उत्तराखंड

बकाया मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी एक माह की मोहलत

नैनीताल। पूर्व मुख्यमंत्रियों के बकाया मामले में सरकार के अध्यादेश पर अब 18 नवम्बर को नैनीताल हाईकोर्ट सुनवाई करेगा। हाईकोर्ट ने अब राज्य सरकार व पूर्व मुख्यमंत्रियों को 4 हफ्ते का अन्तिम समय देते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। शुक्रवार को उत्तराखंड सरकार ने कोर्ट में सभी पक्षकारों को नोटिस सर्व करने की बात कही। जिसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने इसका विरोध किया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के प्राइवेट सचिवों को नोटिस दिया गया है। सरकार ने नोटिस देने को रिकॉर्ड में लेने की गुहार लगाई तो कोर्ट ने इसे मान लिया।
बता दें कि 3 मई 2019 को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने आदेश दिया था कि 6 महीने के भीतर इन मुख्यमंत्रियों पर बकाया की बाजार भाव से वसूली की जाए। लेकिन सरकार कोर्ट के आदेश के बचाव में अध्यादेश लेकर आ गई और 5 सितम्बर को राज्यपाल ने इसको स्वीकृति भी दे दी। इससे हाईकोर्ट का फैसला निष्प्रभावी हो गया था। उत्तराखंड सरकार के अध्यादेश में कहा गया कि राज्य के सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों के बंगलों, गाड़ी के किराए का भुगतान सरकार करेगी और इन लोगों के लिए पहले की तरह सभी सुविधाएं मुफ्त रहेंगी। इस मामले में पीआईएल डालने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अवधेश कौशल ने 11 सितंबर को उत्तराखंड सरकार के अध्यादेश को असंवैधानिक घोषित करने को लेकर हाईकोर्ट में फिर याचिका दाखिल की. याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार का अध्यादेश संविधान के आर्टिकल 14 और 21 के खिलाफ जाता है। याचिकाकर्ता अवधेश कौशल के वकील कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि इसी तरह का मामला उत्तर प्रदेश में भी सामने आया था. उत्तर प्रदेश सरकार ने भी पूर्व मुख्यमंत्रियों की सुविधाएं जारी रखने का कानून बनाया था जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।

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