देहरादून। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भारत की सेवा-संस्कृति एवं संस्कारों को जीवंत करने वाला एक गैर-राजनीतिक संगठन  है। सेवा-भावना, उदारता, मानवीयता एवं एकात्मकता संघ की जीवनशैली एवं जीवनमूल्य हैं। संघ के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती और सेवा विभाग की कार्य योजना कोरोना वायरस की महामारी में दिनों-दिन गंभीर होती स्थिति के बीच राहत की उम्मीद बनी है। इस कार्य-योजना के अन्तर्गत कोरोना वायरस से निपटने के लिए राहत एवं बचाव का काम किया जा रहा है। संघ के स्वयंसेवक जिला और स्थानीय प्रशासन की मदद करने के साथ-साथ अपने मोहल्ले और बस्ती में जरूरतमंदोंं की हर प्रकार की मदद पूरी तत्परता से कर रहे हैं। इस महासंकट की घड़ी में गरीब और जरूरतमंदों के लिए संघ के स्वयंसेवक देवदूत साबित हो रहे हैं।

एक तरफ कोरोना के डर से लोग घरों में कैद हैं वहीं संघ के स्वयंसेवक और दायित्ववान कार्यकर्ता अपने घरों से बाहर निकल कर गली-मोहल्लों में घूमकर लोगों को कोरोना के खिलाफ कैसे लड़े, इसके लिए जागरूक कर रहे हैं। कोरोना वायरस महासंकट की अभूतपूर्व त्रासदी से निपटने के लिए संघ ने हर जिले में कंट्रोल रूम और हेल्पलाइन प्रारंभ की है। इस पूरे महाअभियान की मॉनिटरिंग  संघ के सरसंघचालक तथा सरकार्यवाह खुद कर रहे हैं। 

कोरोना के महासंकट से निजात पाने में दुनिया की बड़ी-बड़ी शक्तियां धराशायी हो गईं, ऐसे समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ एवं उसके स्वयंसेवक अपनी सुनियोजित तैयारियों, संकल्प एवं सेवा-प्रकल्पों के जरिये कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जरूरतमंदों की सहायता के लिये मैदान में हैं, ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के मंत्र पर चलते हुए देश के 529 जिलों में लोगों को स्वयंसेवक हर स्तर पर राहत पहुंचाने में जुटे हैं।

उत्तराखंड में भी अलग-अलग हिस्सों में  संघ के स्वयंसेवक गरीब और जरूरतमंदों को भोजन खिला रहे हैं, बस्तियों में जाकर मास्क, सेनेटाइजर, दवाइयां एवं अन्य जरूरी सामग्री बांटकर कर लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं, जागरूक कर रहे हैं। वे इस आपदा-विपदा में किसी देवदूत की भांति सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। कोरोना वायरस के चलते सब कुछ बंद है। दुकान, प्रतिष्ठान, फैक्ट्री, व्यापार पर ताला जड़ा हुआ है। ऐसे में रोजमर्रा का काम करने वालों के लिए निश्चित ही समस्या खड़ी हुई है। इस स्थिति में जो लोग रोज कमाकर खाते हैं उनको जीवन-निर्वाह में कोई परेशानी न होने पाए इसके लिए संघ विशेष रूप से जागरूक है। उत्तराखंड में संघ ने गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए मुफ्त में भोजन की व्यवस्था की। गांव में स्वच्छता बरकरार रहे इसके लिए कुछ स्वयंसेवकों ने मिलकर गांवों को बाकायदा सेनेटाइज तक किया है, झाडू लेकर सफाई करते दिखाई दिये हैं। सेवा भारती के स्वयंसेवकों ने पुलिस और अग्निशमन दल के साथ मिलकर अस्पतालों के परिसर की सफाई की और उन्हें कीटाणुरहित बनाने में सहयोग किया। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्वयंसेवक साफ-सफाई और स्वच्छता में लगे हुए हैं।

उत्तराखंड में संघ के अनुषांगिक संगठन सेवा भारती के माध्यम से संघ के स्वयंसेवक कोरोना वायरस महामारी के बचाव एवं राहत कार्य में तन मन धन से जुट गये हैं। संघ ने लॉक डाउन के चलते देशभर में फंसे राज्य के लोगों की मदद के लिए ऑनलाइन विंडो तैयार किया है। राज्य में जिला प्रशासन की सहायता के लिए हर बड़े शहरों एवं हर जिले एक कंट्रोल रूम भी खोला गया है जिसके माध्यम से राहत एवं बचाव का कार्य किया जा रहा है। संघ के प्रांत प्रचारक श्री यदुवीर सिंह ने उत्तराखंड संवाद भारती को बताया कि राज्य के 13 जिलों में संघ ने अपने कार्य को दृष्टिगत रखते हुए 25 जिला इकाइयां गठित की है, जिनमें देहरादून महानगर, विकासनगर, पुरोला, हरिद्वार, रुड़की, ऋषिकेश, टिहरी, उत्तरकाशी, देवप्रयाग, पौड़ी, थैलीसैण, कोटद्वार, चमोली, कर्णप्रयाग, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, डीडीहाट, चंपावत, अल्मोड़ा, रानीखेत ,बागेश्वर, नैनीताल, हल्द्वानी, उधमसिंह नगर एवं काशीपुर को संघ के जिले के रूप में गठित किया गया है। इस प्रकार इन जनपदों में कुल 371 स्थानों पर राहत एवं बचाव का कार्य किया जा रहा है, इस काम में 2372 संघ के स्वयंसेवक जुटे हुए हैं। अब तक 20355 जरूरतमंद लोगों को राशन की किट तथा 504268 लोगों को भोजन के पैकेट बांटे गए हैं। प्रतिदिन 23931 लोगों को भोजन के पैकेट बांटे जा रहे हैं। अब तक 24051 मास्क भी बांटे गए हैं। 5000 स्थानों पर सफाई एवं सैनिटाइजेशन का काम किया गया है तथा विद्यार्थी हॉस्टल अथवा गेस्ट हाउस में फंसे 3500 बाहरी छात्र-छात्राओं को राशन एवं भोजन मुहैया कराया जा रहा है। आवश्यकता पड़ने पर स्वयंसेवकों द्वारा रक्तदान भी किया जा रहा है। अब तक स्वंयसेवकों द्वारा 100 यूनिट रक्तदान किया गया है। 

संघ स्वयंसेवकों को संकट के समय राहत एवं बचाव कार्य करने का भी प्रशिक्षण होता है। संघ के 36 अनुषांगिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर तय योजना के अनुसार सेवा कार्यों में लगे हैं। कई बस्तियों में 15 दिन के लिए परिवार को कार्यकर्ताओं ने ही गोद ले लिया है। जो विद्यार्थी हॉस्टल अथवा गेस्ट हाउस में फंसे हैं, उनकी व्यवस्था भी स्वयंसेवक कर रहे हैं। किसी परिवार में दवाई की आवश्यकता हो या अस्वस्थता हो तो भी उस समय पूर्ण रूप से उनको हर चिकित्सीय सुविधा प्रदान कराई जा रही है। इस महासंकट एवं आशंकाओं के रेगिस्तान में तड़पते हुए आदमी के परेशानी एवं तकलीफों के घावों पर शीतल बूंदें डालकर उसकी तड़प-शंकाओं को मिटाने का अभिनव उपक्रम संघ कर रहा है। निश्चित ही संघ के प्रयत्नों से भारत में कोरोना का परास्त होना ही होगा।

 

By उत्तराखंड संवाद भारती

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