देहरादून। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने प्रदेश सरकार से नौ नवंबर को आने वाले राज्य स्थापना दिवस को ‘राज्य गौरव दिवस घोषित किए जाने की मांग की है। बुधवार को इस आशय का एक ज्ञापन राज्य आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री को प्रेषित किया। ज्ञापन के माध्यम से मांग करते हुए कहा कि राज्य स्थापना दिवस को राज्य गौरव दिवस घोषित किया जाए। साथ ही इस दिन सभी स्कूलों, महाविद्यालयों और सरकारी कार्यालयों में झंडा रोहण को अनिवार्य बनाया जाए।
इस मौके पर मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी ने कहा कि उत्तराखंड के निर्माण के लिए 42 राज्य आंदोलनकारियों ने अपनी शहादत दी। कई घायल हुए। कई जेल गए और कईयों ने यातनाएं झेली। ऐसे आंदोलनकारियों के ऐतिहासिक बलिदान से ही नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड राज्य का उदय हुआ। नेगी ने कहा कि प्रदेश के सभी राज्य आंदोलनकारी मंच के आह्वान पर नौ नवंबर का दिन राज्य गौरव दिवस के रूप में घोषित किए जाने की मांग करते हैं। मांग करने वालों में मंच के प्रदेश महामंत्री रामलाल खंडूरी, जिला अध्यक्ष प्रदीप कुकरेती, राकेश थपलियाल, यशवंत रावत, मोहन सिंह रावत, जीतपाल बड़थ्वाल, चंद्र किरण राणा, रघुवीर सिंह चैहान आदि शामिल रहे।उत्तराखंड राज्य चिन्हित आंदोलनकारी समिति के बैनर तले बुधवार को राज्य आंदोलनकारियों की समस्या और मांगों को लेकर मालसी में एक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में सरकार से मांग की गई कि नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर आंदोलनकारियों को एक समान पेंशन की घोषणा की जाए। दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ दिया जाए। गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाया जाए। शहीदों के नाम पर स्कूल, कालेज और महाविद्यालय खोले जाएं। इस मौके पर जिला महामंत्री चिंतन सकलानी, लोक बहादुर थापा, आशा सकलानी, जबर सिंह पावेल, नर्मदा नेगी, भुवनेश्वरी आदि मौजूद रहे।

By उत्तराखंड संवाद भारती

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