उत्तराखंड

निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का रखा जाए विशेष ध्यान

कार्यदायी संस्थाओं को उनकी क्षमता के अनुसार कार्य आवंटित किये जाएंः सीएम
-विभागीय निर्माण कार्यो को समय से पूर्ण कराना है विभागाध्यक्षों की नैतिक जिम्मेदारी
देहरादून। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने गुरूवार को सचिवालय में विभिन्न विभागों में कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से सम्पन्न कराये जा रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने विभागाध्यक्षों को निर्देश दिये कि कार्यदायी संस्थाओं की कार्य क्षमता एवं दक्षता का आंकलन करने के पश्चात ही उन्हें निर्माण कार्य सौंपे जाएं। ग्रामीण अभियन्त्रण विभाग की कार्य क्षमता के दृष्टिगत उन्हें 10 करोड़ के कार्य आवंटन पर भी मुख्यमंत्री ने सहमति प्रदान की, पूर्व में यह सीमा 5 करोड़ निर्धारित थी।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने विभिन्न विभागों के अन्तर्गत किये जा रहे निर्माण कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कार्यों को निर्धारित अवधि के अन्दर पूर्ण करने के स्पष्ट निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों का समय पर पूर्ण न होने से उसकी लागत बढ़ने के साथ ही आम जनता को उसका लाभ भी समय पर नहीं मिल पाता है इसके लिये विभागाध्यक्षों को स्वयं भी स्थिति का आंकलन करना चाहिए जो उसकी नैतिक जिम्मेदारी भी है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिये कि निर्माण कार्यों के लिये स्वीकृत धनराशि अविलम्ब आवंटित की जाये ताकि इसके लिये संस्थाओं को अनावश्यक रूप में सचिवालय के चक्कर न लगाने पड़े। उन्होंने निर्माण कार्यों को समय पर पूर्ण करने के लिये कार्य संस्कृति में बदलाव लाने तथा कार्यावधि बढ़ाये जाने पर बल दिया। निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के साथ ही 5 करोड़ से अधिक के कार्यों का थर्ड पार्टी आडिट की अनिवार्य व्यवस्था बनाने, पुलों व अन्य बड़े तकनीकी क्षमता के कार्य स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे की भी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी मुख्यमंत्री ने दिये। उन्होंने विभागीय कार्यदायी संस्थाओं को अपनी क्षमता का आंकलन कर निर्माण कार्य अपने हाथ में लेने को कहा, साथ ही यह भी निर्देश दिये कि उन्हीं संस्थाओं को बड़े कार्य दिये जाएं जिनकी इन कार्यों के लिये पूरी क्षमता हो।
मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र ने कार्यदायी संस्थ्ेााओं को स्पष्ट निर्देश दिये कि वे एक साथ 10 काम हाथ में न लें, इससे कार्यों को पूर्ण करने में विलम्ब होता है। वे अपनी क्षमता के अनुसार ही कार्य हाथ में लें तथा एक योजना पूर्ण करने के बाद ही दूसरी शुरू करें। इससे कार्यों के बेहतर परिणाम प्राप्त हो सकेंगे।
बैठक में सचिव वित्त अमित नेगी ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि प्रदेश की कार्यदायी संस्थाओं में ब्रिडकुल, पेयजल निगम, जीएमवीएन, केएमवीएन, आर,ईएस, कृषि विपणन बोर्ड, लोक निर्माण व सिंचाई विभाग को विभिन्न विभागों के 1361.61 करोड़ के 267 कार्य आवंटित किये गये हैं, जबकि प्रदेश के बाहर की संस्थाओं उ.प्र. राजकीय निर्माण निगम, ब्रिज एण्ड रूफ कम्पनी इंडिया, एन.बी.सी.सी व एन.पी.सी.सी को 3271.35 करोड़ के 361 कार्य आवंटित किये गये हैं। बैठक में अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव, मनीषा पंवार, सचिव भूपिन्दर कौर औलख, नीतेश झा, प्रेम सिंह खिमाल, हरवंश सिंह चुग, अरविंद सिंह हयांकी के साथ ही विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष व केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग एच.एस.सी.एल, ईपी आई एल वाप्कोश के साथ ही अन्य कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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