चमोली- जनपद के दशौली विकासखंड अंतर्गत गौणा-भनाली क्षेत्र के बोन्धार तोक से एक अत्यंत दुखद और हृदयविदारक घटना सामने आई है। सोमवार को अचानक मौसम खराब होने के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से लगभग 500 बकरियों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में क्षेत्र के एक दर्जन से अधिक भेड़-बकरी पालकों को लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौणा-भनाली बोन्धार तोक में स्थानीय पशुपालक अपने बकरियों के झुंड को चराने के लिए ऊपरी चारागाह क्षेत्र में ले गए थे। दोपहर बाद अचानक मौसम ने करवट बदली और तेज गर्जना के साथ वर्षा शुरू हो गई। इसी दौरान अचानक आकाशीय बिजली सीधे उस स्थान पर गिरी, जहां बड़ी संख्या में बकरियां एकत्रित थीं। बिजली गिरते ही वहां अफरा-तफरी मच गई और देखते ही देखते सैकड़ों बकरियां जमीन पर गिर पड़ीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली गिरने की घटना इतनी भयावह थी कि पशुपालकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। कुछ ही क्षणों में लगभग 500 बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे में राकेश सिंह, हुकम सिंह, मदन लाल सहित करीब एक दर्जन पशुपालकों की बकरियां चपेट में आ गईं। बताया जा रहा है कि इन सभी पशुपालकों की आजीविका का मुख्य साधन भेड़-बकरी पालन ही है, ऐसे में यह हादसा उनके लिए गहरा आर्थिक और मानसिक आघात बनकर सामने आया है। घटना में दो भेड़ पालकों के घायल होने की भी सूचना है। बताया जा रहा है कि बिजली गिरने के समय वे भी झुंड के पास ही मौजूद थे और उसकी चपेट में आकर घायल हो गए। स्थानीय लोगों द्वारा दोनों घायलों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। उनकी स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, राजस्व विभाग और पशुपालन विभाग की टीम मौके के लिए रवाना हो गई। प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार इस घटना में पशुपालकों को लाखों रुपये की क्षति हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित पशुपालकों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पर्वतीय क्षेत्रों में भेड़-बकरी पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। इस प्रकार की प्राकृतिक आपदा से पशुपालकों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को त्वरित आर्थिक सहायता, पशुधन क्षति का मुआवजा तथा घायल पशुपालकों के समुचित उपचार की व्यवस्था की जाए। यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते खतरे की ओर संकेत करती है। अचानक बदलते मौसम और आकाशीय बिजली जैसी घटनाएं पर्वतीय जीवन और आजीविका पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं। फिलहाल पूरे क्षेत्र में इस दर्दनाक हादसे के बाद शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है। Post navigation गौवंश संवर्द्धन के लिए ‘गौवृत्ति परिवार’ आवश्यकः नवल किशोर ऋषिकुल स्थित मालवीय प्राच्य शोध संस्थान को मिलेगा नया स्वरूप, मुख्यमंत्री धामी ने की उच्चस्तरीय समीक्षा