देहरादून। रोजगार के क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार की उदासीनता प्रदेश के हमारे युवाओं के आत्मविश्वास को कमजोर कर रही है। जहां कोविड 19 वैश्विक महामारी के चलते लाखों प्रवासी अपना रोजगार गंवा कर अपने घर गांव लौटे है, वही प्रदेश में रोजगार की स्थिति देख वो भी चिंतित है। ऐसे में राज्य सरकार को रोजगार के अन्य साधन उपार्जित करने की पहल को और अधिक सुदृढ़ बनाना चाहिये। लेकिन लगता नहींं की सरकार इस और संजीदा है। यह बात कांग्रेस नेता व रूद्रप्रयाग जनपद के जखौली ब्लॉक प्रमुख प्रदीप थपलियाल ने कही। उन्होंने कहा कि रोजगार के क्षेत्र में उत्तराखंड सरकार द्वारा अभी तक किये गये प्रयासों के अनुभवों के आधार पर युवाओं का मोह भंग ही हुआ है। कुछेक पदों पर विज्ञप्ति जारी कर राज्य सरकार ने वाहवाही तो बटौरी लेकिन अभी तक अवर अभियंता, पशुधन अधिकारी, सहायक कर्षि अधिकारी और कनिष्ठ सहायक के पदों पर विज्ञप्ति जारी होने के उपरांत भी पेपर नही हुए है। पीसीएस और लोअर पीसीएस पर तो पिछले 4 सालों से ग्रहण ही लगा है। वन दरोगा के पदों में कटौती के कारण मामला अभी कोर्ट में लंबित है। केवल एक अदद वनआरक्षी की भर्ती परीक्षा जो 16 फरवरी 2020 को आयोजित की गयी उसका परीक्षा परिणाम भी अभी तक घोषित नही हुआ है? पहले परीक्षा आयोजित करने में ही 3 साल लग गये? जब भर्ती की लिखित परीक्षा हुई भी तो नकल कराने का मामला सामने आ गया। सरकार ने इसकी उच्च स्तरीय जांच करने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ दिया, किन्तु अभी तक न परीक्षा परिणाम ही घोषित हुए और न ही जांच रिपोर्ट का खुलासा हुआ। रोजगार के क्षेत्र में इस तरह की नीति बेरोजगार युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। राज्य सरकार को विभागीय भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ सुधार कर तेजी लानी होगी। जिससे हमारे युवाओं को रोजगार मिल सके।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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