तो पितृ सत्तात्मक कोई भी व्यवस्था हमारे आड़े नहीं आ सकती है।
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रो.विद्या विंदु ने महिलाओं से संबंधित सामाजिक और आर्थिक सहित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
प्रो.नीतू परिहार ने कोरोना काल में महिलाओं की भूमिका पर, डॉ.श्रद्धा सिंह ने स्त्री पुरुष समानता, डॉ. ललिता जोगड़ ने महिला सशक्तीकरण पर, डॉ. अनामिका ने नारी की स्थिति पर अपने विचार रखे।
संगोष्ठी में अंतर्राष्ट्रीय मुख्य वक्ता मानसी नरुला कश्यप ने अमेरिका से ऑनलाइन जुड़कर अपने ‌विचार रखे। इसके अलावा देश के वि‌भिन्न विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।
प्रो.नीतू परिहार ने कोरोना काल में महिलाओं की भूमिका पर, डॉ.श्रद्धा सिंह ने स्त्री पुरुष समानता, डॉ. ललिता जोगड़ ने महिला सशक्तीकरण पर, डॉ. अनामिका ने नारी की स्थिति पर अपने विचार रखे। संगोष्ठी में अंतर्राष्ट्रीय मुख्य वक्ता मानसी नरुला कश्यप ने अमेरिका से ऑनलाइन जुड़कर अपने ‌विचार रखे। इसके अलावा देश के वि‌भिन्न प्रांतों से महिलाओं ने ऑनलाइन संगोष्ठी प्रतिभाग कर महिलाओं की वर्तमान स्थिति पर विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में सह संयोजक डॉ.मंजू आर्या, डॉ.रेखा पांडेय, डॉ.कविता जोशी ने भी अपने विचार रखे। संगोष्ठी का संचालन  डॉ.पुष्पा पंत ने किया। इससे पूर्व संयोजक प्राचार्य डॉ.अशोक नेगी ने सभी का स्वागत किया।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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