देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2026 की पहली छमाही में कई प्रमुख मंदिरों और तीर्थस्थलों में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यटन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जागेश्वर धाम, त्रियुगीनारायण, धारी देवी, पूर्णागिरि, कैंची धाम, कार्तिक स्वामी और सुरकंडा देवी जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक श्रद्धालु पहुंचे हैं। इससे स्पष्ट है कि चारधाम यात्रा के साथ-साथ अन्य धार्मिक स्थलों के प्रति भी लोगों का आकर्षण तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकार का कहना है कि तीर्थस्थलों पर सड़क, परिवहन, पेयजल, पार्किंग, स्वच्छता, आवास और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार का सकारात्मक प्रभाव धार्मिक पर्यटन पर दिखाई दे रहा है। प्रदेश के विभिन्न धार्मिक स्थलों को पर्यटन सर्किट से जोड़ने तथा प्राचीन मंदिरों के संरक्षण एवं विकास के लिए भी लगातार कार्य किए जा रहे हैं। पर्यटन विभाग के अनुसार अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम में जनवरी से जून 2026 के दौरान 1,74,119 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 67,875 थी। इसी प्रकार रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण मंदिर में इस वर्ष 3,40,385 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जबकि वर्ष 2025 की समान अवधि में यह संख्या 1,36,120 थी। श्रीनगर स्थित धारी देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़कर 5,42,626 पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 2,83,275 थी। चंपावत जिले के प्रसिद्ध पूर्णागिरि धाम में भी श्रद्धालुओं की अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। जनवरी से जून 2026 तक यहां 20,91,788 श्रद्धालु पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 14,35,290 लोगों ने दर्शन किए थे। इसके अलावा रुद्रप्रयाग के कार्तिक स्वामी मंदिर और टिहरी जिले के सुरकंडा देवी मंदिर में भी श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। नैनीताल जिले का प्रसिद्ध कैंची धाम भी देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण बना हुआ है। वर्ष 2026 की पहली छमाही में यहां 24,34,507 श्रद्धालु पहुंचे। इनमें केवल जून महीने में ही लगभग 8.66 लाख लोगों ने दर्शन किए, जो इस स्थल की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। टिहरी जिले के मुनिकीरेती, तपोवन और शिवपुरी क्षेत्र भी आध्यात्मिक पर्यटन के साथ साहसिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र बनकर उभरे हैं। जनवरी से जून 2026 के दौरान यहां 15,97,439 पर्यटक पहुंचे, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 13,62,600 थी। चारधाम यात्रा भी इस वर्ष नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रही है। यात्रा के 105 दिनों में 45.84 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं। वहीं यमुनोत्री धाम में 2 अगस्त तक 6,54,958 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए, जो धाम के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा बताया जा रहा है। दूसरी ओर बद्रीनाथ धाम में यात्रा के पहले 100 दिनों के भीतर 15,52,021 श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन लाख से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। पिथौरागढ़ जिले स्थित आदि कैलाश धाम में भी श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। यात्रा प्रारंभ होने के लगभग दो माह के भीतर 52,441 श्रद्धालु दर्शन कर चुके थे। मानसून के कारण फिलहाल यात्रा स्थगित है, लेकिन हाल के वर्षों में यहां आने वाले यात्रियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। धार्मिक पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क, आधुनिक सुविधाएं, डिजिटल प्रचार-प्रसार और तीर्थस्थलों के विकास कार्यों ने उत्तराखंड को देश के प्रमुख आध्यात्मिक पर्यटन केंद्रों में शामिल कर दिया है। स्थानीय लोगों को इससे रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं, जबकि होटल, होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिल रहा है। लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या इस बात का संकेत है कि उत्तराखंड केवल चारधाम यात्रा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य के अनेक प्राचीन मंदिर और धार्मिक स्थल भी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। Post navigation देहरादून: UKSSSC पेपर लीक मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, हाकम सिंह की 63 लाख रुपये की संपत्ति अटैच