उत्तराखंड

नगर निगम को ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन व रूट निर्धारण का अधिकार नहीं

काशीपुर। नगर निगम को न तो ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन का कोई अधिकार है और न ही वह इनका रूट निर्धारण ही कर सकता है। इतना ही नहीं इनसे कोई टैक्स वसूली का भी नगर निगम व अधिकारियों को अधिकार नहीं है। इसके नाम पर ई-रिक्शा जब्त करने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी लूट व डकैती का मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।
नगर निगम अधिकारियों द्वारा समय-समय पर ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन, रूट निर्धारण व रिक्शा जब्त करने के आदेशों की खबरों पर माकाक्स के केन्द्रीय अध्यक्ष तथा कानूनी पुस्तकों के लेखक नदीम उद्दीन एडवोकेट ने बताया कि नगर निगम अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। यहां तक कि ई-रिक्शा सहित किसी मोटर वाहन पर बाइलाॅज व नियम बनाकर भी कोई टैक्स नगर निगम द्वारा नहीं लगाया जा सकता है। इसलिये यदि निगम के कर्मचारी, अधिकारियों द्वारा इस आधार पर ई-रिक्शा जब्त करने के नाम पर अवैध रूप से छीना जाता है तो यह भारतीय दंड संहिता के अन्तर्गत दंडनीय लूट व डकैती का अपराध होगा। साथ ही इससे हुये नुकसान का मुआवजा भी नगर निगम व सम्बन्धित अधिकारियोें, कर्मचारियों से वसूला जा सकता है।
श्री नदीम के अनुसार नगर निगम अधिनियम में ई-रिक्शा सहित किसी मोटर वाहन के रजिस्ट्रेशन का अधिकार नहीं है। ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन, परमिट तथा चलाने का लाइसेंस केवल परिवहन विभाग द्वारा ही अन्य मोटर वाहनों के समान ही जारी किया जा सकता है। यहां तक कि बाॅयलाज बनाकर इन पर कोई टैक्स भी नगर निगम द्वारा नहीं वसूला जा सकता है। यह नगर निगम अधिनियम की धारा 172(1) (ख) से स्पष्ट है। श्री नदीम के अनुुसार नगर निगम द्वारा किसी बाहरी तथा शहर के निवासी के आधार पर भी किसी ई-रिक्शा चालक से कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता है। यह स्वयं भारतीय संविधान के समानता के मूल अधिकार अनुच्छेद 14,15 तथा 16 का खुला उल्लंघन होगा। प्रदेश के बाहर के लोगों के साथ ऐसा करना उत्तराखंड में धारा 370 जैसा प्रावधान अवैध रूप से लागू करना होगा। श्री नदीम के अनुसार नगर निगम में रजिस्ट्रेशन न कराने के आधार पर 5 से कम निगम अधिकारी व कर्मचारियों द्वारा अगर जब्ती के नाम पर ई-रिक्शा छीना जाता हैै तो यह भारतीय दंड संहिता की धारा 392 के अन्तर्गत दस वर्ष तक की सजा से दंडनीय लूट का अपराध होगा। यदि ऐसा 5 या अधिक कर्मचारी, अधिकारियों द्वारा किया जाता है तो आजीवन कारावास तक की सजा से दंडनीय डकैती का अपराध होगा। जिसका मुकदमा पुलिस व न्यायालय के माध्यम से दर्ज कराया जा सकता है। इतना ही नहीं ऐसा करने से होने वाले नुकसान का मुआवजा संबंधित नगर निगम व अधिकारियों से वसूला जा सकता है। श्री नदीम ने कहा कि जाम की समस्या से निपटने के लिये नगर निगम द्वारा ई-रिक्शा रजिस्ट्रेशन व रूट निर्धारण समाधान नहीं हैै बल्कि इसके लिये नगर आयुक्त को नगर निगम की बैठक से पास कराकर नगर निगम अधिनियम की धारा 277 के अन्तर्गत भीड़ भाड़ वाले रास्तों पर भीड़ के समय तिपहिया, चैपहिया वाहनों पर प्रतिबंध लगाने व उसे लागू कराने की कार्यवाही की जानी चाहिये।

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