देहरादून। उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी की शानदार जीत के बाद सरकार बनाने की कवायद शुरू हो गई है, लेकिन मुख्यमंत्री रहे पुष्कर धामी के खटीमा से चुनाव हारने के बाद भाजपा के सामने एक बड़ा संकट आ गया है। सीएम पद पर कौन आसीन होगा इसे लेकर कई कयास लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री पद के लिए के धामी की केंद्रीय नेतृत्व की पहली पसंद हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व एक बार फिर एक मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी पुष्कर सिंह धामी को मिल सकती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे पर भाजपा ने चुनाव लड़ा। भाजपा के हलकों में चर्चाएं गर्म है कि पार्टी चुनाव हारने के बावजूद धामी को ही सत्ता की बागडोर सौंप सकती है। इसके पक्ष में पश्चिम बंगाल में विस का चुनाव हारी ममता बैनर्जी का उदाहरण दिया जा रहा है, जो पार्टी को जिता गई थीं, लेकिन खुद चुनाव हार गईं।
सीएम बनाए जाने के पक्ष में यह तर्क भी दिया जा रहा है कि चुनाव के दौरान उनके पास इतना समय नहीं था कि वह अपनी विधानसभा सीट पर समय देते। उन्होंने पूरे प्रदेश में चुनाव प्रचार किया। हालाकि सत्ता में रहते चुनाव हारने वाले वे उत्तराखंड के तीसरे मुख्यमंत्री हो गए हैं। इससे पहले 2017 में हरीश रावत और 2012 मे भुवंचन्द्र खंडूरी को हार का सामना करना पड़ा था।
खटीमा से विधायक रहे सीएम पुष्कर सिंह धामी भले ही अब मुख्यमंत्री नहीं रहे। बावजूद इसके सीएम पद के उम्मीदवार के लिए अब भी ज्यादातर की पसंद बने हुए हैं।
मुख्यमंत्री के सवाल पर पार्टी के प्रदेश चुनाव प्रभारी प्रह्लाद जोशी का कहना है कि इस बारे में केंद्रीय नेतृत्व को निर्णय करना है और सरकार गठन को लेकर एक-दो दिन में स्थिति साफ हो जाएगी।
वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नाम सामने आए हैं। विधायकों में से सतपाल महाराज और धन सिंह के नामों की चर्चा है। दोनों नाम पूर्व में भी चर्चा में रहे हैं। भाजपा यदि विधायकों के अलावा मुख्यमंत्री के चेहरा तलाशती है तो उसके लिए तीन प्रमुख नामों की चर्चा शुरू हो गई है। इनमें पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी और केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री अजय भट्ट के नाम लिए जा रहे हैं।
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