देहरादून। कोरोना वायरस के रोकथाम एवं सतर्कता के चलते सोमवार को लम्बे समय बाद राज्य सूचना आयोग उत्तराखंड में आडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई शुरू की गयी। पिछले जनवरी माह में राज्य तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड में प्रतिवर्ष जेई मैंस रैंक के आधार पर होने वाली कौंसिलिंग पर असंतुष्टता की स्थिति पर विभागीय लोक सूचना अधिकारी एवं अपीलीय अधिकारी से समयबद्ध संतोषजनक सूचनाएं न मिलने के कारण अपील की गई, जिसकी सुनवाई आज की गई। विगत वर्षों तक तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड द्वारा जेई मैंस की आल इंडिया रैंक के आधार पर बी टैंक के लिए कौंसिलिंग करते समय राज्य की रैंक का निर्धारण होता था किन्तु पिछले वर्ष तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड द्वारा राज्य की रैंक शून्य है, जबकि राज्य में जेई मैंस की आल इंडिया रैंक के आधार पर राज्य की कोई न कोई रैंक तो होगी। पिछले वर्षों से भारत सरकार द्वारा सामान्य वर्ग के लिए जिसकी वार्षिक आय पांच लाख से कम हैं ऐसे परिवार के होनहार छात्रों के लिए टी.एफ.डब्लू कैटेगरी का निर्धारण हुआ है जिसका कि बी टैंक कालेजों में सीटें निर्धारण में दस प्रतिशत आरक्षण निर्धारण हैं। माना किसी अभ्यर्थी की टी.एफ.डब्लू कैटेगरी में आल इंडिया रैंक अट्ठारह हजार है। उसमें राज्य द्वारा उनकी राज्य में रैंक का निर्धारण ही नहीं हुआ है। सूचना प्राप्त करने से पता चला है,कि गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय पंतनगर ऊधमसिंहनगर एवं गोविंद बल्लभ पंत इन्स्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलॉजी संस्थान घुड़दौड़ी पौड़ी गढ़वाल एक स्वयतशासी संस्थाएं हैं जिनमें तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड के नियम नहीं चलते तो विश्वविद्यालय पंतनगर और घुड़दौड़ी में बी टैंक के लिए कौसिलिंग क्यों करवाता है-? राज्य के सभी सरकारी बी टैंक कालेज तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड से सम्बद्ध हैं और इन बी टैंक कालेजों में सारी परि नियमावलियां तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड की चलती हैं तो सरकारी बी टैंक कालेजों की ट्यूशन फीस अलग-अलग क्यों हैं-? जब अभ्यर्थी बी टैंक कालेज की कौंसिलिंग करते समय तकनीकी विश्वविद्यालय द्वारा कौंसिलिंग करते समय दो हजार रुपये की धनराशि जमा करता है तो अभ्यर्थी बी टैंक कालेज परिवर्तन करते समय स्थानीय आधार पर क्यों काटा जाता है-? ऐसे अनेक बिंदुओं पर राज्य सूचना आयुक्त के समक्ष बीस मिनट तक ओडियो काल द्वारा सुनवाई हुई जिसमें तकनीकी विश्वविद्यालय उत्तराखंड के लोक सूचना अधिकारी बिना पूर्व तैयारी के संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाये। सूचना आयुक्त ने वस्तुस्थिति को ठीक प्रकार से जानने के लिए लोक सूचना अधिकारी को काफी फटकार लगाई। मामले की अगली सुनवाई 20 अक्टूूबर की तिथि नियत की गई है। Post navigation उत्तराखंड कोरोना अपडेटः बीते 24 घण्टों में रिकॉर्ड 1184 मरीज ठीक हुए एनयूजे का प्रांतीय संरक्षक मंडल मनोनीत, ब्रह्मदत्त शर्मा मुख्य संरक्षक बनें