उत्तराखंड

पौड़ी में क्वारंटाइन के दौरान तीसरी मौत

पौड़ी। जिले में क्वारंटाइन के दौरान तीसरे व्यक्ति की मौत हो गई है। इससे पहले दो लोगों की क्वारंटाइन में मौत हो चुकी है। नया मामला पाबौ ब्लॉक के पीपली गांव का है। यहां पर एक प्रवासी युवक गाजियाबाद से लौटा था। ये अपने घर में ही क्वारंटाइन में था। बीती देर रात उसकी मौत हो गई है। वहीं, सूचना मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिस टीम भी मौके पर पहुंची। चैकी इंचार्ज अजय सिंह के मुताबिक, बीते 10 मई को शैलेंद्र चमोली (40) गाजियाबाद से अपने गांव लौटा था। वो पहले भी बीमार था और उसका इलाज चल रहा था। देर रात अचानक तबीयत बिगड़ने से उसकी मौत हो गई। पाबौ अस्पताल के मेडिकल स्टाफ जेपी वर्मा ने बताया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि शैलेंद्र की मौत हृदय गति रुकने से हुई है। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमॉर्टम के बाद ही पता चल पाएगा कि मौत का असली कारण क्या है। बता दें कि पौड़ी जिले में क्वारंटाइन में यह तीसरी मौत है। इससे पहले भी एक महिला और पुरुष की मौत क्वारंटाइन सेंटर में हो चुकी है। शैलेंद्र चमोली की मौत के बाद से लोगों में खौफ का माहौल है। हालांकि, जिला प्रशासन ने सभी से धैर्य बनाए रखने की अपील की है।
पौड़ी जनपद के क्वरन्टीन  सेंटरों में लगातार तीसरी मौत पर कांग्रेस ने की चिंता व्यक्त
देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप ने पिछले एक सप्ताह में पौड़ी गढ़वाल जनपद के तीन विभिन्न विकास खंडों  के 3 क्वरन्टीन  सेंटरों में तीन लोगों की लगातार एक सप्ताह में मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि सबसे पहले पौड़ी जनपद के रिखणीखाल विकासखंड में उसके बाद बीरोंखाल विकासखंड में और अब ताजा मामले में पाबो विकासखंड के एक क्वरन्टीन  सेंटर में एक नौजवान की मौत का मामला सामने आया है ।
धीरेंद्र प्रताप ने कहा है कि ऐसा लगता है कि जो क्वरन्टीन सेंटर बनाए गए हैं। उनकी व्यवस्था ठीक नहीं है और तीनों मौत पर  जिला प्रशासन के द्वारा और राज्य सरकार के द्वारा यह ऐलान किया जाना कि इन लोगों की मौत दमा खांसी और हृदयाघात से हुई है, कई शंकाओं को जन्म देता है। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि यह लोग जैसा कि उन्हें जानकारी है अच्छे स्वास्थ्य के साथ अपने गांव में पहुंचे थे और उन सब की चेकिंग भी की गई थी ।व वे अपने गांव में स्थित स्कूलों में जो क्वरंटीन सेंटर बनाए गए हैं ।उनमें नियत 14 दिन की क्वरन्टीन उवधि  को पूरा कर रहे थे ।उन्होंने पौड़ी जनपद में  में हो रही इन मौतों पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से कहा है कि वह स्वयं पौड़ी जनपद के रहने वाले हैं ।अतरूउनका बड़ा दायित्व है कि उनके गृह जनपद में यदि कोई लापरवाही  हो रही है तो उन पर नजर रखी जाए।और व्यवस्था मे सुधार किया जाए। धीरेंद्र प्रताप ने कहा कि दो दिन पहले ही उन्होंने यह मांग उठाई थी कि जो क्वारंटीन  सेंटर हमारे यहां बनाए गए हैं ।एक तो वे स्तरीय नही है दुसरा उनमे  प्रधान पर ,बिना किसी अनुभव के  जिम्मेदारी डाल दी गई है जिसमें अब अनचाहे ही लापरवाही बरती जा रही है और इसी के चलते ना तो लोगों की थर्मल टेस्टिंग ठीक से हो रही है और ना ही इन  केंद्रों में उनके रहने सहने रखरखाव दवाई और देखभाल की ठीक से व्यवस्था हो पा रही है। उल्टा यह सेवा केंद्रों की बजाए अब यातना केंद्र बनते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार द्वारा अब तक भी गांव के प्रधानों को पैसा ना पहुंचाने पर भी नाराजगी का इजहार किया है और इन तीनों मौतों की जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग की है।
बेजुबान पशुओं के लिए की पेयजल की व्यवस्था
पौड़ी। लॉकडाउन में पौड़ी शहर के बेजुबान पशुओं के कुछ युवाओं द्वारा पेयजल की व्यवस्था की जा रही है। युवाओं का कहना है कि जानवरों को पशुपालन विभाग द्वारा भोजन तो उपलब्ध करवाया जा रहा है लेकिन पेयजल की व्यवस्था नहीं होने के चलते यह पहल की गई है। कोरोना वायरस के तहत चल रहे लॉकडाउन में शहर के बेजुबान पशुओं के सामने भोजन का संकट शुरू हो गया था। जिसके बाद से पशुपालन विभाग की ओर से सभी जानवरों के लिए भोजन व्यवस्था की गई थी लेकिन बढ़ती गर्मी को देखते हुए प्रशासन की ओर से पशुओं के लिए पानी की कोई व्यवस्था नहीं हो पा रही थी। शहर के कुछ युवाओं ने मिलकर बेजुबान पशुओं की प्यास बुझाने के लिए एक छोटी सी पहल की है। इन युवाओं द्वारा मिलकर विभिन्न स्थानों में छोटे-छोटे ड्रम लगाकर उन में पानी डाल रहे हैं और सभी पशु यहां आकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं। इन युवाओं ने लोगों से भी समय-समय पर इन ड्रमों में पानी भरने की अपील की है जिससे कि इन पशुओं की प्यास बुझ सके। पशुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था कर रहे युवा आभास कठैत ने बताया कि लॉक डाउन के बाद उनके पड़ोस में बहुत से ऐसे पशु थे जो रोजाना प्रशासन की ओर से दिए जा रहे भूसे को खा रहे थे लेकिन पानी के लिए कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने अपने पड़ोस से इसकी शुरूआत की और धीरे-धीरे पूरे शहर में सात से आठ ड्रम लगाए हैं। इस पहल में आकाश रावत, अनुज, रजत उप्रेती, धर्मेंद्र गुसांई उनका साथ दे रहे हैं।

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