देहरादून। सरकार ने हर की पैड़ी को फिर से गंगा का दर्जा दे दिया है। इसके लिए 2016 में जारी एस्केप चैनल संबंधित शासनादेश निरस्त कर दिया गया है। इसी के साथ खड़खड़ी से हर की पैड़ी होते हुए कनखल तक की जलधारा को स्वत: गंगा का दर्जा मिल गया है।
सचिव आवास शैलेश बगौली की ओर से बुधवार को इसके आदेश जारी किए गए। हालांकि एस्कैप चैनल शब्द हटाने के अलावा उक्त शासनादेश के अन्य बिंदू अब भी प्रभावी रहेंगे। इस तरह इस क्षेत्र में निर्माणों पर फिर सवाल खड़ा हो सकता है।
गौरतलब है मैदानी क्षेत्रों में गंगा और उसकी सहायक नदियों के किनारे दो सौ मीटर के दायरे में निर्माण प्रतिबंधित करने संबंधित एनजीटी के आदेश के क्रम में राज्य सरकार दिसंबर 2016 में उक्त शासनादेश जारी किया था। इससे गंगा के दौ सौ मीटर दायरे में हुए निर्माण कार्यों को फौरी राहत तो मिल गई थी, लेकिन संत समाज सहित अन्य लोग शुरुआत से ही इस आदेश को निरस्त करने की मांग कर रहे थे।
हर की पैड़ी को फिर से गंगा का दर्जा देने का प्रस्ताव करीब डेढ़ साल से आवास विभाग के पास विचाराधीन था। सीएम त्रिवेंद्र रावत पूर्व में कई बार सहमति भी जता चुके थे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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