चंपावत। उत्तराखंड में नगर निकाय चुनावों के तहत पहली बार गठित नगर पंचायत पाटी के चुनाव परिणामों ने स्थानीय राजनीति में नया संदेश दिया है। नगर पंचायत बनने के बाद पहली बार हुए अध्यक्ष पद के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी नारायण लाल ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भाजपा प्रत्याशी नवीन राम को बड़े अंतर से पराजित कर दिया। चुनाव परिणामों के अनुसार नारायण लाल को कुल 738 मत प्राप्त हुए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार नवीन राम को 301 मत मिले। इस प्रकार निर्दलीय प्रत्याशी ने 437 मतों के भारी अंतर से जीत हासिल की। चुनाव में पड़े कुल मतों में से 39 मत अवैध घोषित किए गए, जबकि 18 मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का विकल्प चुना। लोकतंत्र के नए अध्याय का पहला चुनाव पाटी क्षेत्र को हाल ही में नगर पंचायत का दर्जा मिला है। इसके बाद पहली बार यहां नगर निकाय चुनाव आयोजित किए गए। ऐसे में यह चुनाव स्थानीय विकास, आधारभूत सुविधाओं और भविष्य की नगर सरकार के गठन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। चुनाव को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह देखने को मिला और मतदाताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। 78 प्रतिशत से अधिक रहा मतदान 9 जून को हुए मतदान में कुल 2067 पंजीकृत मतदाताओं में से 1612 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह मतदान प्रतिशत लगभग 78 प्रतिशत रहा, जो स्थानीय निकाय चुनावों के लिए काफी अच्छा माना जा रहा है। इससे स्पष्ट है कि नगर पंचायत के गठन के बाद क्षेत्र की जनता अपने स्थानीय नेतृत्व के चयन को लेकर गंभीर और जागरूक रही। निर्वाचन अधिकारी ने घोषित किए परिणाम निर्वाचन अधिकारी अजय सिंह ने मतगणना पूरी होने के बाद परिणामों की आधिकारिक घोषणा की। परिणाम घोषित होते ही विजयी प्रत्याशी के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। समर्थकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर और नारेबाजी कर जीत का जश्न मनाया। वार्ड सभासद चुनाव परिणाम नगर पंचायत पाटी के विभिन्न वार्डों से सभासद पद के लिए भी चुनाव संपन्न हुए। घोषित परिणामों के अनुसार— न्यू कॉलोनी वार्ड से नवल पचौली 183 मत प्राप्त कर विजयी रहे। जौलाड़ी वार्ड से बबलू सिंह ने 151 मत हासिल कर जीत दर्ज की। रानीचौड़ वार्ड से शांति देवी 166 मतों के साथ निर्वाचित हुईं। पूनाकोट वार्ड से संगीता 145 मत प्राप्त कर विजयी घोषित की गईं। राजनीतिक मायने नगर पंचायत पाटी के पहले ही चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार की जीत को स्थानीय राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चुनाव परिणाम यह संकेत देते हैं कि मतदाताओं ने पार्टी से अधिक स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवार की व्यक्तिगत स्वीकार्यता को प्राथमिकता दी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम भविष्य में क्षेत्रीय राजनीति की दिशा और दलों की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है। Post navigation उत्तराखंड वन विभाग में बंपर तबादले: 180 से अधिक वनकर्मियों को मिली गृह जनपद के नजदीक तैनाती, वर्षों पुरानी मांग पर हुआ बड़ा फैसला