नई दिल्ली (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने अलकनंदा हाइड्रो पावर कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया है कि वो उत्तराखंड के टिहरी जिले में हाइड्रोपावर प्लांट के पानी के चैनल में रिसाव को बंद करने के लिए कदम उठाए। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने ये आदेश जारी किए हैं। याचिका उत्तराखंड निवासी उत्तम सिंह भंडारी ने दायर किया था। याचिका में हाइड्रोपावर प्लांट के पानी के चैनलों में रिसाव को दुरूस्त करने के लिए उचित कदम उठाने और टिहरी गढ़वाल जिले के मांगसू, सुरासू और नौर थापली गांवों में लोगों का जीवन सुरक्षित करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई थी। याचिका में कहा गया था कि अलकनंदा नदी पर एक बांध बनाकर 82.5 मेगावाट के चार टरबाइन के जरिये 330 मेगावाट बिजली का उत्पादन किया जाता है। इस बांध से बिजली घर के बीच नदी करीब एक किलोमीटर भूमिगत चैनल से और 3.2 किलोमीटर खुले चैनल से गुजरती है। याचिका में कहा गया था कि 2015 में बांध का पानी लीक होने से फसलों और मकानों को काफी नुकसान हुआ था। दरअसल एनजीटी की ओर से नियुक्त एक कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। कमेटी में बिजली और ऊर्जा विभाग, उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि और टिहरी गढ़वाल के जिलाधिकारी शामिल हैं। रिपोर्ट में श्रीनगर हाइड्रोपावर प्लांट के सुपदा गांव के भूमिगत चैनल में रिसाव देखे जाने की बात कही गयी है। कमेटी की रिपोर्ट पर गौर करने के बाद एनजीटी ने ये आदेश जारी किया। हिन्दुस्थान समाचार Share on FacebookPost on XFollow usSave Post navigation भागवत ने जन्मदिन पर 123 वर्षीय संत से लिया आशीर्वाद एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण