हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार के कुलपति प्रो0 रूप किशोर शास्त्री से अक्षरधाम मन्दिर, दिल्ली के महा महोपाध्याय भद्रेश स्वामी ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान वैदिक हिन्दू को लेकर एक चर्चा कुलपति कार्यालय में आहुत हुई। स्वामी भद्रेश महाराज ने वेद को लेते हुए कहा कि हिन्दू सम्प्रदाय कई भागों में विभाजित हो चुका है। हिन्दुओं को एकत्रित करने का मूल मंत्र वेद है। उन्होंने कहा कि हमारी हिन्दू संस्कृति है और उसके मूल वेद हैं। मनुष्य वैदिक संस्कृति कहने से ही सनातन बन जाता है। वेद हमारे भगवान है। मूल वहां है जहां वैदिक छत्रछाया अपने-अपने सिद्धान्तों की पूर्ति करती है तो उससे कार्य की उन्नति होती है। यूनो अन्य के अस्तित्व को स्वीकार करने के लिए हमें वेदों की ओर चलना बहुत ही जरूरी है। वैदिक कहने से सभी पन्थ, सम्प्रदाय और जाति धर्म एक माला के मोती बन जाते हैं। वैदिक हिन्दू धर्म कहें तो सनातन धर्म का लाभ और उत्थान हो सकता है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो0 रूपकिशोर शास्त्री ने कहा कि वैदिक धर्म के साथ हिन्दुत्व परम्परा को जीवित रखना बहुत ही जरूरी है। आधुनिक हिन्दू धर्म धार्मिक व्यवस्थाओं पर आधारित है। वैदिक संस्कृत में चार वेदों का उल्लेख दिया हुआ है। जो हमारे वैदिक ग्रन्थ के रूप में सबके समक्ष है। वैदिक को आधुनिक विज्ञान भी कहना भी उचित होगा। वेदों को अब विदेशों ने प्रमाणिक विज्ञान मान लिया है। वर्तमान में वेदों के मन्त्रों और ऋचाओं को वैज्ञानिक भी सही साबित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय में वेदों के भाष्यों को लेकर बहुत अधिक काम हो रहा है। वर्तमान में विश्वविद्यालय वैदिक शोध संस्थान पर काम कर रहा है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो0 दिनेश चन्द्र भट्ट ने कहा कि वेदों में जंगलों, पक्षियों और जीव जन्तुओं के बारे में बहुत कुछ लिखा हुआ है। अक्षरधाम मन्दिर, दिल्ली के स्वामी महामहोपाध्याय भद्रेश और स्वामी मुनि वत्सल का वैदिक मंत्रों के साथ शाल उड़ाकर स्वागत किया गया। इस अवसर पर शशिकान्त, कुलदीप, डा0 पंकज कौशिक, अर्जुन, राजमल राणा और अन्य वैदिक विद्वान उपस्थित रहे।



