भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव (2014–2026)

नई दिल्ली। पिछले 12 वर्षों में भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला है। केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं, डिजिटल हेल्थ मिशन और व्यापक स्वास्थ्य सुधारों ने देश को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में मजबूत आधार प्रदान किया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 44 करोड़ से अधिक परिवारों को स्वास्थ्य बीमा के दायरे में लाया गया है, जबकि देश में 1.86 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य केंद्र कार्यरत हैं। इसके अलावा, 18,000 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से सस्ती दवाएँ 50% से 90% तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आयुष्मान भारत बना सबसे बड़ा हेल्थकेयर मॉडल

आयुष्मान भारत योजना ने भारत की स्वास्थ्य प्रणाली को नई दिशा दी है। इसके तहत अब तक करोड़ों लोगों को मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है। 70 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को भी इस योजना में शामिल कर स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की गई है।

इस योजना के तहत 36,000 से अधिक अस्पतालों को जोड़ा गया है और लाखों मरीजों को कैशलेस इलाज का लाभ मिल रहा है।

डिजिटल हेल्थ मिशन ने बदली तस्वीर

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल किया जा रहा है। अब 100 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से उपलब्ध हैं।

ABHA हेल्थ आईडी के माध्यम से मरीजों को कागज रहित इलाज, ऑनलाइन रिकॉर्ड और टेलीमेडिसिन की सुविधा मिल रही है। ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म पर अब तक 47 करोड़ से अधिक ऑनलाइन डॉक्टर परामर्श दर्ज किए गए हैं।

ग्रामीण भारत तक पहुंची स्वास्थ्य सेवाएं

आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) ने गांव-गांव तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई हैं। इन केंद्रों पर अब न केवल सामान्य इलाज बल्कि कैंसर, डायबिटीज, ब्लड प्रेशर और मानसिक स्वास्थ्य की जांच भी हो रही है।

अब तक इन केंद्रों पर 540 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपस्थिति दर्ज की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है।

टीबी, मलेरिया और संक्रामक रोगों में बड़ी गिरावट

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग और अन्य संक्रामक बीमारियों में उल्लेखनीय कमी आई है।

  • टीबी मामलों में तेज गिरावट दर्ज
  • मलेरिया उन्मूलन की दिशा में प्रगति
  • एचआईवी संक्रमण दर में 74% से अधिक कमी
  • डेंगू और कालाजार में भी उल्लेखनीय नियंत्रण

महामारी के दौरान भारत की मजबूत प्रतिक्रिया

कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक संचालित किया।

  • 220 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज़
  • हजारों ICU बेड और ऑक्सीजन सुविधाओं का विस्तार
  • 3,400 से अधिक टेस्टिंग लैब्स स्थापित
  • 100 से अधिक देशों को वैक्सीन सहायता

महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जननी सुरक्षा योजना, मिशन इंद्रधनुष और एनीमिया मुक्त भारत जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य संकेतकों को मजबूत किया है।

  • करोड़ों गर्भवती महिलाओं की निःशुल्क जांच
  • 95% से अधिक बच्चों का टीकाकरण
  • एचपीवी वैक्सीन अभियान से कैंसर रोकथाम

गैर-संक्रामक रोगों पर नियंत्रण

हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसे रोगों की समय पर पहचान के लिए बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग अभियान चलाए जा रहे हैं।

  • 60 करोड़ से अधिक कैंसर स्क्रीनिंग
  • करोड़ों लोगों की डायबिटीज और हाइपरटेंशन जांच
  • राष्ट्रीय कैंसर संस्थानों का विस्तार

सस्ती दवाएं और मुफ्त इलाज की सुविधा

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना और AMRIT फार्मेसी के माध्यम से दवाएं 50% से 90% तक सस्ती की गई हैं।

  • करोड़ों मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ
  • डायलिसिस और गंभीर बीमारियों का मुफ्त इलाज
  • आपातकालीन एम्बुलेंस नेटवर्क का विस्तार (108/102 सेवाएं)

टेलीमेडिसिन और AI से बदलता हेल्थकेयर सिस्टम

ई-संजीवनी और टेली-मानस जैसे प्लेटफॉर्म ने स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल और सुलभ बनाया है।

  • 47 करोड़+ टेलीमेडिसिन परामर्श
  • मानसिक स्वास्थ्य पर ऑनलाइन सहायता
  • AI आधारित रोग पहचान प्रणाली

नर्सिंग और मेडिकल शिक्षा में विस्तार

भारत में मेडिकल कॉलेज और नर्सिंग संस्थानों की संख्या में दोगुना से अधिक वृद्धि हुई है, जिससे डॉक्टर और नर्सों की उपलब्धता बढ़ी है।

भारत की स्वास्थ्य प्रणाली अब अधिक मजबूत, डिजिटल और समावेशी बन चुकी है। आयुष्मान भारत, डिजिटल हेल्थ मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने देश को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में आगे बढ़ाया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये सुधार भारत को 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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