उत्तराखंड

चरैवेति चरैवेति के सिद्धांत से ही मिलेगी सफलता

गृहे गृहे गायत्री यज्ञ उपसना वर्ष के लिए केन्द्रीय टोलियो का प्रशिक्षण हुआ समाप्त
हरिद्वार। समाज को नई दिशा देने का कार्य धर्म तंत्र का है। धर्म तंत्र से लोक शिक्षण हो तो समाज आगे बड़ेगा। परम पंडित श्री राम  शर्मा आचार्य ने गायत्री परिवार की नींंव इसी आधार पर खड़ी की है। समर्पित भाव से समाज सेवा करना और अपने अनुभवोंं को समाज हेतु समर्पित करना हर लोक सेवी का लक्ष्य होना चाहिए यह बात अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख  डॉ प्रणव पंड्या ने आज गृहे गृहे गायत्री यज्ञ उपसना वर्ष हेतु केन्द्रीय टोलियो का प्रशिक्षण के समापन पर कही। डॉ पंड्या ने कहा की वानप्रस्थ परंपरा और परिव्रजाक परंपरा आज की महती आवश्यकता है। समाज को अपने अनुभवो के आधार पर ज्ञान का प्रदान करना वानप्रस्थ का धर्म है और परिवाजाक सतत चरैवेति चरैवेति के  सिद्धांत को अपनाता है। शैला दीदी ने सभी टोली में प्रस्थान करनेवाले भाईओ को उज्जवल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम विभाग के अनुसार शांतिकुंज द्वारा 2019 -2020 के लिए देश भर में होने वाले  गृहे गृहे गायत्री यज्ञ उपसना  हेतु 7 दिनों तक प्रशिक्षण चला जिसमे 75 वानप्रस्थ और परिव्रजाको ने शिक्षण लिया। यह प्रतिभागी आगामी 1 अक्टूबर से देश भर के 450 से अधिक जिलों में निकलेंगे। उत्तर प्रदेश ,मध्य प्रदेश ,बिहार ,गुजरात ,  छत्तीसगढ़ सहित पूर्वोतर भारत में यह कार्यकर्त्ता निकलेंगे। इस से पूर्व शांतिकुंज के वरिष्ठ मनीश्री वीरेश्वर उपाध्याय कपिल केसरी वर्मा ,कालीचरण शर्मा,  ओ.पी. शर्मा आदि भाईओ ने प्रतिभागओ को संबोधित किया।

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