देहरादून। ऑप्टिकल कोहरंस टोमोग्राफी (ओसीटी) प्रकाश के कोहरंस के आधार पर मानवीय अंगों की टोमोग्राफिक तस्वीर प्राप्त करने की एक विधि है। ओसीटी का सबसे पहले इस्तेमाल 1996 में ऑप्थेल्मोलॉजी फील्ड में क्लिनिकल सेटिंग के तौर पर किया गया था। अब रेटिना से संबंधित रोगों और अन्य स्थितियों का आकलन करने के लिए व्यापक रूप से इस का इस्तेमाल किया जाता है। ओसीटी एक अनूठा तरीका है, जो विशेषताओं के साथ इमेजिंग मॉडेलिटी का वादा करता है। यह पारंपरिक तौर-तरीकों से भिन्न है, जैसे कि आईवस, क्योंकि ओसीटी में हाई रेजोल्यूशन है। यह उस शिरा के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान कर सकता है, जो किसी अन्य तरीके से प्राप्त नहीं की जा सकती। हमने हाल ही में ष्यूज ऑफ ओसीटी इनकॉम्प्लेक्स एंजियोप्लास्टी (जटिल एंजियोप्लास्टी में ओसीटी का इस्तेमाल) विषय पर एक सजीव कार्यशाला का आयोजन किया। एंजियोप्लास्टी के दौरान इंट्रा कोरोनरी इमेजिंग से प्राप्त जानकारी हमें कोरोनरी स्टेंटिंग के सर्वोत्तम परिणाम हासिल करने में मदद करती है। कैल्शियम, खून के थक्के और डिसेक्शन जैसी धमनी की रुकावट विशेषताओं को डायग्नोज करने में मदद करती है। प्रक्रिया के दौरान यह सही स्टेंट इम्प्लांटेशन तकनीक के लिए मार्गदर्शन करता है। इमेजिंग तकनीकों के उपयोग से जटिल कोरोनरी प्रक्रियाओं में रुकावट या थक्का बनने की पुनरावृत्ति जैसी भविष्य की जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। ओसीटी एक इमेजिंग मॉडेलिटी है जिसे भविष्य मे ह्रदय की धमनियों की बीमारी के निदान और उपचार के लिए तेजी से लोकप्रिय होने की उम्मीद की जा सकती है। Share on FacebookPost on XFollow usSave Post navigation वन अनुसंधान संस्थान में मनाया गया हिंदी पखवाड़ा, विभिन्न प्रतियोगिताएं हुईं आयोजित धूमधाम से मानाया गया विश्वकर्मा जयन्ती महोत्सव